देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही भीड़ हिंसा से चिंतित 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही एक पत्र लिखा। इसके जवाब में 62 हस्तियों ने मोदी सरकार के समर्थन करते हुए एक खत लिखा। इस बीच सिंगर आशा भोसले ने एक ट्वीट करते हुए पूछा कि 'क्या मैं दम मारो दम, बोलो सुबह शाम, हरे कृष्ण, हरे राम, क्या मैं इस सदाबहार गाने को गा सकती हूं।'
49 हस्तियों के पत्र के जवाब में आशा भोसले ने किया 'मजेदार ट्वीट', बोलीं- मुझे डर नहीं लगता
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इस ट्वीट के बाद कुछ यूजर्स ने आशा भोसले को निष्पक्ष न होने और मोदी सरकार का पक्ष लेने जैसी बातें लिखकर ट्रोल किया। एक न्यूज चैनल ने आशा से इसी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि ये एक 'मजेदार ट्वीट' था। इन दिनों जो कुछ चल रहा है ये उसी पर था। इसका कोई और मतलब नहीं है।
उन्होंने कहा, 'मुझे इससे क्यों डरना चाहिए? मैं एक कलाकार हूं। मुझे डर नहीं लगता। लेकिन इन दिनों कुछ ऐसी चीजें ही चल रही हैं। मैंने बिना किसी कारण के ये ट्वीट लिखा था।'
हाल ही में 49 लोगों ने मोदी सरकार में हो रही भीड़ हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। जिसपर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई थीं। इस पर 62 हस्तियों ने उस पत्र का जवाब देते हुए हुए खुला खत लिखा। इस खुले पत्र में भीड़ हिंसा पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाली हस्तियों को देश का 'स्वयंभू गार्जियन' करार देते हुए तंज कसा गया है। खत में झूठे और अपमानजनक आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें पूछा गया है कि जब आदिवासी और हाशिए पर मौजूद लोगों को नक्सलियों द्वारा निशाना बनाया जाता है तब सेलिब्रिटी चुप क्यों रहते हैं। इन 61 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाली हस्तियों पर बरसते हुए लिखा है कि जब कश्मीर में अलगाववादियों ने स्कूल बंद करवा दिए तब ये लोग कहां थे। जेएनयू में हुई नारेबाजी प्रकरण को लेकर सवाल खड़े करते हुए पूछा गया है कि आखिर इन लोगों ने देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारों पर अपनी बात क्यों नहीं रखी।
49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र में क्या लिखा था
इससे पहले देश के अलग-अलग क्षेत्रों की 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर यह अपील की कि मुस्लिमों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ भीड़ हिंसा तत्काल प्रभाव से रुकनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति की भी जगह होती है।
इस पत्र पर चर्चित फिल्म निर्माता अडूर गोपाल कृष्णन और अपर्णा सेन, गायिका शुभा मुदगल और इतिहासकार रामचंद्र गुहा जैसी हस्तियों के दस्तखत थे। 23 जुलाई को लिखे पत्र में कहा गया है कि जो लोग सरकार की आलोचना करते हैं, उन्हें राष्ट्रविरोधी या शहरी नक्सली करार नहीं देना चाहिए। इसमें कहा गया है कि जय श्रीराम के नारे का इस्तेमाल युद्धोन्माद जैसा किया जा रहा है।