सिनेमा में पीतलनगरी मुरादाबाद की चमक पहुंचाने वाले जावेद जाफरी के बेटे मीजान दो साल की उम्र से ही कैमरे के सामने हैं। अपने पापा के शो बूगी वूगी के टाइटल ट्रैक में वह नाचते दिखे। बड़े हुए तो सिनेमा पढ़ने अमेरिका गए। पढ़ाई बीच में ही छोड़ फिल्म पद्मावत में निर्देशक संजय लीला भंसाली के असिस्टेंट बन गए। काम के बीच ही भंसाली ने उन्हें एक दिन हीरो बना दिया। मीजान की पहली फिल्म मलाल आज रिलीज हो रही है।
Exclusive इंटरव्यू: मीजान बोले-मेरे काम को पसंद करें दर्शक न कि जावेद जाफरी का बेटा हूं इसलिए...
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फिर तो खासा आसान रहा आपका हीरो बनने का सफर?
नहीं ऐसा नहीं है। मैं आपको बताता हूं। फिल्म में मेरा किरदार मराठी है और मुझे मराठी बोलनी तो क्या समझनी भी नहीं आती थी। इस किरदार के लिए खुद को तैयार करने में मुझे दो साल का वक्त लगा। मैं अपने निर्देशक के साथ मुंबई की चालों में भटकता था। अपने किरदार को वहां महसूस करने की कोशिश करता था। मुझे इरादतन उन इलाकों में वक्त गुजारने के लिए रखा गया जहां न किसी को हिंदी आती थी और न अंग्रेजी।
मशहूर कलाकार जगदीप की कॉमेडी के लोग दीवाने रहे हैं, आपके पिता जावेद जाफरी का डांस कमाल का करते हैं, आपने इन दोनों से क्या सीखा है?
मेरे दादाजी ने बहुत छोटी उम्र से अभिनय करना शुरू कर दिया था। वह शुरू में गंभीर किरदार ही किया करते थे। फिर एक फिल्म में उनको हास्य भूमिका मिली और लोगों को वह बहुत पसंद आई। मेरे पापा भी फिल्मों में एक डांसर के तौर पर नहीं आए। उनकी पहली फिल्म मेरी जंग थी जिसमें वह विलेन बने थे। अब भी वह अलग अलग भूमिकाओं की तलाश में रहते हैं। सूर्यवंशी, बाला और कुली नंबर वन में उनका अलग ही रूप देखने को मिलेगा। मैंने इन दोनों से इंसानियत सीखी है। जमीन से जुड़े रहना सीखा है और अपने काम मे जी जान लगा देना सीखा है।
संजल लीला भंसाली से आपकी मुलाकात कैसे हुई?
फिल्म मलाल में मेरी हीरोइन शर्मिन और मैं शुरू से एक दूसरे को जानते हैं। शर्मिन बाजीराव मस्तानी में संजय सर के साथ थीं। दो दिन मैंने उस सेट पर बिताए और उसके बाद अमेरिका चला गया अपने कॉलेज। वहीं मुझे संजय सर का फोन आया फिल्म पद्मावत में काम करने के लिए। अपने टीचर की सलाह पर मैं पढ़ाई छोड़ पद्मावत में काम करने आ गया। यहीं एक दिन संजय सर ने मुझे अचानक से बुलाकर मेरा ऑडीशन लिया था।
शर्मिन रिश्ते में संजय लीला भंसाली की भांजी हैं, आप जावेद जाफरी के बेटे हैं, वंशवाद को लेकर हिंदी सिनेमा में छिड़ी बहस पर कुछ कहना चाहेंगे?
मैं जानता हूं कि जो मौका पाने के लिए लाखों लोग कतार में हैं, वह मौका मुझे इतनी आसानी से मिल गया। हर कारोबार में बच्चे अपने घरवालों के कारोबार में आते हैं। बस यहां हिंदी सिनेमा में इसे हौवा बना दिया गया है। मैं जावेद जाफरी का बेटा हूं, यह जानकर मुझे काम तो मिल जाएगा लेकिन ये मेरा करियर नहीं बना सकता। मैं अच्छा अभिनेता तभी कहलाऊंगा जब दर्शक मुझे पसंद करेंगे। दर्शकों को अच्छा अभिनय चाहिए, वह इस विवाद में नहीं जाते हैं कि कौन किसका बेटा है।