अपने सहज और प्रभावी अभिनय के लिए मशहूर अभिनेत्री गीता बाली 50 के दशक की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार हैं। 12 साल की उम्र में ही अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाली गीता ने हिंदी फिल्म जगत में ढेरों हिट फिल्में दी। कपूर खानदान की बहू बनने के बाद गीता खुशहाल जिंदगी जी ही रही थी कि 21 जनवरी 1965 में मात्र 35 वर्ष की उम्र में ही वह चल बसीं। उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको उनसे जुड़ी 10 खास बातें बताते हैं।
परिवार के खिलाफ जाकर गीता बाली ने रचाई थी शम्मी कपूर संग शादी, पढ़ें 10 अनसुनी कहानियां
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बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत
गीता ने 12 वर्ष की उम्र में बाल कलाकार के तौर पर फिल्म 'कॉबलर' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। हीरोइन के तौर पर वह 1946 में फिल्म 'बदनामी' में दिखी। 1950 के दशक में गीता का इंडस्ट्री में अच्छा दबदबा रहा। उस दौर की वह टॉप अभिनेत्रियों में भी शुमार थी।
शादी से पहले जेठ और ससुर की टीम में
गीता बाली ने हिंदी फिल्म जगत के तमाम अभिनेताओं के साथ तो काम किया ही, शम्मी कपूर से शादी से पहले वह अपने जेठ राज कपूर और ससुर पृथ्वीराज कपूर के साथ भी परदे पर खूब दिखीं।साल 1950 में उन्होंने राज कपूर संग फिल्म 'बावरे नैन' में काम किया और 'आनंद मठ' में वह पृथ्वीराज कपूर के साथ नजर आईं थी। 'आनंद मठ' गीता के करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से है।
कपूर खानदान में शादी करने के बाद अक्सर अभिनेत्रियों ने फिल्मों से दूरी बना ली लेकिन गीता ने शादी के बाद अपनी आंखिरी सांस तक फिल्मों में काम जारी रखा। उनकी आखिरी फिल्म 1963 में रिलीज हुई 'जब से तुम्हें देखा है' थी। उन्होंने दस साल के करियर में 70 से भी अधिक फिल्मों में काम किया था।
समाज ने किया बहिष्कृत
गीता के माता-पिता ने शुरू से उन्हें शास्त्रीय संगीत, नृत्य और घुड़सवारी जैसी चीजों के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। रूढ़िवादी सिखों ने सामाजिक रूप से परिवार का बहिष्कार किया क्योंकि उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शन करने वाली लड़कियां पसंद नहीं थीं और उन्होंने थियेटर का घेराव भी किया।
भाई रहे निर्देशक
गीता बाली के भाई दिग्विजय सिंह बाली एक फिल्म निर्देशक थे। उन्होंने 'राग रंग' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इस फिल्म में गीता बाली और अशोक कुमार नजर आए थे। यह फिल्म 1952 में रिलीज हुई थी।
शम्मी कपूर से शादी
23 अगस्त 1955 को गीता बाली ने अभिनेता शम्मी कपूर से शादी की थी। दोनों का प्यार फिल्म 'रंगीन रातें' (1955) से परवान चढ़ा। हालांकि दोनों के घरवाले इस शादी के लिए रजामंद नहीं थे। लेकिन घरवालों की इच्छा के खिलाफ जाकर दोनों ने मंदिर में शादी रचा ली। कुछ वक्त नाराज रहने के बाद दोनों के घरवाले मान गए। गीता और शम्मी के दो बच्चे़ हैं, बेटा आदित्य राज कपूर और बेटी कंचन।आदित्य ने कुछ फिल्मों के जरिए अपनी किस्मत आजमाई लेकिन सफल नहीं हुए वहीं कंचन ने फिल्मकार मनमोहन देसाई के बेटे केतन देसाई से शादी रचाई।
गीता और शम्मी खुशहाल जिंदगी जी रहे थे कि गीता चेचक बीमारी की गिरफ्त में आ गईं। शादी के दस साल बाद उन्हें यह बीमारी हुई और 1965 में गीता दुनिया को अलविदा कह गईं। पत्नी की मौत से शम्मी कपूर पूरी तरह से टूट गए। गम में डूबे शम्मी कपूर का धीरे-धीरे वजन भी बढ़ता चला गया। शम्मी कपूर को जो झटका लगा उसका असर उनकी फिल्मों पर भी पड़ना शुरू हो गया।
फिल्मफेयर नामांकन
गीता बाली को फिल्म 'वचन' (1955) के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के तौर पर फिल्म 'कवि' (1955) के लिए भी नामांकित किया गया।