ये उन दिनों की बात है जब मशहूर निर्माता टीटो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को लेकर एक फिल्म बना रहे थे, ‘राम बलराम’। निर्देशक थे विजय आनंद जो एक और फिल्म धर्मेंद्र के साथ ‘राजपूत’ भी उन्हीं दिनों बना रहे थे। धर्मेंद्र की तारीखों का कुछ पंगा हुआ और फिल्म ‘राम बलराम’ की शूटिंग तीन महीने के लिए आगे खिसक गई। टीटो को समझ नहीं आया कि अब इन तीन महीनों में क्या करें। उन्होंने निर्देशक राकेश कुमार से बात की। प्रकाश मेहरा के सहायक रहे राकेश कुमार की अमिताभ बच्चन से दोस्ती बहुत पक्की थी। वह अमिताभ और विनोद खन्ना को लेकर ‘खून पसीना’ नाम की एक सुपर हिट फिल्म प्रकाश मेहरा के प्रोडक्शन हाउस के लिए निर्देशित भी कर चुके थे। टीटो ने राकेश कुमार से बात की, अमिताभ बच्चन के पास तो तारीखें ही तारीखें बच गई थीं। तीनों ने मिलकर तय किया कि ‘राम बलराम’ की शूटिंग से बचे तीन महीनों में एक नई फिल्म शूट कर लेते हैं। जाहिर सी बात है फिल्म बनेगी तो उसके लिए एक अदद कहानी भी चाहिए होगी। तो अमिताभ बच्चन ने भी निर्देशक राकेश कुमार से यही सवाल किया कि कहानी क्या है? लेकिन, किसी को कुछ नहीं पता। बस सब अपना अपना सामान लेकर निकल लिए कश्मीर और तय पाया गया है कि वहीं कहानी सोची जाएगी, वहीं फिल्म बनाई जाएगी। और जो फिल्म ऐसे बनी थी उसका नाम है ‘मिस्टर नटवरलाल’। अमिताभ बच्चन की साल 1979 की गर्मियों में 8 जून को रिलीज हुई एक सुपरहिट फिल्म।
Bioscope S2: 15 मिनट में आनंद बक्शी ने लिखा अमिताभ-रेखा का ये हिट गाना, यूं खिली कश्मीर में मोहब्बत
बिना कहानी के पहुंच गए कश्मीर
फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ की यूनिट के कश्मीर पहुंचने तक किसी को नहीं पता था कि वे सब वहां जाकर क्या करने वाले हैं। सबके टिकट बुक हो गए। होटल के कमरे बुक हो गए। शूटिंग के लिए सारे कैमरा, लाइट्स और बाकी उपकरण बुक होकर तय हो गया कि किस दिन कौन सा ट्रक कहां से निकलना है? लेकिन ये नहीं तय हो रहा था कि फिल्म क्या है। निर्देशक ने अब तक फिल्म के कुछ बड़े बड़े सीन सोच लिए थे। फिल्म मेकिंग की भाषा में इन्हें गिमिक्स (टोटके) कहा जाता है। जैसे कि ये दो ऐसे भाइयों की कहानी होगी जिसमें एक पुलिस वाला और एक चोर होगा। चोर पुलिस के इस खेल में अमजद खान जैसा एक खतरनाक विलेन होगा। हीरो की जंगली जानवरों से एक दो खतरनाक फाइट्स होंगी और होंगे कुछ दमदार, मस्ती भरे गाने। फिल्म के स्टंट डायरेक्टर थे वीरू देवगन और फिल्म में उन्होंने कप्तान सिंह का रोल भी किया है।
आनंद बक्शी को मिली पहली जिम्मेदारी
प्रोड्यूसर को मामला जमता सा दिखा तो तय हुआ कि पहले गाने ही शूट कर लिए जाएंगे। एक दो हफ्ते तो गानों की शूटिंग में लगेंगे ही, तब तक बाकी कहानी लिख ली जाएगी। बस निर्देशक राकेश कुमार ने गीतकार आनंद बक्शी के घर के चक्कर काटने शुरू कर दिए। बक्शी साब ठहरे पान और ट्रिपल फाइव सिगरेट के शौकीन। पान उनके आते थे खार रेलवे स्टेशन की वेस्ट साइट की एक खास दुकान से। बक्शी साब को जब ये पता चला कि अमिताभ बच्चन की किसी फिल्म के लिए उनसे बस दो तीन हफ्ते में गाने लिखने की उम्मीद की जा रही है तो उन्होंने प्रोड्यूसर डायरेक्टर दोनों को अपने घर से दफा हो जाने को कहा।
ऐसे बना ‘परदेसिया ये सच है पिया...’
यहां फायदे वाली बात फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ के मेकर्स के लिए ये रही कि बख्शी साब संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ मिलकर इनकी फिल्म ‘राम बलराम’ के गाने भी लिख रहे थे। किसी तरह सीन में म्यूजिक डायरेक्टर राजेश रोशन की एंट्री हुई। राजेश रोशन ने मामला जमाया और ये तय हो गया कि बक्शी साब ये गाने एक एक करके देते रहेंगे और मेकर्स इन्हें इसी क्रम में रिकॉर्ड करते रहेंगे। बख्शी साब ने कहा भी कि ऐसे तुरत फुरत काम करवाओगे तो बाकी प्रोड्यूसर तो नाराज हो जाएंगे। वे तो बोलेंगे कि जैसे बक्शी साब ने इनको ही अपना सब कुछ दे दिया है। बस गुस्से में निकली ये बात ही फिल्म का सबसे हिट गाना बन गई। गाने के बोल हैं, ‘परदेसिया ये सच है पिया, सब कहते हैं मैंने तुझको दिल दे दिया।‘ मुखड़ा क्रैक होने भर की देर थी कि बख्शी साब बाहर बालकनी में गए और लौट कर आए तो गाने के बाकी अंतरे भी हाथ के हाथ लिख डाले, सिर्फ 15 मिनट में ये गाना इसकी धुन समेत रेडी था।
जब मुंबई तक पहुंचे अमिताभ और रेखा के किस्से
लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गाए ‘मिस्टर नटवरलाल’ के इस गाने की शूटिंग के दौरान अमिताभ और रेखा की दोस्ती के किस्से पूरे देश के गली मोहल्लों तक पहुंच चुके थे। दोनों काम तो इससे पहले भी साथ साथ कर चुके थे और इसके बाद ‘राम बलराम’ में भी दोनों की जोड़ी नजर आई। लेकिन कश्मीर में हुए किस्सों की जो बातें छन छनकर बंबई तक पहुंची उनके चलते अमिताभ बच्चन पर फिर कोई फिल्म रेखा के साथ साइन न करने की अघोषित पाबंदी घर में लग गई। सिर्फ यश चोपड़ा के लिए ये पाबंदी हटी एक फिल्म के लिए यानी ‘सिलसिला’ के लिए जिसकी कास्टिंग कहते हैं कि अमिताभ बच्चन ने अपनी तड़ी दिखाकर कश्मीर पहुंच जाने के बाद बदलवा दी थी। अमिताभ बच्चन तड़ी वाले कलाकार हैं, ये बात आनंद बक्शी को भी अच्छी तरह से मालूम थी। लेकिन, उनको ये भी मालूम था कि तड़ी वाला इंसान बच्चों को बहुत प्यारा होता है। सो उन्होंने इस फिल्म में एक गाना क्रिएट कर दिया अमिताभ बच्चन के लिए। ये बात उन्होंने फिल्म का पहला गाना ‘परदेसिया’ लिखने के तुरंत बाद फिल्म के संगीतकार और निर्देशक को समझाई कि फिल्म ‘कभी कभी’ में जिस अंदाज से अमिताभ बच्चन ने साहिर की लाइनें पढ़ी हैं, उस हिसाब से वह गाना भी बहुत अच्छा गा सकते हैं। राजेश रोशन के करियर का ये उस वक्त तका सबसे ऊंचा मुकाम था कि उन्होंने अपने निर्देशन में अमिताभ बच्चन से गाना गवा दिया। आनंद बक्शी की बात सही निकली और ये गाना सुपरहिट हो गया।