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टीवी सीरियल में बनने गए थे केवट, बन गए रावण, अरविंद त्रिवेदी से जुड़ा बेहद रोचक किस्सा

Mon, 08 Oct 2018 04:43 PM IST
मनोरंजन डेस्क,अमर उजाला
मनोरंजन डेस्क,अमर उजाला Updated Mon, 08 Oct 2018 04:43 PM IST
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arvind trivedi who play role of ravana in ramayana
arvind trivedi

अभिनेता अरविंद त्रिवेदी ने रावण के किरदार को टीवी सीरियल में कुछ इस कदर जिया कि आज भी लोग उन्हें “रावण” ही मानते हैं। वे तो केवट बनना चाहते थे। राम भक्त केवट! संयोग कुछ ऐसा हुआ कि रावण बन गए। इस अभिनेता की स्मृतियों में बसी एक कहानी, जहां रावण हर पल राम भक्ति में डूबा मिलता है...।


बचपन उज्जैन में बीता। बचपन से रामलीला-रामकथा देखने का शौक था, लेकिन कभी यह नहीं सोचा था कि रामकथा के एक पात्र के रूप में मेरी पहचान बन जाएगी। गुजरात से भी मेरा रिश्ता रहा। मेरे बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी गुजराती थिएटर के जाने-माने अभिनेता थे। आपने बड़े भाई को देखकर ही मुझे अभिनय का शौक जगा। रंगमंच से जुड़ा। गुजराती फिल्में भी मिलीं। धीरे-धीरे पहचान मिलने लगी। हिंदी फिल्मों का दरवाजा खुला। अभिनय में डूबे होने के बावजूद ऐसा लगता था जैसे कुछ अधूरा-सा है। 

arvind trivedi who play role of ravana in ramayana
arvind trivedi

सन 1985-86 की बात है। मुझे पता लगा कि निर्देशक रामानंद सागर रामायण बना रहे हैं और उसके लिए मुख्य किरदारों की तलाश में हैं। तब मैंने सोचा कि क्यों न उनसे मिला जाए? मैं उनके पास गया। मैंने पूछा, “रामानंद जी सुना आप रामायण बनाने जा रहे हैं?” वह बोले, “हां, तैयारियां शुरू हो चुकी है।” मैंने कहा, “मैं भी इसमें काम करना चाहता हूं। मेरे लिए कोई किरदार हो तो बताएं।” रामानंद जी ने एक पल भी देर न करते हुए मुझसे पूछा कि मैं कौन-सा किरदार करना चाहता हूं। मैं सोच में पड़ गया। रामायण के सभी किरदार अपने-अपने रूप में महत्वपूर्ण थे। मुझे केवट का ध्यान आया। सभी जानते हैं कि केवट रामभक्त था। उसी तरह मैं भी बड़ा रामभक्त हूं। मेरे लिए भी श्रीराम से बढ़कर कोई नहीं हैं। रामायण में केवट ने राम और सीता को गंगा पार करने में मदद की थी और श्रीराम के चरण स्पर्श का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मुझे यही किरदार करना था, तो बस मैंने तपाक से कहा कि मुझे केवट का किरदार निभाना है। 

arvind trivedi who play role of ravana in ramayana
arvind trivedi

रामानंद जी कुछ नहीं बोले। बस उन्होंने इतना कहा कि तुम कल आ जाओ। अगले दिन सेट पर पहुंचा तो देखा 300 से भी ज्यादा लोगों का जमावड़ा लगा है। पूछने पर पता चला कि लंकापति रावण के किरदार के लिए ऑडिशन चल रहा है। मैंने उनके स्टाफ को बताया कि मुझे केवट के किरदार के लिए रामानंद जी ने बुलाया था। वह बोला, "इस ऑडिशन के बाद आपको बुलाया जाएगा।" मैं भी एक जगह बैठ गया। अच्छे-खासे लंबे-चौड़े लोग रावण के किरदार के लिए ऑडिशन देने आए थे। सबका ऑडिशन होने के बाद मुझे बुलाया गया। उन्होंने मुझे एक स्क्रिप्ट दी। उसे पढ़ने के बाद मैं अभी कुछ पग ही चला था कि रामानंद जी ने खुशी से चहकते हुए कहा, "बस, मिल गया मुझे मेरा लंकेश। यही है मेरा रावण।" मैं चौंककर इधर-उधर देखने लगा कि मैंने तो डायलॉग भी नहीं बोले और यह क्या हो गया? जब मैंने उनसे पूछा, तो वह बोले, "मुझे मेरा रावण ऐसा चाहिए, जिसमें सिर्फ शक्ति ही न हो, बल्कि भक्ति भी हो। वह विद्वान है, तो उसके चेहरे पर तेज हो। अभिमान हो और मुझे सिर्फ तुम्हारी चाल से ही यह विश्वास हो गया कि तुम इस किरदार के लिए सही हो।" 

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arvind trivedi who play role of ravana in ramayana
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रामानंद जी जल्द ही किसी को गले नहीं लगाते थे, लेकिन यह कहते ही उन्होंने मुझे गले से लगा लिया, जो मेरे लिए सौभाग्य की बात थी। रावण के इस किरदार को और रामायण को कालजयी बनाने में रामानंद जी को ही सारा श्रेय जाता है। मैं लोगों के लिए अरविंद त्रिवेदी नहीं, लंकापति रावण हो गया था। मेरे बच्चों को लोग रावण के बच्चे और मेरी पत्नी को मंदोदरी के नाम से पुकारने लगे थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि रावण का किरदार निभाकर मैं इतना मशहूर हो जाऊंगा। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेश में भी लोग मुझे जानेंगे। मेरा नाम याद रखेंगे, मैंने कभी नहीं सोचा  था। जिस दिन सीरियल में  रावण मारा गया था, उस दिन मेरे इलाके में लोगों ने शोक मनाया था।
जब भी मैं कार्यक्रमों में गया तो यही पाया कि लोगों के दिलों में रावण के चरित्र की कितनी इज्जत है। लोग आज भी रावण को विद्वान मानते हैं। आज भी दक्षिण में लोग रावण के नाम पर अपना नाम रखते हैं। रावण ने तो राम के जरिए अपने पूरे कुनबे को मोक्ष दिलाया। अगर रावण आत्मकेंद्रित होता तो खुद हिरण बनकर मोक्ष प्राप्त कर लेता। रावण काफी उसूलों वाला इंसान था, वह घोर तपी और नियमों को मानता था। अहंकार को छोड़कर रावण से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

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