निर्भया मामले में दोषियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया है। सात साल पहले देश को दहला देने वाले निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले के दोषियों को फांसी पर लटकाने का दिन और वक्त तय हो गया। पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार शाम करीब 4:48 बजे इस मामले के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी किया। इसके मुताबिक 22 जनवरी सुबह 7 बजे निर्भया के गुनहगारों को तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा।
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Nirbhaya Case: जानें कौन होते हैं वो पांच लोग, जिनकी मौजूदगी में दी जाती है फांसी
Wed, 08 Jan 2020 11:18 AM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Wed, 08 Jan 2020 11:18 AM IST
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फांसी देते वक्त ये 5 लोग होते हैं साथ
- फोटो : amar ujala
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फांसी (सांकेतिक)
- फोटो : Amar Ujala
- तिहाड़ में जो फांसी घर है उसके तख्त की लंबाई करीब दस फीट है, जिसके ऊपर दो दोषियों को आसानी से खड़ा किया जा सकता है।
- इस तख्त के ऊपर लोहे की रॉड पर दो दोषियों के लिए फंदे लगाने होंगे।
- तख्त के नीचे भी लोहे की रॉड होती है, जिससे तख्त खुलता और बंद होता है।
- इस रॉड का कनेक्शन तख्त के साइड में लगे लिवर से होता है।
फांसी
- फोटो : social media
- लिवर खींचते ही नीचे की रॉड हट जाती है और तख्त के दोनों सिरे नीचे की तरफ खुल जाते हैं, जिससे तख्त पर खड़ा दोषी के पैर नीचे झूल जाते हैं।
- हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि वह दोषियों को एक-एक कर फांसी देंगे।
- जेल अधिकारियों के मुताबिक, दोषियों के वजन के हिसाब से फंदे की रस्सी की लंबाई तय होती है।
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- तख्त के नीचे की गहराई करीब 15 फीट है, ताकि फंदे पर लटकने के बाद झूलते पैर का फासला हो।
- कम वजन वाले दोषी को लटकाने के लिए रस्सी की लंबाई ज्यादा रखी जाती है, जबकि भारी वजन वाले के लिए रस्सी की लंबाई कम रखी जाती है।
- सूत्रों का कहना है कि अफजल की फांसी के ट्रायल के दौरान दो बार रस्सी टूट गई थी।
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- चूंकि फांसी के समय जेल में बहुत गमगीन माहौल बन जाता है इसलिए सभी कैदी अपनी बैरक में बंद होते हैं।
- दोषी को तैयार करने के बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में दोषी को सेल से फांसी के तख्ते पर ले जाया जाता है।
- इस दौरान उसके चेहरे को कपड़े से ढक दिया जाता है ताकि वह आसपास चल रही गतिविधि को नहीं दे सके।
- फांसी के तख्ते तक ले जाने के दौरान मौत को सामने देखकर दोषी चल नहीं पाता है। ऐसी स्थिति में उसके साथ चल रहे पुलिसकर्मी उसे सहारा देकर ले जाते हैं।
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