{"_id":"5acdb3ff4f1c1b513e8b47f7","slug":"google-celebrate-k-l-saigal-114th-birthday-anniversary-with-google-doodle","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":" हिंदी सिनेमा के दिग्गज केएल सहगल को गूगल ने किया याद, ऐसी मनाई 114वीं वर्षगांठ","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
हिंदी सिनेमा के दिग्गज केएल सहगल को गूगल ने किया याद, ऐसी मनाई 114वीं वर्षगांठ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
हिंदी सिनेमा में अपनी अभिनय और संगीत से अलग पहचान बनाने वाले गायक अभिनेता के एल सहगल को सर्च इंजन गूगल ने उनके जन्मदिन की 114वीं वर्षगांठ को बहुत ही खास तरीके से मनाया है। गूगल ने सहगल का आकर्षक डूडल बनाकर उन्हें आज की दिन समर्पित किया है। के एल सहगल का जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू में हुआ था।
2 of 5
सहगल बचपन से ही अभिनय और संगीत के शौकिन थे। वह अक्सर अपनी मां केसरबाई के साथ आए दिन संगीत कार्यक्रमों में शरीक हुआ करते थे। उनके पिता अमरचंद जम्मू कश्मीर के राजा के कोर्ट में एक तहसीलदार थे। के एल सहगल को अभिनय का इतना शौक था कि वह रामलीला में सीता का किरदार निभाया करते थे।
3 of 5
बताया जाता है कि सहगल साहब ने कम उम्र में की पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वह रेलवे की नौकरी करने लगे। रेलवे की नौकरी में मन नहीं लगा तो वह टाइपराइटर की नौकरी करने लगे। इस नौकरी के सहारे उन्होंने पूरा देश घूमा। इस दौरान लाहौर में उनकी मुलाकात मेहरचंद जैन से हुई। वह मेहपचंद के साथ कोलकाता आए। कोलकाता में रहते हुए उनकी संगीत की और रूचि बढ़ने लगी। साल 1930 में संगीत निर्देशक हरिश्चंद्र बाली के द्वारा आरसी बोरल रॉय से उनकी पहचान कराई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
फिल्मी दुनिया में कदम रखने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की। उन्होंने 200 रुपए महीने के वेतन पर बी एन के फिल्म स्टूडियो में काम किया। वहां काम करने के दौरान सहगल साहब की मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज केसी डे, पहारी सन्याल और पंकज मल्लिक से हुई। इसके बाद केएल सहगल ने फिल्म 'मोहब्बत के आंसू' पहली बार अभिनय किया। साल 1932 में ही वह 'जिंदा लाश' और 'सुबह का सितारा' जैसी फिल्मों में नजर आए।
विज्ञापन
5 of 5
इसके बाद केएल सहगल ने साल 1935 में आई पी सी बरुआ की फिल्म देवदास में 'शराबी' के किरदार से एकदम अलग पहचान बना ली। 1941 में बंबई आने के बाद वह ने भक्त सूरदास(1942) और तानसेन(1943) जैसी कई शानदार फिल्मों में अपनी अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया था। उन्होंने अपनी फिल्मी करियर में कुल 36 फिल्मों की थी। इसके बाद मजह 42 की उम्र में ही उन्होंने साल 1947 में दुनिया से अलविदा कह गए।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।