हिंदी सिनेमा के ‘एंग्री यंगबॉय’ रहे बॉबी देओल को हिंदी सिनेमा में 25 साल पूरे हो रहे हैं। बॉबी देओल अब खुद को बदलकर नए जमाने के हिसाब से खुद को नए किरदारों में देखना चाहते हैं। बॉबी देओल से अमर उजाला के लिए ये खास मुलाकात की पंकज शुक्ल ने।
बाहरी लोगों के सवाल पर बोले बॉबी देओल, पापा को जितना प्यार मिला, किसी कलाकार को नहीं मिला होगा
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करियर के सिल्वर जुबली साल का एहसास कैसा है?
पता ही नहीं चला, ये 25 साल कैसे गुजर गए। ऐसा लगता है जैसे कल ही मैंने 'बरसात' की थी। आजकल का समय भी कुछ वैसा ही है। हम सब घर पर बैठे हैं। पता ही नहीं चलता, आज शनिवार था फिर से शनिवार कैसे हो गया? समय का कभी पता नहीं चलता है। लेकिन, अगर हम समय का सही इस्तेमाल करें तो सब सही रहता है। मैंने वही कोशिश की है। बीच में थोड़ा समय खराब हो गया था तो उन दिनों मैं काफी परेशान था।
तो खराब समय से बाहर आने का मंत्र क्या समझा आपने?
मैंने अपने आप को बिना मतलब के और ज्यादा परेशान कर दिया था। लेकिन, जब मैंने महसूस किया कि मैं कर क्या रहा हूं अपने साथ। तो वैसे ही एकदम से घंटी बजी। और, मैंने अपने आपको तैयार करना शुरू कर दिया कि मैं बस कैसे भी करके काम लाऊंगा हाथ में और काम करता जाऊंगा। फिर से मेरी शुरुआत हुई और आज मैं आपके साथ बैठा हूं और बातें कर रहा हूं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहली बार मैं कदम रख रहा हूं।
हां, आपकी पहली ओटीटी फिल्म ‘क्लास ऑफ 83’ की वह लाइन मुझे याद रह गई कि कोई क्या करे अगर वह अपने आसपास काम करने वालों से बेहतर हो। और सिस्टम से बेहतर हो?
जीवन में ऐसे मौके आते रहते हैं जहां आपको लगता है कि मैं इतना कुछ कर सकता हूं लेकिन मैं फिर भी नहीं कर पा रहा हूं। मुझे वह मौका कोई नहीं दे रहा, वह चांस नहीं मिल रहा। और खासतौर से तब जब आप सही हो, सच्चे हो। दिल सच है और सोच सही है। मैं तो यही कहना चाहूंगा कि ऐसा दिलचस्प किरदार मुझे पहले कभी मिला नहीं। पांच नए कलाकारों के साथ मैंने इसमें काम किया है। और, जब मैं उनके साथ काम कर रहा था तो मैं इतना नर्वस था। पहली बार मैंने ऐसा कोई रोल किया है जो मेरे कंफर्ट जोन के बाहर था।
आज की डिजिटल पीढ़ी देओल परिवार को बहुत पसंद करती है, क्या कहना चाहेंगे?
मैं तो इतना ही कहूंगा कि मेरे पापा को जितना प्यार मिला है पूरी दुनिया से, हमारे देश से। वह किसी भी कलाकार को नहीं मिला होगा। वही प्यार अब हमारी तरफ आ गया। पापा हमेशा सबको ऐसे मिलते थे जैसे उनका भाई, उनका बेटा, उनका दोस्त उनसे मिल रहा है। पापा हैं वैसे। हमें भी वही चीजें सिखाई गई थीं जब हम बड़े हो रहे थे। जब हम भी किसी से मिलते हैं तो किसी गैर को भी अपना बना लेते हैं। शायद वही प्यार लोगों के दिल में है आजतक जो डिजिटल दुनिया में भी हमें पसंद करते हैं, इतना प्यार देते हैं। बस... क्या कहूं अब और। बस, थैंक यू बोलना चाहूंगा सब फैंस को।