34 साल की हो चुकीं दाऊदी बोहरा समाज की नुसरत भरूचा को हिंदी सिनेमा में लकी चार्म माना जाता है। उनके साथ काम करके कार्तिक आर्यन सुपरस्टार बन चुके हैं। राजकुमार राव को पहचाना ही लोगों ने नुसरत के साथ उनकी फिल्म लव सेक्स और धोखा से। अब बारी आयुष्मान खुराना की है फिल्म ड्रीमगर्ल में जो पहले ही हिंदी सिनेमा के चोटी के सितारों में शामिल हो चुके हैं।
बॉलीवुड की लकी चार्म क्यों कहलाती हैं ये अभिनेत्री? 'ड्रीम गर्ल' ने इंटरव्यू में खोले जिंदगी के राज
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सोनू के टीटू की स्वीटी के बाद तो आपके पास फिल्में ही फिल्में आई होंगी, फिर ड्रीमगर्ल ही क्यों चुना जिसका हीरो खुद हीरोइन बनने को बेताब है?
फिल्म ड्रीमगर्ल के निर्देशक राज शांडिल्य हमारे पुराने परिचित हैं। जब भी वह फिल्म बनाने की सोचते तो हीरोइन के तौर पर उनके जेहन में बस एक ही नाम रहता, नुसरत। इस फिल्म का प्रस्ताव सोनू के टीटू की स्वीटी के वक्त ही मुझे मिला था। राज ने मुझे फिल्म की कहानी तकरीबन 60 मिनट सुनाई होगी। इस दौरान पूरे समय मैं पेट पकड़कर हंसती रही। उन्होंने कहानी सुनानी खत्म की और मैंने तुरंत हां कर दी।
कोई अभिनेत्री जब किसी निर्देशक की फेवरिट होती है तो काम करना कितना आसान हो जाता है?
अगर आप मेरे पहले के इंटरव्यू देखें तो मुझसे अक्सर ये सवाल हुए हैं कि मैं किस निर्देशक के साथ काम करने के सपने देखती हूं। मैने हर बार यही कहा कि मैं हर उस आदमी के साथ काम करना चाहती हूं जो मेरे साथ काम करना चाहता है। एक साथ काम करने की ख्वाहिश ही अच्छा काम निकलवा पाती है।
कोई ऐसी फिल्म करने का मन तो होता होगा, जिसमें कहानी सिर्फ आपके आसपास चक्कर लगाए?
जी बिल्कुल, अब समय बदल गया है। एक हीरोइन की परिभाषा भी फिल्मों में बदल गई है। इसीलिए अब पिंक, पीकू, राजी और गली बॉय जैसी फिल्में देखने को मिलती हैं। इस तरह की कहानियां लिखना लेखकों के हाथ में होता है। पर अब भी ऐसी फिल्में बहुत ही कम लिखी जा रही हैं। अभी तक जितनी भी फिल्में मैने की हैं वह सभी मर्दों की कहानियां हैं। मुझे लगता है महिला किरदार केंद्रित फिल्म मुझ तक आने में अभी और वक्त लगेगा।
राजकुमार राव और आपकी शुरूआत एक साथ हुई, अब फिर से आप उनके साथ एक फिल्म कर रही हैं, कितना बदले हैं राजकुमार तब से?
तब हम दोनों नए थे। वह पुणे इंस्टीट्यूट से आए थे तो उन्हें थोड़ा कुछ पता भी था, मुझे तो तब कुछ भी नहीं आता था। अब पूरे आठ साल बाद हम दोबारा साथ काम कर रहे हैं तो ये अनुभव बिल्कुल अनोखा है। वह तो परफेक्ट हो चुके हैं। हां, मैं अब भी सीख रही हूं।