छोटे परदे पर हीना सीरियल को आए दो दशक से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब भी इसमें लीड किरदार करने वाली अभिनेत्री सिमोन सिंह कहीं भी जाती हैं तो इसे लेकर उनसे बात जरूर होती है। सिमोन इन दिनों प्रसारित हो रहे सीरियस बहू बेगम को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनसे एक खास मुलाकात।
'हीना' से 'बहू बेगम' तक पर सिमोन सिंह ने की अमर उजाला से बातचीत, इन दो बड़ी फिल्मों में आएंगी नजर
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आपके हिसाब से अच्छी कहानियों की पहचान क्या होती है?
मेरे हिसाब से अच्छी कहानियों का असर यही होता है कि उनके किरदार लोगों के जेहन में बस जाते हैं। बचपन में सुनी तमाम कहानियां भी हमें इसीलिए याद रह जाती हैं क्योंकि उनमें हम अपने जैसा कुछ ढूंढने कामयाब रहते हैं। लेकिन, जमाना बदलता है तो किरदार भी बदलते हैं। हीना से लेकर बहू बेगम तक महिलाओं की सोच में बदलाव आया है, जमाने से मुकाबला करने का उनका हौसला बढ़ा है और हमें भी अपने आसपास ऐसी महिलाओं का समर्थन करना चाहिए जो अपने बूते कुछ कर दिखाने की मशक्कत कर रही हैं।
आप जगह जगह जाती हैं, दुनिया घूमती हैं तो इसका एक अभिनेत्री के तौर पर आप पर क्या असर होता है?
किसी एक दायरे में बंधकर आरामदायक जिंदगी बिताते रहना इंसान के विकास में बाधा बनता है। मेरे हिसाब से अलग अलग प्रांतों के लोगों से मिलना काफी लाभदायक साबित होता है। उनके अलग अलग अनुभवों से काफी सीख भी मिलती है। सिर्फ उनसे बात करने के बाद एक नए तरह की ऊर्जा महसूस होती है।
आप इतने लंबे समय से टीवी से जुड़ी रही हैं, आपके नजरिए से क्या बदलाव आया है भारतीय टेलीविजन में कंटेंट को लेकर?
मैं अक्सर सोचती हूं तो मुझे लगता है कि अच्छे और बुरे हर तरह के बदलाव एक ही मात्रा में हुए हैं। कुछ बदलावों ने टीवी पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की गुणवत्ता बढ़ाई है। पर वहीं जिस तरह का काम आज होता है और जितनी मेहनत अभिनेताओं, लेखकों और निर्माताओं को करनी पड़ती है, उसका प्रभाव भी कंटेंट की गुणवत्ता पर पड़ता है। पहले सभी सीरियलों की कहानी एक जैसी और साधारण हुआ करती थी पर आज नई नई कहानियां हैं, और उनके प्रदर्शन में भी काफी बदलाव आया है, इससे मैं बेहद खुश हूं। पर कुछ बदलाव ऐसे भी हैं जो अच्छे नहीं हैं।
और, ओटीटी का क्या असर पड़ा है?
अभी एक नया दौर शुरू हुआ है ओटीटी का। इस वेब प्लेटफॉर्म ने ही नई नई तरह की शैलियां और कहानियों की पेशकश को बढ़ावा दिया है। अब हर तरह के दर्शक अपनी अपनी पसंदीदा शैलियां अनुसार चयन कर सकते हैं। ये बेहद अच्छी बात है। वहीं कलाकारों और तकनीशियनों के लिए यह सबसे अच्छा समय है, इतने सारे माध्यमों के चलते अब काम का आभाव नहीं है। लेकिन, किसी भी नए के पीछे पागलों की तरह दौड़ पड़ना भी सही नहीं है। काम उतना ही करना चाहिए जितने में आपकी मानसिक शांति में खलल न पड़े। मैं टीवी से इसीलिए दूर हुई। इसमें काम करना बहुत ही थका देने वाला होता है। एक कलाकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।