अभिनेता आयुष्मान खुराना को पूरा भरोसा है कि नए साल में लोग फिर से सिनेमाघरों में लौटना शुरू कर देंगे और वह ये भी मानते हैं कि उनकी आने वाली फिल्में इसमें बड़ा योगदान दे सकेंगीं। आयुष्मान ने बीते 10 महीनों में कई कहानियों को पढ़ा है और इनमें से एक की शूटिंग वह चंडीगढ़ में रहते हुए ही पूरी भी कर चुके हैं।
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बीते साल के बारे में बात करने पर आयुष्मान खुराना बताते हैं, “मेरे लिए यह एक चिंतन करने का साल साबित हुआ है और इसने मुझे अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने को भी मजबूर किया। मैं सौभाग्यशाली रहा कि पूरे साल पढ़ने के लिए मुझे वाकई कुछ धमाकेदार सामग्री मिली और मैं कुछ ऐसी अनूठी फिल्में चुनने में कामयाब रहा, जिनके परदे पर पहुंचने के लिए मैं भी बेताब हूं।”
लॉकडाउन के बाद खुले सिनेमाघरों में लोगों की वापसी अब भी काफी कम होने पर आयुष्मान कहते हैं, “इस महामारी ने मनोरंजन सामग्री का पूरा नक्शा ही बदल कर रख दिया है। लोगों को थिएटरों में वापस बुलाने के लिए मनोरंजन जगत को बेहतरीन सिनेमा बनाना होगा। इससे कम की किसी चीज से बात नहीं बनेगी। मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है कि मेरी कुछ अगली फिल्में कहानी के मामले में भरपूर ताजगी से भरी हों। नए साल 2021 में मुझे भी इस बात का इंतजार रहेगा कि जो कहानियों मैंने चुनी हैं, वे दर्शकों को भी पसंद आईं।“
साल 2020 में आयुष्मान ने ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ में एक समलैंगिक व्यक्ति की भूमिका निभाई। बड़े परदे पर ऐसा करने वाले वह पहले बड़े सितारे हैं। ऐसी चुनौतियों को स्वीकारने के साहस की बात करने पर आयुष्मान कहते हैं, “अपने सिनेमा के माध्यम से मैं भारत में उस बातचीत को सहज बनाने की कोशिश करता रहा हूं जिसके बारे में आमतौर पर लोग घर परिवार में जिक्र तक नहीं करना चाहिए। जब भी कोई व्यक्ति मुझसे यह कहता था कि इस फिल्म में काम करके मैं बहुत बड़ी भूल कर रहा हूं तो मुझे यकीन ही नहीं होता था कि मेरे देश के लोग बड़े परदे के अपने नायकों द्वारा सकारात्मक चर्चा छेड़ने की कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे। अपनी पहली फिल्म ‘विकी डोनर’ से ही मैंने बदलाव की जरूरत को समझा और इस दिशा में काम किया। ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ ने समलैंगिक प्रेम के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा छेड़ने में निश्चित तौर पर बहुत बड़ा योगदान दिया है।”
यूनिसेफ की पहल एंडिंग वॉयलेंस अगेंस्ट चिल्ड्रेन (ईवीएसी) को लेकर भारत में जागरूकता फैलाने के लिए अपने चयन को भी आयुष्मान इस मौके पर याद करते हैं। वह कहते हैं, “मैं शुक्रगुजार हूं कि इस साल मैं यूनिसेफ के साथ जुड़ सका और इस बारे में काफी कुछ जान पाया कि किस तरह से बच्चे हिंसा का आसान शिकार होते हैं। यह अभियान मेरे दिल के काफी करीब है और इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की दिशा में मैंने लगातार भरसक कोशिश की है। मैं चाहता हूं कि सारे माता-पिता इस बात को समझें कि कैसे उनके बच्चे खतरे में पड़ सकते हैं और इसीलिए इन मुश्किलों से उनको बचाना बहुत जरूरी है।”
