निर्देशक किरण राव की फिल्म लापता लेडीज को हाल ही में भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक तौर पर भेजने का एलान किया गया है। इस खबर के सामने आते ही लोग सोशल मीडिया पर फिल्म के निर्माताओं को बधाइयां देने लगे। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म में ग्रामीण क्षेत्र को बहुत ही बेहतर तरीके से पर्दे पर उतारा गया है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनमें भारत के गांवों की झलक लोगों की समस्याओं से भी दर्शकों को रूबरू कराया गया है...
Films on Rural India: स्वदेश से लेकर पीपली लाइव तक, ग्रामीण जीवन की तस्वीर उकेरती हैं ये फिल्में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी फिल्म स्वदेश साल 2004 में रिलीज हुई थी। फिल्म में शाहरुख खान, गायत्री जोशी और किशोरी बल्लाल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में एक गांव की कहानी दिखाई गई थी, जहां बिजली के न होने की वजह लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फिल्म में शाहरुख का किरदार बिजली पैदा करने के लिए एक माइक्रो-हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना तैयार करता है। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म असफल साबित हुई थी, लेकिन वक्त के साथ इसे कल्ट का दर्जा प्राप्त हो गया।
साल 2017 में आई अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा में भी गांव की शौचालय की समस्या को बड़े पर्दे पर दिखाया गया था। फिल्म में भूमि पेडनेकर भी थीं। इस फिल्म का निर्देशन श्री नारायण सिंह ने किया था। फिल्म में भारत में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच को समाप्त करके स्वच्छता में सुधार लाने की बात कही गई थी। दर्शकों को यह फिल्म काफी ज्यादा पसंद आई थी।
2018 की फिल्म पैडमैन को आर बाल्की ने लिखा और निर्देशित किया था। इसमें अक्षय कुमार और राधिका आप्टे मुख्य भूमिकाओं में थे। यह फिल्म तमिलनाडु के एक सामाजिक कार्यकर्ता अरुणाचलम मुरुगनंथम के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए कम कीमत वाले सैनिटरी पैड बनाए थे।
फिल्म पीपली लाइव साल 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन अनुषा रिजवी ने किया था। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी पीपली लाइव एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म थी जो आत्महत्या और उसकी मीडिया कवरेज के साथ मामले में होने वाली राजनीति के इर्द गिर्द बुनी गई थी। यह फिल्म 83वें अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी, हालांकि इसे नामांकन नहीं मिल सका था।