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Bioscope S2: दिलीप कुमार ने सुझाया था ‘नया दिन नई रात’ के लिए संजीव कुमार का नाम, पढ़िए दिलचस्प किस्से

Fri, 09 Jul 2021 12:04 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 09 Jul 2021 12:04 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Naya Din Nai Raat Sanjeev Kumar Om Prakash Jaya Bachchan A Bhim Singh
नया दिन नई रात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हिंदी सिनेमा के लिए साल 1974 बदलते वक़्त का साल कहा जा सकता है। अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘ज़ंजीर’ बीत साल हिट हो चुकी थी। हालांकि, साल 1973 में ऋषि कपूर की फिल्म ‘बॉबी’ ने ही कामयाबी के सारे रिकॉर्ड तोड़ें और कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर रही थी धर्मेंद्र की फिल्म ‘जुगनू’ और तीसरे नंबर पर रही थी राजेश खन्ना की फिल्म ‘दाग़’। अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘ज़ंजीर’ का नंबर इनके बाद आता है। साल 1973 इस साल के लिए भी याद किया जाता है कि इस पूरे साल दिलीप कुमार की कोई भी फिल्म रिलीज नहीं हुई। बेहतरीन निर्देशक ए भीम सिंह को लगा कि ये अच्छा मौका है दिलीप कुमार के साथ एक प्रयोगात्मक फिल्म करने का। भीम सिंह इससे पहले दिलीप कुमार के साथ ‘आदमी’ और ‘गोपी’ नामक दो सुपरहिट फिल्में बना चुके थे। उनकी महमूद और ओम प्रकाश स्टारर ‘साधू और शैतान’ में भी दिलीप कुमार ने एक खास भूमिका निभाई थी। जी हां, आज के बाइस्कोप में मैं जिस फिल्म ‘नया दिन नई रात’ की बात करने जा रहा हूं, वह सबसे पहले ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार को ही ऑफर हुई थी।

Bioscope with Pankaj Shukla Naya Din Nai Raat Sanjeev Kumar Om Prakash Jaya Bachchan A Bhim Singh
नया दिन नई रात - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

दिलीप कुमार ने समझी समय की चाल
तो हुआ यूं कि साल 1970 में दिलीप कुमार के साथ सुपरहिट फिल्म ‘गोपी’ बनाने के बाद निर्देशकए भीमसिंह ने अगले तीन साल में विनोद खन्ना और संजय खान के साथ ‘सबका साथी’, राजेश खन्ना के साथ ‘मालिक’ और ‘जोरू का गुलाम’ तथा धर्मेंद्र के साथ ‘लोफर’ जैसी चर्चित फिल्में बनाईं। लेकिन, दिलीप कुमार ने फिल्म ‘नया दिन नई रात’ में काम करने से मना कर दिया। दिलीप कुमार जान चुके थे कि बतौर हीरो उनका समय गुजर रहा है और अगर उन्होंने ये फिल्म की तो उनके खाते में एक और फ्लॉप फिल्म जुड़ जाएगी। दिलीप कुमार ने अगले तीन सालों में सिर्फ तीन फिल्में कीं। ज़माना तब ऋषि कपूर की ‘लैला मजनू’ पर फिदा था और दिलीप कुमार के तिहरे रोल वाली फिल्म ‘बैराग’ तक फ्लॉप हुई। इसी के बाद दिलीप कुमार ने बतौर हीरो अपनी दुकान को ताला लगाया और पांच साल के ब्रेक के बाद सीधे प्रकट हुए मनोज कुमार की फिल्म ‘क्रांति’ में एक चरित्र अभिनेता के तौर पर। लेकिन निर्देशक ए भीमसिंह को फिल्म ‘नया दिन नई रात’ के लिए मना करते वक्त उन्होंने ये भी कहा कि मौजूदा दौर में अगर कोई ये फिल्म ढंग से कर सकता है तो वह हैं, संजीव कुमार।

Bioscope with Pankaj Shukla Naya Din Nai Raat Sanjeev Kumar Om Prakash Jaya Bachchan A Bhim Singh
नया दिन नई रात - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

भीम सिंह ने 24 साल में बनाईं 76 फिल्में
फिल्म ‘नया दिन नई रात’ के निर्देशक ए भीम सिंह का सिनेमा में बड़ा रुआब रहा है। ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा में दक्षिण भारत के फिल्म निर्देशकों ने अपना झंडा और ऊंचा करना शुरू कर दिया। इन निर्देशकों के पास ऐसे निर्माता थे, जिनके पास अथाह पैसा था। वे मद्रास और हैदराबाद से बंबई आते। सितारे उठाते। अपने शहरों के स्टूडियों में स्टार्ट टू फिनिश शूटिंग करते और सितारों को फिर बंबई छोड़ जाते। हिंदी सिनेमा के तकरीबन हर सुपरस्टार ने दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों के साथ काम करके शोहरत और दौलत दोनों बटोरी है। ए भीम सिंह थे तो इसी दौर के निर्देशक लेकिन उनके जैसा मेहनती निर्देशक भारतीय सिनेमा में दूसरा मिलना मुश्किल है। 30 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म निर्देशित करने वाले भीम सिंह ने अगले 24 साल में 76 फिल्में बना डालीं, 34 तमिल, 18 हिंदी, आठ तेलुगू, पांच मलयालम और एक कन्नड़ फिल्म। इन्हीं भीमसिंह की निर्देशित फिल्म ‘नया दिन नई रात’ हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है और इसका सबसे बड़ा आकर्षण है, फिल्म में संजीव कुमार के किए नौ रोल।

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Bioscope with Pankaj Shukla Naya Din Nai Raat Sanjeev Kumar Om Prakash Jaya Bachchan A Bhim Singh
नया दिन नई रात - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

समझिए नाट्य शास्त्र के नौ रस
हरिभाई जरीवाला उर्फ़ संजीव कुमार ने इस फिल्म में जो कमाल किया है, उसे जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी ही होगी। हिंदी व्याकरण में जो नौ रस, श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत और शांत पढ़ाए जाते हैं, उन सबको संजीव कुमार ने नौ अलग अलग किरदारों में जीकर इस फिल्म में दिखाया। फिल्म में उनकी सहचरी थीं, जया भादुड़ी। संजीव कुमार इससे पहले ‘कोशिश’ और ‘अनामिका’ जैसी हिंदी सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में जया के साथ काम कर चुके थे और गुलज़ार के निर्देशन में बनी जया की फिल्म ‘परिचय’ में भी नज़र आ चुके थे। ए भीमसिंह ने जया भादुड़ी को जब बताया कि फिल्म में मुख्य किरदार संजीव कुमार का है और हर किरदार की कहानी उनके होने से अपना रस प्रकट कर पाती है, वह तुरंत फिल्म करने को तैयार हो गईं।

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नया दिन नई रात - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सरोश मोदी के मेकअप का कमाल
फिल्म में जया भादुड़ी के किरदार का नाम है सुषमा। और उनके पिता के रोल में हैं ओम प्रकाश। पिता उसकी शादी करना चाहता है और बेटी घर छोड़कर भाग जाती है। घर वापस लौटने तक वह अलग अलग लोगों से मिलती है और संजीव कुमार ही हर बार उन्हें अलग अलग गेटअप में मिलते हैं। संजीव कुमार के इन गेट अप को बनाने में जिस एक कलाकार का सबसे बड़ा योगदान रहा, वह हैं मेकअप दादा सरोश मोदी। सरोश मोदी ने बिना प्रोस्थेटिक मेकअप की सहायता के यहां जो मेकअप किया वह काबिले तारीफ है। दिलचस्प बात ये है कि भारतीय फिल्मों में प्रोस्थेटिक मेकअप की शुरूआत संजीव कुमार से ही उनकी फिल्म ‘चेहरे पे चेहरा’ से मानी जाती है। सरोश ने संजीव कुमार को फिल्म में कभी शराबी बनाया, कभी डाकू बनाया, कभी कोढ़ी तो कभी बाबा। हर गेट अप में संजीव कुमार ने अपना किरदार सौ फीसदी करके दिखाया। बाबा वाला रोल तो बस कमाल ही का था।

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