ऐसा भी होता है! हेमा मालिनी इस बात को कभी नहीं भूल पातीं कि उन्होंने कमसिन उम्र में जो पहली फिल्म, इदु सत्यम साइन की उसमें से पूरा का पूरा रोल ही काट दिया गया। फिल्म तमिल में थी।
करियर की पहली फिल्म को भूल जाना चाहती हैं हेमा मालिनी, जुड़ी है सबसे बुरी याद
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असल में, निर्माता ने स्टेज पर हेमा का डांस देख कर उन्हें इस फिल्म में एक नृत्य के लिए चुना था। मंच पर हो रहे नृत्य में हेमा फूलों से लदी हुई एक हिरनी बनी थीं, जिसके पीछे रथ लगा हुआ था। इस रथ की लगाम उनकी सखियों के हाथों में थी।
गाने में हेमा और उनकी सखियां नाच रही थीं। इदु सत्यम जब रिलीज हुई तो हेमा अपने नाना के साथ देखने गईं। हॉल में उन्होंने देखा कि फिल्म में उनका नाच है ही नहीं। वह काट दिया गया है। इसके बाद हेमा फूट-फूट कर रोईं।
हेमा को नर्तकी बनाने में अगर उनकी मां जय लक्ष्मी चक्रवर्ती का हाथ था तो नाना ने उन्हें अभिनेत्री बनने के लिए बहुत उत्साहित किया। मां ने हेमा को बचपन से भरतनाट्यम की शिक्षा दिलाई थी। हेमा के पिता चेन्नई में सरकारी नौकरी में थे।
हेमा की आंखें सुंदर थीं और 'इदु सत्यम' के निर्माता ने उनका नृत्य कार्यक्रम देखा था। इसे देख कर वह हेमा के घर पहुंचा और उनकी मां से मिला। उसने अपनी फिल्म में हेमा को लेने की इच्छा जाहिर की। जानें, आगे क्या हुआ...
हेमा को जब पता चला कि वह फिल्म में काम करेगी तो खुद को कमरे में बंद करके रोने लगी थी। 1950-60 के दशक में आम हिंदुस्तानी मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों में फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। बाद में वह मां से शिकायत करती थी फिल्म में काम करने की वजह से स्कूल में बच्चे उन्हें चिढ़ाते हैं। फिल्मों के लिए 12वीं के बाद हेमा ने पढ़ाई छोड़ दी।
अभिनेत्री बनने के लिए हेमा के नाना ने उनका बहुत हौसला बढ़ाया। जब कभी फिल्मों में काम करते हुए किसी हीरो के साथ काम न करने या मॉर्डन कपड़े पहनने पर हेमा पर परिवार में रोक-टोक होती तो नाना बचाव करते।
हेमा अपने हर डांस शो की कामयाबी और फिल्मों की हर बात नाना से ही शेयर करती थीं। कहते हैं जिस दिन नाना को दिल का दौरा पड़ा और वह नहीं रहे, उसकी पिछली रात ही हेमा ने यही सपना देखा था।