अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला प्यार करें के पहले चैप्टर के तीसरे पैरे की शुरूआत में ही ऋषि कपूर अपने पिता राज कपूर के उस इश्क का ज़िक्र करते हैं, जिसे वह दुर्योग मानते हैं। नरगिस का वह यहां नाम तो नहीं लेते लेकिन अपने पापा की उन फिल्मों का नाम जरूर लेते हैं, जिनमें राजकपूर की जोड़ी नरगिस के साथ बनी। वह यह भी बताते हैं कि राज कपूर देश के सबसे युवा फिल्म निर्माता रहे जिनके पास अपना खुद का स्टूडियो रहा। और, फिर उसी रौ में वह अपने बाबा यानी पृथ्वीराज कपूर की डेब्यू फिल्म के बारे में बताते हैं कि कैसे उन्हें अपना पहला रोल गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सिफारिश से मिला। पृथ्वीराज कपूर ने अपना करियर थियेटर से शुरू किया और बरसों तक फिल्मों पर राज किया। ऋषि कपूर ने अपने करियर में बरसों तक फिल्मों पर राज किया और अपने करियर के आखिर में काम किया एक बेहतरीन फिल्म 102 नॉट आउट में जो एक गुजराती नाटक पर बनी। आज के बाइस्कोप में कहानी इसी फिल्म की, जिसमें अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर बरसों बाद एक साथ नाचे। जी हां, नाचे और क्या कमाल नाचे, आप खुद देख लीजिए।
बाइस्कोप: आज ही के दिन रिलीज हुई 102 नॉट आउट में ऋषि कपूर ने पूरा किया अपने परिवार का ये ‘नाटक चक्र’
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फिल्म 102 नॉट आउट सिर्फ एक फिल्म नहीं है। ये जीवन का उत्सव है। इस बात का उत्सव है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। असल जिंदगी तो इंसान अपने हौसलो और अपनी उम्मीदों से जीता है। फिल्म में 102 साल के पिता और 75 साल के पुत्र के रिश्तों की ऐसी बानगी है जिसे देखने के बाद हर आंख खारे पानी का समंदर हो ही जाती है। आंखें थोड़ी और नम इस बात से भी होती हैं कि पिता-पुत्र के बीच उम्र का ये 27 साल का फासला दरअसल अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की 1991 में आई फिल्म अजूबा के बाद बनी जोड़ी और 102 नॉट आउट के रिलीज होने के बीच के सालों का फासला भी है। दोनों इस बीच फिल्म दिल्ली 6 और ओम शांति ओम में भी दिखे लेकिन अलग अलग प्रसंगों और किरदारों में। फिल्म 102 नॉट आउट की कहानी की तरफ बढ़ने से पहले वो किस्सा जो ऋषि कपूर ने अपने दादा पृथ्वीराज कपूर के बारे में अपनी आत्मकथा में लिखा। किताब का रिव्यू करते समय इस तथ्य पर ही ध्यान सबसे पहले अटकता है। पृथ्वीराज तब 18 साल के भी नहीं हुए थे कि उन्होंने स्टेज पर काम करना शुरू कर दिया। तब वह कलकत्ता में नाटक किया करते थे और सीता नाम के एक नाटक में पृथ्वीराज को मिला राम का किरदार और मशहूर अदाकारा दुर्गा खोटे बनीं थीं सीता। जी हां, के आसिफ की फिल्म मुगल ए आजम में बनी अकबर और जोधाबाई की ये जोड़ी तमाम बरस पहले राम और सीता की जोड़ी बन चुकी थी। ये नाटक टैगोर ने भी देखा था। न्यू थिएटर्स के मालिक बी एन सरकार ने इस नाटक पर फिल्म बनाने की तैयारी की तो टैगोर ने नाटक के दोनों मुख्य कलाकारों को ही इस फिल्म में लेने का सुझाव दिया। और, यहां से कपूर खानदान का फिल्मों से रिश्ता शुरू होता है।
पृथ्वीराज कपूर से ऋषि कपूर ने बहुत सारी आदतें सीखी हैं। उनमें से एक है खुद्दारी। न पृथ्वीराज कपूर ने कभी अपने सुपरस्टार बेटों से अपने खर्चों के लिए चवन्नी ली और न ही ऋषि कपूर ने। और भी बातें कपूर खानदान की हम बाइस्कोप की आने वाली कड़ियों में करेंगे। लेकिन, अभी लौटते हैं अपनी आज की फिल्म 120 नॉट आउट की तरफ। फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर जिस गाने बडुम्बा के आखिर में साथ साथ कमर मटकाने की कोशिश करते दिखते है, वह अमिताभ बच्चन ने गाया है। अमिताभ बच्चन गाना गाते हैं, ये कोई खास बात नहीं है, ऐसा वह फिल्म मिस्टर नटवरलाल के बाद से लगातार करते आ रहे हैं। यहां किस्सा कुछ अलग है। अमिताभ भट्टाचार्य के लिखे इस गाने का संगीत भी अमिताभ बच्चन ने ही तैयार किया है। जी हां, अमिताभ बच्चन का नाम फिल्म 102 नॉट आउट की क्रेडिट्स में बतौर संगीतकार भी आता है। वैसे मिस्टर नटवरलाल के लिए गाया उनका पहला गाना, मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनाऊं, 80 और 90 के दशक के बच्चों और बड़ों का सबसे प्यारा गीत रहा है।
और, फिल्म 102 नॉट आउट का तो वो गाना भी आपको जरूर सुनना चाहिए जिसे अमिताभ बच्चन की आवाज में रिक्रिएट किया गया है। ऋषि कपूर के देहांत के बाद देर तक दुखी रहे अमिताभ बच्चन ने उनकी याद में यही गाना अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर साझा किया था। जी हां, जिसे आप ऋषि कपूर की याद में बनाया गया वीडियो समझते रहे, दरअसल वह फिल्म 102 नॉट आउट का ही गाना है। मशहूर फिल्मकार गुरुदत्त की फिल्म कागज के फूल में पहली बार ये गाना गीता दत्त ने गाया था। वहीदा रहमान और गुरुदत्त पर फिल्माए गए इस गाने का ओरीजनल संगीत सचिन देव बर्मन का है जिसे इस फिल्म के लिए रोहन विनायक ने रिक्रेट किया। गाने के बोल लिखे हैं मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी ने। इस गाने को अमिताभ बच्चन की आवाज़ में सुनने से पहले एक नज़र डालिए इन अल्फाज़ पर, इन्हें पढ़कर आपके दिल में भी एक हूक सी ज़रूर उठेगी..
बेक़रार दिल इस तरह मिले
जिस तरह कभी हम जुदा न थे
तुम भी खो गए, हम भी खो गए
एक राह पर चलके दो क़दम
वक़्त ने किया क्या हंसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम
वक़्त ने किया....
जैसा कि मैंने शुरू में ही आपको बताया था कि फिल्म 102 नॉट आउट बनी है एक नाटक पर और इस गुजराती नाटक को लिखा है, सौम्य जोशी ने। सौम्य जहां पढ़े उसी एच के आर्ट्स कॉलेज में उन्होंने अपना करियर अंग्रेजी साहित्य के प्राध्यापक के तौर पर शुरू किया साल 1995 में। साल 2010 में उन्होंने फेड इन थिएटर नाम का एक ग्रुप बनाया और नाटक करने शुरू कर दिए। साल भर के भीतर ही वह नाटकों में ऐसे रमे कि अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर नाटकों के ही हो गए। ‘रामी लो ने यार’ नामक अपने पहले ही गुजराती नाटक से छा जाने वाले सौम्य जोशी का ही लिखा नाटक है, 102 नॉट आउट। फिल्म 102 नॉट आउट के निर्देशक उमेश शुक्ला हिंदी सिनेमा में एक्टिंग खूब कर चुके हैं, लिखा भी खूब है उन्होंने लेकिन लोग उन्हें याद करते हैं गुजराती नाटक कानजी विरुद्ध कानजी के निर्देशक के तौर पर, इसी नाटक पर उन्होंने अक्षय कुमार, परेश रावल, मिथुन चक्रवर्ती, पूनम झावर और महेश मांजरेकर के साथ सुपरहिट फिल्म बनाई, ओह, माई गॉड। इस फिल्म का बाद में तेलुगू में गोपाला गोपाला नाम से रीमेक भी बना जिसमें पवन कल्याण और वेंकटेश के अलावा मूल हिंदी फिल्म के कलाकारों में से मिथुन चक्रवर्ती भी शामिल रहे। वैसे आपको एक दिलचस्प बात और बता दूं और वह ये कि भगवान पर मुकदमा करने की कहानी पर पर पहली बार साल 2001 में एक अंग्रेजी फिल्म ऑस्ट्रेलिया में बनी, द मैन हू सूइड गॉड। मार्क जोफे की इस फिल्म के सितारे थे बिली कॉनोली और जूडी डेविस और ऑस्ट्रेलिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में इसकी गिनती आज भी होती है।