सन् 1984 का वो मंजर, जिसे सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज से करीब 37 साल पहले 1 नवंबर 1984 को जब भारत के इतिहास की सबसे भयानक और दर्दनाक घटना घटी थी। 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी के दो सिख बॉडीगार्ड के द्वारा उनकी हत्या किए जाने के बाद देशभर में नरसंहार हुआ था। उनकी हत्या का बदला लेने के बहाने निर्दोष सिखों को पकड़-पकड़कर उनकी हत्या कर दी गई थी, उनके पूरे-पूरे परिवार जिंदा फूंक दिए गए थे। 84 के दंगों की इस दर्द भरी कहानी पर कई बार फिल्मी कैमरा घूम चुका है। हाल ही में दिलजीत दोसांझ की फिल्म जोगी का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस फिल्म में भी सिख दंगों की कहानी दिखाई गई है। इस फिल्म में दिलजीत के अलावा जीशान अय्यूब, कुमुद मिश्रा और हितेन तेजवानी लीड रोल में हैं। फिल्म 16 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। वैसे बता दें कि जोगी से पहले भी कई फिल्में सिख दंगों पर बन चुकी हैं।
Movie On Sikh Riots: 'ग्रहण' से 'हवाएं' तक, 'जोगी' से पहले भी 84 के दंगों की कहानी पर घूम चुका है फिल्मी कैमरा
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31 अक्टूबर
चार साल पहले शिवाजी लोटन पाटिल ने एक हिंदी फिल्म '31 अक्तूबर' का निर्देशन किया जिसकी कहानी वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से शुरू होती है। फिल्म की पूरी कहानी एक परिवार पर केंद्रित है जो इस नरसंहार में अपने बचाव के तरीके ढूंढता है। इस फिल्म में सोहा अली खान, वीर दास, लक्खा लखविंदर सिंह और प्रीतम कांगने ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
पंजाब 1984
ये भी दिलजीत दोसांझ की फिल्म है। पंजाब 1984 साल 2014 में रिलीज हुई थी। ये एक पीरियड ड्रामा फिल्म थी जिसमें 1984-1985 के समय पर फोकस किया था। इसमे एक मां को दिखाया गया है, जिसके बेटे को पुलिस बिना किसी गलती के गिरफ्तार कर लेती है। फिल्म में दिखाया गया है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कैसे निर्दोश सिखों की हत्या कर दी जाती है।
हवाएं
साल 2003 में सबसे पहले इस मुद्दे पर फिल्म बनाई अमितोज मान ने। इस फिल्म का शीर्षक 'हवाएं' रहा। अमितोज ने यह फिल्म हिंदी और पंजाबी दोनों ही भाषाओं में बनाई थी। इसमें बब्बू मान, माही गिल और खुद अमितोज ने अभिनय किया। समीक्षकों के मुताबिक अमितोज ने फिल्म में घटनाओं को काफी सत्यापित ढंग से पेश किया है।
ग्रहण
सत्य व्यास का उपन्यास चौरासी पंजाब में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों पर लिखा गया था। वेब सीरीज 'ग्रहण' की कहानी भी 'चौरासी' पर ही आधारित है। 84 के दंगों के अलावा इस सीरीज में 'चौरासी' के 'ऋषि-मनु' की तर्ज पर प्रेम कहानी भी दिखाई गई है।