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बाइस्कोप: जानिए किसने छपवा दी थी मनीषा कोइराला के मौत की खबर और क्यों नहीं बनतीं अब हॉलीवुड की रीमेक

Wed, 22 Jul 2020 12:35 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 22 Jul 2020 12:35 AM IST
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Criminal this day that year series by pankaj shukla 21 july 1995 bioscope nagarjuna Mahesh bhatt
फिल्म- क्रिमिनल - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

अगर आप हिंदी सिनेमा पर करीब से नजर रखने के आप शौकीन हैं तो आपने नोटिस किया होगा कि पिछले 10 साल से हिंदी सिनेमा में हॉलीवुड सिनेमा से कहानी मारने की प्रवृत्ति कम हो चली है। अब हिंदी फिल्में बनाने वाले या तो अंग्रेजी या कोरियाई फिल्म के बाकायदा रीमेक राइट्स खरीदते हैं या फिर साउथ के निर्माताओं के साथ मिलकर बहुभाषी फिल्में बना लेते हैं। वजह जानते हैं इसकी? इसकी वजह से हिंदी सिनेमा में कालजयी फिल्मों के चलते अपनी एक अलग छवि रखने वाले प्रोडक्शन हाउस बीआर फिल्म्स के ऐसी ही एक कोशिश में तबाह हो जाने की।



जी हां, सही समझा आपने, वही बी आर फिल्म्स जिसकी बनाई टीवी सीरीज महाभारत सबने कोरोना संक्रमण काल में खूब चाव से देखी। ये जिक्र यहां इसलिए है क्योंकि हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म की कहानी भी एक हॉलीवुड फिल्म की कहानी से मारी गई है और हिंदी और तेलुगू में एक साथ बनी फिल्म है। बस तेलुगू संस्करण इसका रिलीज हो गया साल 1994 में और हिंदी संस्करण रिलीज हुआ 21 जुलाई 1995 को। फिल्म का नाम है क्रिमिनल और महेश भट्ट निर्देशित इस फिल्म की रिलीज के इस हिसाब से मंगलवार को 25 साल पूरे हो गए।

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Criminal this day that year series by pankaj shukla 21 july 1995 bioscope nagarjuna Mahesh bhatt
फिल्म- क्रिमिनल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

क्रिमिनल का जिक्र आने से पहले जिस फिल्म के किस्से की मैं बात कर रहा था, वह फिल्म थी गोविंदा स्टारर फिल्म बंदा ये बिंदास है। पता नहीं उन दिनों के बीआर फिल्म्स के कर्ता धर्ताओं ने वार्नर ब्रदर्स के साथ क्या बातचीत की, क्या सौदा किया लेकिन फिल्म जब रिलीज होने को ही तो थी वार्नर ब्रदर्स ने बीआर फिल्म्स पर सात करोड़ रुपये का दावा ठोंक दिया। कंपनी का दावा था कि बीआर फिल्म्स ने उनकी बनाई फिल्म माई कजिन विनी को सीन दर सीन कॉपी कर लिया है। इस कानूनी लड़ाई में बीआर फिल्म्स तबाह हो गई। रवि चोपड़ा को इसका बेहद गहरा सदमा लगा और वह लगातार बीमार रहने लगे। साल 2014 में फेफड़ों की बीमारी के इलाज के दौरान रवि का निधन ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ।

हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म का सिरा भी अस्पताल से ही जुड़ा है। फिल्म की कहानी एक ऐसे डॉक्टर अजय की कहानी है जिससे एक गरीब महिला का दर्द नहीं देखा जाता और वह अमेरिका जाना कैंसिल कर देश में ही अस्पताल खोलने का फैसला करता है। पब्लिक और प्रेस उस पर लट्टू हो जाती है, साथ ही दो अलग अलग पेशों की महिलाओं को भी वह भा जाता है। इनमें से एक है डॉक्टर श्वेता और दूसरी है पुलिस अफसर राम्या। श्वेता और अजय शादी करते हैं। श्वेता मां बनने वाली होती है तभी उसके कत्ल के इल्जाम में डॉक्टर अजय गिरफ्तार हो जाता है। अजय को कुछ कुछ समझ आने लगता है कि असल में वह किस जाल में फंस रहा है और इसके पीछे हाथ किसका है। लेकिन, इसके लिए उसे सबूत चाहिए। इसी बीच अदालत उसे मौत की सजा सुना देती है। जेल लौटते वक्त पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होती है तो वह फरार हो जाता है और जाकर राम्या की मदद से असली अपराधी का पर्दाफाश करता है।

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Criminal this day that year series by pankaj shukla 21 july 1995 bioscope nagarjuna Mahesh bhatt
फिल्म- क्रिमिनल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अगर आपने हैरीसन फोर्ड और टॉमी ली जोन्स की फिल्म फ्यूजिटव देखी है तो आप समझ सकते हैं कि महेश भट्ट की फिल्म क्रिमिनल निर्देशक एंड्र्यू डेविस की फिल्म द फ्यूजीटिव  से कितना मेल खाती है। महेश भट्ट को एक समय में हॉलीवुड फिल्मों की कहानियां मारने में उस्ताद माना जाता था और उन्होंने कभी इसे गलत भी नहीं माना। अनौपचारिक बातचीत में वह कहते थे, हमारा दिमाग चीजों को बस रिसाइकिल करता रहता है। जो भी ये समझता है कि वह कुछ ओरीजनल लिख या बना रहा है, वह सच से भाग रहा है। महेश भट्ट की फिल्म दिल है कि मानता नहीं को इट हैपन्ड वन नाइट, राज को व्हाट लाइज बिनीथ, सड़क को टैक्सी ड्राइवर और गुमराह को बैंकॉक हिल्टन की अनऑफीशियल रीमेक माना जा सकता है। इनमें से ओरीजनल और इसकी हिंदी कॉपी की तुलना करें तो दोनों फिल्मों के तमाम सीन भी एक जैसे मिलते हैं।

लेकिन उस दौर में सिर्फ महेश भट्ट ही विदेशी फिल्में देखकर देसी फिल्में नहीं छाप रहे थे, विदेशी टेलीविजन चैनलों और इंटरनेट से पहले के उस दौर में हॉलीवुड फिल्मों की नकल मारकर हिंदी फिल्में बनाने की एक लंबी फेहरिस्त है। एतराज को डिस्क्लोजर की नकल माना जाता है। बाजीगर की कहानी ए किस बिफोर डाइंग की कहानी जैसी है। फ्रेंच फिल्म ला डाइनर डे कॉन्स पर भेजा फ्राई बनी है, द मिरैकल वर्कर की छवि आपको फिल्म ब्लैक में मिलेगी। आई नाउ प्रोनाउंस यू चक एंड लैरी का देसी संस्करण दोस्ताना है तो ऑन द वाटरफ्रंट पर दीवार, परिंदा और गुलाम जैसी फिल्में बन चुकी हैं। कांटे बनी है तीन फिल्मों रिजर्वायर डॉग्, द युजुअस सस्पेक्ट और हीट की कहानी मिलाकर, कोई मिल गया में ईटी का तड़का है। विल स्मिथ ने तो अपनी फिल्म हिच को बिना पूछे पार्टनर के नाम से बना देने के लिए मुकदमा दायर करने की ठानी थी। रंग दे बसंती पर भी ऑल माई सन्स और जीसस ऑफ मॉन्ट्रियल की नकल करने का आरोप लगा। आमिर खान की एक और फिल्म तारे जमीन पर को लव, मैरी पर आधारित फिल्म बताया जाता है। कोरियाई फिल्मों के रीमेक भी बीच में खूब बने जैसे कि द सासी गर्ल की नकल करके बनी थी अगली और पगली।

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Criminal this day that year series by pankaj shukla 21 july 1995 bioscope nagarjuna Mahesh bhatt
फिल्म- क्रिमिनल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तो नकल के दौर से असल की असल रीमेक बनने के समय तक आने के बीच बनी फिल्म क्रिमिनल की कहानी ये है कि ये फिल्म एक साथ हिंदी और तेलुगू में बनी। दोनों फिल्मों के लीड कलाकार एक जैसे ही रहे। बस तेलुगू फिल्म का निर्देशन किया निर्माता के एस रामाराव के लिए साईनाथ तोतापल्ली ने, जबकि हिंदी संस्करण के निर्माता थे मुकेश भट्ट और निर्देशक महेश भट्ट। महेश भट्ट का नाम इन दिनों सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के बाद वंशवाद और खेमेबाजी की खबरों में खूब उछल रहा है लेकिन जब क्रिमिनल रिलीज हुई तो दोनो भाइयों ने मिलकर अपनी फिल्म मनीषा कोइराला का नाम सुर्खियों में खूब उछाला था।

फिल्म रिलीज से पहले एक खबर छपी, मनीषा कोइराला की मौत। नेपाल के प्रधानमंत्री रहे बी पी कोइराला की पोती के निधन की खबर से हिंदुस्तान से लेकर नेपाल तक मे कोहराम मच गया। मनीषा कोइराला के घर का फोन जो बजना शुरू हुआ तो हफ्ते भर तक बंद ही नहीं हुआ। मनीषा ने पता किया तो पचा चला कि फिल्म के प्रचारकों से मिलकर भट्ट भाइयों ने ये ‘खबर’ फिल्म के प्रचार के लिए प्लांट कर दी थी। मनीषा ने दोनों भाइयों को बहुत बुरा भला कहा। मनीषा उन दिनों सुपरस्टार हुआ करती थीं। उनकी 1942 ए लव स्टोरी और बॉम्बे उन दिनों की चर्चित फिल्में थीं और उनके प्रशंसकों की संख्या भी लाखों में हुआ करती थी। मनीषा के घर पर उनके प्रशंसकों की भीड़ लगने लगी थी और बड़ी मुश्किल से हालत काबू में आए थे।

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फिल्म- क्रिमिनल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म क्रिमिनल को अच्छा रेस्पांस मिला था, तभी इसे डब करके बाद में तमिल में भी रिलीज किया गया। फिल्म बाहुबली में म्यूजिक देने वाले संगीतकार एम एम क्रीम यानी एम एम कीरावानी की बतौर संगीतकार ये पहली हिंदी फिल्म थी। फिल्म के गीत लिखे थे इंदीवर ने। क्रिमिनल के गाने सारे हिट रहे। तेलुगू संस्करण का गाना तेलुसा मनासा सुपरहिट हुआ था और हिंदी में भी ये गाना जब तुम मिले दिल खिले बनकर सामने आया तो रातों रात हिंदी पट्टी में छा गया। मूल गाने को जहां एस पी बालासुब्रमण्यम और चित्रा ने गाया था, वहीं हिंदी में इसे कुमार शानू और अलका याग्निक ने आवाजें दीं। गाने में महिला स्वर में जो आलाप है, वह हिंदी और तेलुगू दोनों में ही चित्रा की ही आवाज में रहा। हॉलीवुड की एक और फिल्म स्लिवर के बैकग्राउंड म्यूजिक से एम एम क्रीम ने इस गाने की धुन कॉपी की है।

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