देशभर में तीन तलाक पर मचे बवाल के बीच एक नया सवाल आ खड़ा हो गया है। वह ये है कि अगर पत्नी जबरन अपने पति से तलाक चाहे और उसे मजबूर कर ले ले तो क्या होगा। क्या वो तलाक माना जाएगा। ऐसा ही एक मामला हरियाणा के नगीना में सामने आया है जिसमें ऐतिहासिक मदरसे ने एक बड़ा फतवा जारी किया है।
तलाक लेने के लिए पति को बनाया बंधक तो ऐतिहासिक मदरसे ने जारी कर दिया ये फतवा
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देवबंद के ऐतिहासिक मदरसा शाही मुरादाबाद के मशहूर मुफ्ती सब्बीर अहमद ने मेवात के युवक आलम को बंधक बनाकर लिए गए तलाक को गैर-इस्लामी बताया है। फतवा जारी करते हुए निकाह को बरकरार रखा है। साथ ही लड़की को हिदायत दी गई है कि वह तब तक दूसरी शादी नहीं कर सकती, जब तक उसका आलम से तलाक नहीं हो जाता।
जारी फतवे में स्पष्ट लिखा गया है कि राबिया को हलाला करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसका निकाह अभी तक कायम है। अगर कोई लड़की बिना तलाक के शादी रचा लेती है, तो वह शरीयत के खिलाफ है। इस फतवे को राबिया के पति आलम ने अपने ससुर हाजी ताहिर को भेज दिया है।
उल्लेखनीय है कि 17 मार्च, 2016 को मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार मोहम्मद आलम निवासी गांव गुमट बिहारी की शादी राबिया निवासी नांगल मुबारिक के साथ हुई थी। शादी के कुछ महीने बाद पति-पत्नी में आपसी मनमुटाव हो गया। इसकी खबर राबिया के परिजनों तक पहुंच गई। वह गांव गुमट बिहारी में आकर अपनी लड़की को अपने साथ ले गए। जब आलम राबिया को लेने गया तो लड़की के परिजनों ने उसे बंधक बनाकर राबिया का तीन तलाक करा लिया।
इस घटना को लेकर आलम का परिवार देवबंद के मुफ्तियों से राय-मशविरा के लिए गया। इसके बाद देवबंद द्वारा संचालित मदरसे शाही मुरादाबाद के मुफ्ती सब्बीर अहमद ने एक फतवा जारी किया। फतवे में साफ तौर पर लिखा गया है कि अभी तक राबिया और आलम पति-पत्नी हैं, कोई तलाक नहीं हुआ है। राबिया जब चाहे अपने पति के घर आ सकती है, उसे हलाला करने की जरूरत नहीं है। अगर वह दूसरी शादी करती है, तो उसे आलम से तीन तलाक कराने जरूरी होंगे।