बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा में बिग बी, शहंशाह, मेगास्टार और महानायक (पिछली सदी के) के तौर भी जाना जाता है। अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं जिन्हें चंद शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। उनका जन्मदिन 11 अक्तूबर को होता है। अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड में अपने अभिनय की शुरुआत फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से की थी। यह फिल्म साल 1969 में आई थी। ऐसे में हम आपको बताते हैं अमिताभ बच्चन को उनकी पहली फिल्म कैसे मिली थी।
भाई की वजह से अमिताभ बच्चन को मिली थी उनकी पहली फिल्म, जानिए ये दिलचस्प किस्सा
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फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' अमिताभ बच्चन की इकलौती ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म है। फिल्मों में आने से पहले ही से वह नाटक के शौकीन थे। उन्होंने लंबे समय तक अपने स्कूल और कॉलेज में नाटक किया था, लेकिन फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' अमिताभ बच्चन को उनके भाई अजिताभ की वजह से मिली। दरअसल एक बार अजिताभ ट्रेन में दिल्ली से मुंबई जा रहे थे कि इस दौरान उनकी एक मित्र मिली जिसने बताया कि निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास अपनी नई फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' के लिए नए कलाकारों की तलाश कर रहे हैं।
अजिताभ ने भाई अमिताभ की तस्वीर उस मित्र को देते हुए अब्बास से बात करने को कहा। जब वह तस्वीर अब्बास ने देखे तो उन्होंने कहा तस्वीर से क्या होगा, लड़के को बुलाओ। तब अजिताभ ने अमिताभ को कोलकाता से तुरंत मुंबई आने के लिए कहा। अमिताभ बच्चन जब मुंबई में अब्बास साहब के पास पहुंचे तो उन्होंने सर नेम बच्चन देखकर पूछा कि तुम क्या हरिवंश राय बच्चन के बेटे हो, घर से भागकर आए हो। तब अमिताभ ने कहा भागकर नहीं आया उन्हें पता है। लेकिन अपनी तसल्ली के लिए ख्वाजा अहमद अब्बास ने अमिताभ बच्चन के पिता तो पत्र भेजकर पूछा कि आप क्या इस बात से सहमत हो कि अमिताभ फिल्मों में काम करें।
तब हरिवंश राय बच्चन ने अब्बास को जवाब दिया कि अगर आपको लगता है कि अमिताभ में कुछ योग्यता है तो हमारी सहमति है लेकिन लगता है ऐसी कोई योग्यता नहीं है तो उसे समझाकर वापस कोलकाता भेज दो। लेकिन अब्बास को जब लगा कि बिग बी यह सब कर सकते हैं तो अमिताभ बच्चन के माता-पिता ने उन्हें फिल्मों में काम करने की सहमति दे दी। यह भी दिलचस्प है कि अमिताभ बच्चन को ख्वाजा अहमद अब्बास ने फिल्म में अनवर अली की जिस भूमिका के लिए लिया, पहले वह भूमिका टीनू आनंद करने वाले थे, लेकिन टीनू को तभी सत्यजीत रे के साथ सहायक निर्देशक बनने का मौका मिला तो उन्होंने अभिनय की जगह निर्देशन क्षेत्र को प्राथमिकता दी और वह कोलकाता चले गए।
बताते हैं अमिताभ को 'सात हिंदुस्तानी' में अभिनय के लिए कुल 5 हजार रुपये मिलने थे। चाहे फिल्म को बनने में कितना भी समय लगे। अमिताभ बच्चन का 'सात हिंदुस्तानी' फिल्म से फिल्मों में आगमन का सपना तो पूरा हो गया लेकिन उनका संघर्ष इस फिल्म से पहले भी था और इस फिल्म के बाद भी काफी समय तक संघर्ष बरकरार रहा। आज अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा की महान कलाकार हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि अमिताभ बच्चन के बिना हिंदी सिनेमा पूरा नहीं कहा जा सकता।