राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित भारतीय अभिनेत्री उषा जाधव अपनी अगली स्पेनिश फिल्म की शूटिंग के लिए स्पेन पहुंच चुकी हैं। 'नुएवा नॉर्मलिदाद (Nueva Normalidad)' शीर्षक वाली इस फिल्म का निर्देशन स्पेन के जाने-माने फिल्म निर्देशक एलेजांद्रो कोर्तेस कर रहे हैं। हिंदी में इस शीर्षक का मतलब 'नया सामान्य' है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस फिल्म का मुद्दा कोरोना वायरस के बाद की अवस्था से हो सकता है।
लॉकडाउन में छूट मिलते ही उषा जाधव पहुंचीं स्पेन, शुरू की अपनी नई इंटरनेशनल फिल्म की शूटिंग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उषा ने मीडिया को फिल्म के बारे में कोई भी जानकारी देने से साफ मना कर दिया। हालांकि, उन्होंने अपने किरदार की तैयारियों के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है। उन्होंने बताया, 'मैंने अपने किरदार को ठीक तरह से निभाने के लिए स्पेनिश भाषा सीखी है। मुझे नई-नई भाषाएं सीखना बहुत पसंद भी है क्योंकि ऐसे में आप वह सब चीजें सीखते हैं जिससे आपका कभी वास्ता नहीं हुआ है। यह सिर्फ कोई भाषा नहीं है, बल्कि इसके बोलने का तरीका भी अलग है। इसे सीखने में एलेजांद्रो ने मेरी बहुत मदद की हैं।'
वहां की स्थिति की जानकारी देते हुए उषा ने बताया कि यहां पर काम करते हुए मास्क पहनना अनिवार्य है और कोई भी एक दूसरे को ना तो गले लगा सकता है और ना ही छू सकता है। वह कहती हैं कि यह थोड़ा मुश्किल है और अजीब भी लगता है। फिल्म के सेट को दिन में कई बार सैनिटाइज किया जाता है और कलाकारों का भी ध्यान बार-बार रखा जा रहा है। पहनने वाले कपड़े और कैमरे भी सैनिटाइजर से स्प्रे किए जाते हैं। उन्होंने बताया है कि इन सब चीजों का ध्यान रखते हुए शूटिंग में थोड़ा ज्यादा समय लग रहा है लेकिन वह काम करके बहुत खुश हैं।
उषा इसी महीने की शुरुआत में ही स्पेन के लिए रवाना हुई हैं। पिछले महीने के अंत में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि वह बहुत ही जल्द एलेजांद्रो कोर्तेस के साथ एक स्पेनिश फिल्म करने जा रही हैं। हालांकि उन्होंने फिल्म के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। उस समय उषा ने रंगभेद और निर्देशकों के आलस्य भरे बर्ताव के बारे में खूब बात की थी। उन्होंने कहा, 'फिल्म निर्देशक जब 'बाला' जैसी फिल्मों के लिए कास्टिंग करते हैं तो उन्हें थोड़ी और ज्यादा मेहनत करनी चाहिए। ताकि उन्हें भूमि पेडनेकर जैसी है गोरी अभिनेत्री को काला बनाकर पर्दे पर पेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।'
अपनी बात जारी रखते हुए उषा ने कहा, 'यह सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही नहीं है बल्कि मराठी सिनेमा में भी होता है। दरअसल, पूरे भारतीय सिनेमा में ही ऐसी परेशानी आती ही हैं। किसी गोरी अभिनेत्री को काला बनाने में आखिर निर्देशकों को दिलचस्पी क्या है? (हंसते हुए) अगर इसके लिए वह उसी रंग की अभिनेत्री लेंगे तो उनका मेकअप का खर्चा तो बच ही जाना है। मैं इसके बिल्कुल खिलाफ हूं और मैं इसका बिल्कुल समर्थन नहीं करती हूं। वह जब फिल्म के कलाकारों का चयन करते हैं तो उन्हें थोड़ी मेहनत करके रंग-रूप और कद-काठी पर भी ध्यान देने में दिलचस्पी होनी चाहिए।'