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कमरे में ऐसी हालत में उस लड़की को देख मेरे पसीने छूट गए और फिर जो हुआः दिलीप कुमार
Sat, 24 Mar 2018 07:21 PM IST
पूर्णिमा आचार्य, अमर उजाला
पूर्णिमा आचार्य, अमर उजाला
Updated Sat, 24 Mar 2018 07:21 PM IST
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'मुझे पैसों की जरूरत नहीं थी पर ये बात सही थी कि बिन पैसों के गुजारा करना मुश्किल था।' ये बात एक्टर दिलीप कुमार ने उस वक्त कही थी जब वह गुस्से में अपने घर से निकल गए थे। वह सीधे अपने एक करीबी दोस्त के पास पूना (पूणे) पहुंच गए थे। जी हां बॉलीवुड के ट्रैजिडी किंग एक्टर दिलीप कुमार ने अपनी 'आत्मकथाः दिलीप कुमार वजूद और परछाईं' में ऐसे कई किस्सों के बारे में बताया है जिनके बारे में कोई नहीं जानता। आइए आपको उसी में से एक किस्से के बारे में बताते हैं जहां एक लड़की को अपने कमरे में ऐसी हालत में देख दिलीप कुमार के होश उड़ गए थे।
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दिलीप कुमार ने आत्मकथा के एक हिस्से में बताया है कि घर से गुस्से से निकलने के बाद वह अपने एक करीबी दोस्त के पास पूना पहुंच गए। उन्हें पैसों की कमी नहीं थी लेकिन अकेले रहने के लिए काम करना जरूरी था। दोस्त ने एक क्लब में नौकरी दिला दी थी। क्लब में उनकी मुलाकात कारपोरल मार्लो नामक एक व्यक्ति के साथ हुई थी। हालांकि उन्होंने उसे बचपन से देखा था। वह काफी खूंखार किस्म का आदमी था। दिलीप कुमार को क्लब के अंदर ही रहने के लिए एक छोटा सा कमरा दे दिया गया था।
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दिलीप कुमार ने बताया कि क्लब में नौकरी शुरू करने के कुछ दिनों बाद ही उन्हें पता चला कि कारपोरल की एक खूबसूरत बेटी भी है। बेटी अक्सर पिता के साथ क्लब में आती रहती थी। उस लड़की का एक जूनियर ऑफिसर के साथ चक्कर चल रहा था। वह देर रात तक उस क्लब में दिखाई देती थी। हालांकि इससे दिलीप कुमार को कोई फर्क नहीं पड़ता था।
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दिलीप कुमार ने बताया - 'एक दिन क्लब में जल्दी काम खत्म हो गया था। सोचा कि कमरे में थोड़ा आराम कर लूं। मैं जैसे ही अपने कमरे में पहुंचा तो मेरे सामने एक हैरतअंगेज नाजारा था। कारपोरल की बेटी मेरे बिस्तर पर नंगे बदन लेटी थी। उसे देखते ही मुझे पसीने छूटने लगे। मैं दरवाजे के पास खड़ा रह गया। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मैनें देखा कि वह जाग रही थी और मुझे रिझाने के लिए उसने अपने कपड़े उतार दिए थे। मैं उल्टे पांव मैनेजर के कमरे की तरफ भागा और जाकर सारी बात बता दी।'
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दिलीप कुमार ने आगे बताया कि मैनेजर ने उन्हें कहा कि उस लड़की का कई मर्दों के साथ रिश्ता है। वह अक्सर क्लब में कई पुरुषों के साथ नजर आती है। उसकी दिमागी हालत पर भी लोगों को शक है। दिलीप कुमार ने बताया कि उनका पालन पोषण एक ऐसे पठानी परिवार की सख्ती में हुआ था जहां वह औरतों के नाम पर सिर्फ अपनी दादी, अम्मा और फूफियों को ही जानते थे और वह सब ऊपर से नीचे तक परदें में ढंकी रहती थीं। ऐसे में बिना कपड़ों के एक लड़की को देखना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी।
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