बॉलीवुड में वैसे कई मल्टी टैलेंटेड अभिनेता हैं। लेकिन बॉलीवुड में एक अभिनेता ऐसे भी थे, जो शानदार एक्टिंग के साथ ही बेहद ही बेहतरीन डायलॉग्स भी लिखते थे। ये अभिनेता थे कादर खान। जिन्होंने कई फिल्मों के संवाद को अमर कर दिया। कादर खान ने अग्निपथ, सरफरोश, मुकद्दर का सिकंदर और कुली जैसी बेहतरीन फिल्मों के डायलॉग्स लिखे हैं। ये डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इस पैकेज में बताएंगे कादर खान के लिखे हुए 10 बेहतरीन डायलॉग्स...
'डायलॉग किंग' भी थे 'कॉमेडी किंग' कादर खान, अमिताभ को भी बनाया 'मुकद्दर का सिकंदर'
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मुकद्दर का सिकंदर (1978)
फकीर बाबा बने कादर खान जिंदगी का मर्म अमिताभ को समझाते हैं, 'सुख तो बेवफा है आता है जाता है, दुख ही अपना साथी है, अपने साथ रहता है। दुख को अपना ले तब तकदीर तेरे कदमों में होगी और तू मुकद्दर का बादशाह होगा।'
कुली (1983)
अमिताभ के किरदार में जान डालने वाले संवाद कादर ने ही लिखे थे, 'बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरख्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है 'इकबाल'।'
हिम्मतवाला (1983)
फिल्म में अमजद खान के हंसोड़ मुंशी का किरदार निभाने वाले कादर को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन का फिल्मफेयर मिला था। फिल्म में वो कहते हैं, 'मालिक मुझे नहीं पता था कि बंदूक लगाए आप मेरे पीछे खड़े हैं। मुझे लगा, मुझे लगा कि कोई जानवर अपने सींग से मेरे पीछे खटबल्लू बना रहा है।'
मिस्टर नटवरलाल (1979)
अमिताभ ने भगवान से बात करते हुए कहा था, 'आप हैं किस मर्ज की दवा, घर में बैठे रहते हैं, ये शेर मारना मेरा काम है? कोई मवाली स्मग्लर हो तो मारूं मैं शेर क्यों मारूं, मैं तो खिसक रहा हूं और आपमें चमत्कार नहीं है तो आप भी खिसक लो।'
अंगार (1992)
नाना पाटेकर और जैकी श्रॉफ की इस फिल्म के डायलॉग के लिए कादर खान को सर्वश्रेष्ठ संवाद का फिल्मफेयर मिला था। इसका एक संवाद है, 'ऐसे तोहफे (बंदूकें) देने वाला दोस्त नहीं होता है, तेरे बाप ने 40 साल मुंबई पर हुकूमत की है इन खिलौनों के बल पर नहीं, अपने दम पर।'
सत्ते पे सत्ता (1982)
अमिताभ के शराब पीने वाले सीन को यूट्यूब पर काफी हिट मिले हैं। इसमें वो कहते हैं, 'दारू पीता नहीं है अपुन, क्योंकि मालूम है दारू पीने से लिवर खराब हो जाता है, लिवर।'
अग्निपथ (1990)
अमिताभ के इस किरदार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला इसमें बड़ा हाथ जानदार संवादों का भी था, जो कादर ने ही लिखे थे, 'विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल 9 महीना 8 दिन और ये सोलहवां घंटा चालू है।'
बाप नंबरी बेटा दस नंबरी (1990)
चालाक ठग का किरदार निभाने वाले कादर का एक मशहूर सीन, 'तुम्हें बख्शीश कहां से दूं, मेरी गरीबी का तो ये हाल है कि किसी फकीर की अर्थी को कंधा दूं तो वो उसे अपनी इंसल्ट मान कर अर्थी से कूद जाता है।'