बॉलीवुड अभिनेता अशुतोष राणा हमेशा अपने अभिनय के लिए तारीफ बटोरते रहे हैं। उनके अभिनय में इतना ठहराव और गहराई है कि दर्शक उनसे नजरें नहीं हटा पाता। उनके चेहरे पर तेज और आंखों में बांधे रखने की ताकत है। अशुतोष राणा का नाम सुनते ही सबसे पहले जो आंखों के सामने उभरकर आता है वो है फिल्म 'संघर्ष' का लज्जा शंकर पाण्डे। हिंदी सिनेमा का वह विलेन जिसे आज भी देखकर लोगों की रूह कांप जाती है। 10 नवंबर 1967 को पैदा हुए आशुतोष राणा को ये किरदार कैसे मिला, इसके पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है।
'लज्जा शंकर पांडे' को देख जब कांप गई थी रूह, ऐसे मिला आशुतोष राणा को 'संघर्ष' के विलेन का किरदार
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साल 1999 में रिलीज हुए फिल्म संघर्ष में अक्षय कुमार और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिका में थे। इनके अलावा आशुतोष राणा ने एक ऐसे किन्नर का किरदार अदा किया था जो बच्चों की बलि देकर अमरत्व को प्राप्त करना चाहता है। लज्जा शंकर पांडे का चीखना, उसका पागलपन, सनकीपन सब कुछ इतना जबरदस्त था कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे खतरनाक विलेन में शामिल हो गया।
उन दिनों आशुतोष राणा हैदराबाद में अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'जानवर' की शूटिंग कर रहे थे। एक दिन उन्हें महेश भट्ट ने फोन कर कहा, 'मैं एक फिल्म बना रहा हूं 'संघर्ष'। उसमें एक किरदार है विलेन का। उससे बड़ा आज तक विलेन नहीं हुआ। लेकिन ये रोल मैं तुम्हें नहीं दूंगा। मैं किसी दूसरे एक्टर को दूंगा।'
महेश भट्ट की ये बात सुनकर आशुतोष राणा ने सुबह पहली फ्लाइट पकड़ी और चेम्बूर पहुंच गए, जहां महेश भट्ट एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। राणा ने महेश भट्ट से कहा कि या तो आप मुझसे ये कहिए कि मैं बुरा एक्टर हूं या फिर आप जिस भी एक्टर को ये रोल देना चाहते हैं उसका और मेरा ऑडिशन ले लीजिए। अगर मैं ऑडिशन में फेल हो जाता हूं तब आप मुझसे कहिए कि मैं तुम्हें इस रोल के लिए खारिज करता हूं। राणा की ये बात सुनकर महेश भट्ट हंसने लगे।
महेश भट्ट ने तब आशुतोष राणा से कहा कि दरअसल मैं तुमसे बहुत दिनों से मिला नहीं था और मुझे मिलने की इच्छा हो रही थी इसलिए मैंने तुमसे फोन पर वो बात कही। भट्ट के दिमाग में पहले से इस रोल के राणा फिट हो चुके थे। वो जानते थे कि उनसे बेहतर इस किरदार को कोई और नहीं निभा सकता।