हिंदी सिनेमा में कमाई के मामले में नंबर वन अभिनेता अक्षय कुमार क्या हिंदी बोलने के मामले में भी नंबर वन हैं? कम से कम उनकी अगली ऐतिहासिक फिल्म पृथ्वीराज के निर्देशक को ये नहीं लगता। आमतौर पर शूटिंग के दौरान फिल्म निर्देशकों पर हावी रहने वाले अक्षय कुमार की संवाद अदायगी पर फिल्म पृथ्वीराज के निर्देशक ने एतराज जताया है और यही नहीं सूत्रों की मानें तो उनको बाकायदा हिंदी के संवाद सही तरीके से बोलना सिखाने के लिए एक कोच भी तैनात कर दिया है।
सवा सौ से ज्यादा फिल्में कर चुके अक्षय को अब सिखाई जाएगी हिंदी, पृथ्वीराज के लिए तैनात हुआ हिंदी कोच
हिंदी सिनेमा के खिलाड़ी अभिनेता अक्षय कुमार को हिंदी फिल्मों में सक्रिय हुए लगभग तीन दशक बीतने को हैं। इसी बीच वह सवा सौ से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। कहने को तो वह अपने आप को हिंदी का सेवक ही बताते हैं लेकिन हिंदी को लेकर अक्षय का हाथ शुरू से तंग रहा है। करियर में इतना लंबा वक्त गुजारने के बाद भी वह हिंदी पत्रकारों से कतराते रहते हैं। हिंदी अखबारों के संपादकों तक से वह बातें करने में घबराते हैं। जब भी उन्हें हिंदी में कोई इंटरव्यू अखबारों को देना होता है तो उनकी पीआर टीम साथ में चार पांच लोग ऐसे जरूर बीच में बिठा देती है जो अक्षय को सहज करते रहें।
लेकिन, इस बार मामला पृथ्वीराज का है। वैसे तो पृथ्वीराज चौहान और उनके भाई हरिराज का जन्म गुजरात में हुआ लेकिन उनकी वीरता राजस्थान के रण में ही दिखी। फिल्म पृथ्वीराज का एक शेड्यूल हाल ही में फिल्म के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने राजस्थान में पूरा किया है। सूत्र बताते हैं कि अब तक फिल्म की जितनी शूटिंग हो सकी है, उसको फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा ने भी देखा है। सूत्रों के मुताबिक फिल्म के निर्माता और निर्देशक दोनों का ये मत है कि अक्षय कुमार को इस किरदार के लिए अपनी हिंदी का उच्चारण और इसे बोलने का लहजा ठीक करने की जरूरत है। और, इसीलिए अब उन्हें हिंदी सिखाने के लिए एक कोच लगाया गया है।
एक्शन फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता अक्षय का करियर इस समय अपने चरम पर है। उनकी फिल्मों की कहानी और उनके अभिनय में तो काफी सुधार आया है, लेकिन वह अपनी डायलॉग डिलीवरी में ज्यादा सुधार नहीं कर पाए हैं। इसी चीज को ध्यान में रखते हुए निर्माताओं और निर्देशक का यह विचार था, कि वह पृथ्वीराज चौहान जैसे महान किरदार को निभाने के लिए अपनी डायलॉग डिलीवरी पर काम करें। चूंकि पृथ्वीराज चौहान 12 वीं सदी के सबसे शक्तिशाली योद्धा और राजपूतों के पूज्य राजा रहे हैं, तो ऐसे में फिल्म के निर्माता और निर्देशक की जिम्मेदारी है, कि उनके किरदार को पर्दे पर उतारने में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
हिंदी फिल्मों में डॉयलॉग कोच रखने की परंपरा अरसे से रही है, लेकिन आमतौर पर ये कोच तभी रखे जाते हैं जब नायक या नायिका को किसी खास बोली में मदद की जरूरत हो जैसे आमिर खान के लिए फिल्म पीके में कोच रखा गया था। किसी हिंदी फिल्म में किसी सुपरस्टार हीरो की हिंदी पर नजर रखने के लिए कोच रखे जाने का ये पहला मामला बताया जा रहा है। इस बारे में यशराज फिल्म्स ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।
