रामानंद सागर की रामायण में रावण का किरदार निभाकर मशहूर हुए अरविंद त्रिवेदी (Arvind Trivedi Passed Away) का निधन हो गया है। 82 साल के अरविंद त्रिवेदी काफी समय से बीमार थे और दिल का दौरा पड़ने के चलते उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बुधवार सुबह मुंबई में होगा। सोशल मीडिया पर उनके फैंस उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बॉलीवुड इंडस्ट्री ने एक बेहद शानदार कलाकार को खो दिया है।
Arvind Trivedi Death: 'केवट' बनने गए अरविंद त्रिवेदी 'रावण' बनकर लौटे, असल जिंदगी में भी लोग समझते थे 'लंकेश'
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रावण के रोल ने उन्हें इस कदर सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में रावण समझने लगे थे। एक इंटरव्यू में अरविंद त्रिवेदी ने बताया था- मैं केवट के रोल के लिए ऑडिशन देने गया था लेकिन रामानंद सागर ने मुझे रावण के लिए चुन लिया। उन्होंने बताया था- सबका ऑडिशन होने के बाद मुझे बुलाया गया था। उन्होंने मुझे एक स्क्रिप्ट दी। मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो सागर साबह चिल्लाते हुए बोले- मुझे मेरा लंकेश मिल गया।
आपको जानकर हैरानी होगी की अरविंद त्रिवेदी रामानंद सागर से केवट की भूमिका मांगने गए थे। अरविंद त्रिवेदी ने बताया था- इस सीरियल के बाद मैं लोगों के लिए अरविंद त्रिवेदी नहीं, लंकापति रावण हो गया था। मेरे बच्चों को लोग रावण के बच्चे और मेरी पत्नी को मंदोदरी के नाम से पुकारने लगे थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि रावण का किरदार निभाकर मैं इतना मशहूर हो जाऊंगा। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेश में भी लोग मुझे जानेंगे। मेरा नाम याद रखेंगे, मैंने कभी नहीं सोचा था। जिस दिन सीरियल में रावण मारा गया था, उस दिन मेरे इलाके में लोगों ने शोक मनाया था।
लंकेश यानी अरविंद त्रिवेदी ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया है। गुजराती भाषा की धार्मिक और सामाजिक फिल्मों से उन्हें गुजराती दर्शकों में पहचान मिली। 1991 में वो बीजेपी की टिकट से गुजरात की साबरकांठा सीट से चुनाव लड़े और सांसद बन गए। लेकिन लंबे समय ने वो बीमार चल रहे थे।
रावण के रोल ने उन्हें इस कदर सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में रावण समझने लगे थे। फिल्मी करियर में सफलता प्राप्त होने के बाद गुजरात सरकार द्वारा प्रदान की गई गुजराती फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए सात पुरस्कार जीते थे। उनके द्वारा बोले गए संवाद आज भी अमर हैं।