चार्ली चैपलिन जैसे महान शख्सियत को पहचान की जरूरत नहीं है। जब कभी हम उन्हें याद करते हैं तो ऐसे शख्स की याद आती है, जिसने पूरी जिंदगी हमें हंसाने में गुजार दी। चार्ली चैपलिन की पोती कारमेन उनपर एक डॉक्यूमेंट्री निर्देशित करने वाली हैं। इस डॉक्यूमेंट्री का नाम 'चार्ली चैपलिन, ए मैन ऑफ द वर्ल्ड' होगा। इससे आपको महान कॉमेडियन के जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें जान पाएंगे जिससे आप अभी तक अंजान थे। ये डॉक्यूमेंट्री अगले साल तक रिलीज होगी।
आइए हम आपको चार्ली चैपलिन से जुड़ी कुछ बातें बताते हैं...
वे पहले एक्टर थे जिन्हें टाइम पत्रिका ने अपने कवर पर जगह दी थी। चार्ली की फिल्मों के कम्युनिस्ट विचारों के चलते अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन बावजूद इसके उन्हें 1973 में ऑस्कर अवॉर्ड मिला था। फिल्मों की दुनिया में चार्ली चैपलिन एक अमर नाम हैं। चार्ली का जन्म 16 अप्रैल, 1889 को लंदन में हुआ था। चार्ली चैपलिन का निधन 88 साल की उम्र में 1977 में क्रिसमस के दिन हुआ था। चैपलिन के दफन होने के तीन महीने बाद उनकी कब्र से शव चोरी हो गया था। चोरों ने ऐसा उनके परिवार वालों से पैसा वसूलने के लिए किया था।
1940 में चार्ली चैपलिन ने हिटलर पर 'द ग्रेट डिक्टेटर' फिल्म बनाई थी। इसमें उन्होंने हिटलर की नकल करते हुए उनका मजाक बनाया था। चार्ली चैपलिन को 1973 में 'लाइम-लाइट' में बेस्ट म्यूजिक के लिए ऑस्कर अवॉर्ड मिला था। यह फिल्म 21 साल पहले बनी थी, लेकिन इसका प्रदर्शन लॉस एंजेलिस में 1973 से पहले नहीं हुआ था। यहां प्रदर्शन के बाद इस फिल्म का नामांकन ऑस्कर के लिए हो पाया था।
1975 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने चार्ली चैपलिन को नाइट की उपाधि दी। चार्ली चैपलिन का बचपन काफी मुश्किलों और गरीबी से भरा हुआ था। बेपरवाह और शराबी पिता के कारण इनका परिवार बुरी तरह से तबाह हो गया था। चैपलिन की गरीब मां पागलपन की शिकार हो गई थीं। इसका नतीजा यह हुआ कि चैपलिन को सात साल की उम्र में एक आश्रम में जाना पड़ा था।
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स्कूल से पढ़ाई छूटने के बाद चैपलिन 13 साल की उम्र में मनोरंजन की दुनिया में आए। डांस के साथ चैपलिन ने स्टेज प्ले में भी हिस्सा लेना शुरू किया। इसके ठीक बाद चैपलिन को अमरीकी फिल्म स्टूडियो के लिए चुना गया। यहां से चैपलिन दुनिया भर में मूक फिल्मों के बादशाह के रूप में उभरे। चार्ली के लिए ऑस्कर समारोह में मौजूद जनता ने 12 मिनटों तक खड़े होकर तालियां बजाई थीं। ये ऑस्कर के इतिहास में सबसे बड़ा स्टैडिंग ओवेशन माना जाता है।