पिछली सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने फिल्मों के साथ राजनीति में भी अपनी पारी खेली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उनके बहुत करीबी दोस्त थे। इनकी दोस्ती के किस्से देशभर में मशहूर थे। अमिताभ ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर साल 1984 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। उन्होंने इलाहाबाद लोकसभा सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया था। हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे। इस जीत ने अमिताभ को राजनीति में भी सुपर स्टार बना दिया था।
बोफोर्स घोटाले में नाम आने पर अमिताभ बच्चन ने दिया था राजनीति से इस्तीफा, गांधी परिवार से भी हुआ मनमुटाव
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साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोगों की सहानभूति कांग्रेस के साथ हो चली। कांग्रेस की जिम्मेदारी अब राजीव गांधी के कंधों पर आ गई थी। उन्होंने अमिताभ को राजनीति में आने के लिए राजी किया था। कांग्रेस का मानना था कि अमिताभ ही वह शख्स हैं जो इलाहाबाद लोकसभा सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे कद्दावर नेता को चुनौती दे सकते हैं।
साल 1987 में बोफोर्स घोटाले की चर्चा पूरे देश में होने लगी। मीडिया में ये मुद्दा छाया हुआ था। विपक्षी पार्टियां राजीव गांधी सरकार पर निशाना साधती रहीं। इसी घोटाले में अमिताभ बच्चन का नाम उछला। इस बात से दुखी होकर अमिताभ ने जनीति से इस्तीफा दे दिया। एक इंटरव्यू में बिग बी ने कहा था कि राजनीति में आना उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
प्रगाढ़ रिश्तों में दरार की शुरुआत इमरजेंसी से ही हो चुकी थी। इंदिरा के कठोर नियम-कायदों का असर बॉलीवुड पर भी पड़ा। अमिताभ खामोश रहे तो उनकी आलोचना भी शुरू हो गई। तब उन्होंने गांधी परिवार से कुछ दूरी बनानी शुरू कर दी। कहा जाता है कि 1991 में राजीव की हत्या के बाद सोनिया को बच्चन परिवार से सहारे की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। बाद में 1997 में प्रियंका व रॉबर्ट वाड्रा की शादी की तारीख और अमिताभ की बेटी श्वेता की शादी की तारीख एक दिन आगे-पीछे होने के लेकर भी रिश्ते बिगड़ने की चर्चा हुई। स्थिति ऐसी हुई कि 2007 में अमिताभ की मां के अंतिम संस्कार में गांधी परिवार से कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ।
बोफोर्स कांड एक बार अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि उनके परिवार को कई सालों तक सवालों के कटघरे में खड़ा किया गया। अमिताभ ने लिखा, हमें कई सालों तक परेशान किया गया, गद्दार साबित किया गया, और जब यह सब असहनीय हो गया तो हम जल्दी न्याय पाने के लिए यूनाइटेड किंगडम (यूके) की अदालत में गए, हमने यूके के एक अखबार के खिलाफ केस किया और हम वो केस जीते भी। हमें बदनाम करने वाले कभी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए, वे अपने आरोप साबित करने कभी नहीं आए, कोर्ट तो सभी के लिए खुला होता है...लेकिन कोई अपने आरोप साबित करने नहीं आया। लगभग 25 साल बाद देश के एक प्रमुख वकील ने सभी को बताया कि इस कांड में हमारे परिवार का नाम जानबूझ कर जोड़ा गया था। जब यह बात सामने आई तो मीडिया ने मुझसे पूछा कि क्या मैं इसका बदला लूंगा।
अमिताभ ने आगे लिखा था, मैं क्या बदला लूंगा? क्या इससे हमारे वो दुख भरे साल खत्म हो जाएंगे जिनसे हम गुजरे। क्या इससे हमें कुछ सुकून मिलेगा, नहीं इससे कुछ नहीं होगा।
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