जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग कश्यप आजकल अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने बयानों के चलते चर्चाओं में रहते हैं। वह देश और दुनिया में होने वाली तकरीबन सभी घटनाओं पर अपनी राय रखते है। इस वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल भी किया जाता है। उन ट्रोलर्स का भी जवाब अनुराग पूरी जिंदादिली के साथ देते हैं। अनुराग अभी ऐसे नहीं बने हैं, बल्कि वह बचपन से ही कुछ अलग ही प्रवृत्ति के रहे। उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी के कुछ अनसुने किस्से सुनाते हैं।
नेपोटिज्म के खिलाफ मुहिम चलाने वाले अनुराग ने ऐसे बदल लिया पाला, पढ़िए उनके जीवन की ये 10 दिलचस्प कहानियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से पुराना नाता
अनुराग कश्यप का बचपन कुछ ऐसी ही जगहों पर गुजरा है जैसी लोकेशन उन्होंने अपनी फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की शूटिंग के लिए चुनी थीं। अनुराग उसी इलाके के आसपास पले बढ़े हैं जहां उन्होंने अपनी इस फिल्म की शूटिंग की है। फिल्म में जिस घर में अभिनेत्री ऋचा चड्ढा अपने बच्चे को जन्म देती हैं, उस घर में अनुराग के भाई अभिनव का जन्म हुआ। बचपन में अनुराग अक्सर उसी पहाड़ पर बैठे रहते थे जहां फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार फैजल खान बैठा नजर आता है।
स्कूल से ही शुरू कर दी दादागिरी
स्कूलों में बड़े बच्चों का छोटे बच्चों को परेशान करना बहुत ही आम बात है। जब अनुराग स्कूल जाते थे तो वह भी अपने सीनियरों से बहुत परेशान होते थे। धीरे-धीरे अनुराग समझने लगे थे कि यह आम बात है। बताते हैं कि जब अनुराग की उम्र कोई 15 साल रही होगी तब उन्होंने भी एक सीनियर बनकर अपने जूनियर को परेशान करने की ठानी। हालांकि, यह उनका पहला ही मौका था जब उन्होंने एक बच्चे को परेशान किया और उस बच्चे ने अपने माता-पिता से शिकायत कर दी। अनुराग की इस हरकत पर उस बच्चे के माता-पिता ने आपत्ति जताई और उनको शर्मनाक बताया। यह पहली ही घटना थी जिसके बाद से अनुराग ने खुद पर शर्म महसूस की और अपने आचरण में बदलाव भी लाए।
कम बजट की फिल्में बनाने की वजह
अनुराग कश्यप की बनाई हुई फिल्में ज्यादातर कम बजट की होती हैं। इसका कारण भी एक इंटरव्यू में खुद अनुराग ने ही बताया था। उन्होंने कहा था कि जब किसी बड़े बजट की फिल्म की घोषणा होती है तो उस पर सबकी निगाहें रहते हैं। फिल्म की जानकारियां बाहर लीक होने लगती हैं और लोगों तक खबरें पहुंचती रहती हैं। जब मीडिया इन खबरों को लिखता है तो एक फिल्म निर्माता के तौर पर दबाव बढ़ने लगता है। शुरुआत में उस फिल्म को बनाने का जो सपना और जो लक्ष्य बनाया होता है वह धीरे-धीरे बदल जाता है। और, शुरुआत से अच्छी चलने वाली सभी चीजें बिगड़ जाती हैं। इस वजह से वह अपनी ज्यादातर फिल्में कम बजट में बनाते हैं जिससे के लोगों का ध्यान उनकी तरफ न जाए।
नेपोटिज्म पर साधा पहला निशाना
फिल्मों के जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर के बारे में अनुराग कश्यप की धारणा तब तक अलग थी, जब तक कि वह उनके साथ ही काम नहीं करने लगे। हिंदी सिनेमा में अनुराग पहले निर्देशक थे जो नेपोटिज्म के खिलाफ खुलकर बोलते थे। घर में होने वाली पार्टियों में वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज लोगों को भद्दी भद्दी गालियां दिया करते थे। उन दिनों उनके आसपास फैनब्वॉय पत्रकारों की पूरी एक पौध उग आई थी। फिर एक दिन बागी अनुराग कश्यप ने पाला बदल लिया। वे तमाम लोग जो अनुराग कश्यप के झंडे के पीछे बागी बनकर खड़े थे, उन्हें समझ ही नहीं आया कि अब क्या करें। हालांकि, इनमें से तमाम लोगों की अनुराग ने खुद मदद की। कई की नौकरियां भी लगवाईं।