अभिनेत्री जान्हवी कपूर की फिल्म 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' बीते कुछ समय से विवादों के घेरे में हैं। इस फिल्म पर भारतीय वायुसेना भी अपनी आपत्ति जता चुकी है। वहीं एक बार फिर से राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और सरकार से कहा है कि इस फिल्म के निर्माता करण जौहर से जवाब मांगा जाए।
फिल्म गुंजन सक्सेना के विवाद पर महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने दी प्रतिक्रिया, करण जौहर के लिए कही ये बात
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दरअसल एक बार फिर से केंद्र और भारतीय वायुसेना ने फिल्म 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट जाने का फैसला किया। इस बात को लेकर महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए यह भी कहा है कि केंद्र सरकार को भारतीय वायुसेना की पायलट गुंजन सक्सेना से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना चाहिए और करण जौहर से एनओसी मांगनी चाहिए।
रेखा शर्मा ने अपने ट्वीट में लिखा, 'मैं पहली हूं जिसने फिल्म 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। केंद्र को करण जौहर से इस फिल्म की एनओसी के बारे में भी पूछना चाहिए। यदि उनके पास एनओसी नहीं होगी तो फिर चीजें और भी ज्यादा साफ हो जाएंगी।' फिल्म 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' को लेकर बीते दिनों रेखा शर्मा ने एक और ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने गुंजन सक्सेना से सवाल किए थे।

रेखा शर्मा ने ट्वीट किया था, 'असली गुंजन सक्सेना को सामने आना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि क्या फिल्म में दिखाया गया लिंग भेदभाव वास्तविक है? सेना की पृष्ठभूमि से होने के कारण मैं कभी भी रक्षा अधिकारियों का गुंडों की तरह व्यवहार करने की कल्पना नहीं कर सकती। अधिकारी हों या न हों, सेना में महिलाओं को हमेशा सम्मान मिलता है।'
The real #GunjanSaxena must come out and clarify whether the gender discrimination shown in movie is for real? Being from Army background I can never imagine defence officers behaving like goons. Officer or not, women are always get their due respect in forces.
बता दें कि गुंजन सक्सेना फिल्म कारगिल युद्ध में शामिल होने वाली पहली महिला पायलट पर आधारित है। 1999 की जंग में साहस दिखाने के लिए उन्हें शौर्य वीर पुरस्कार से नवाजा गया था। वायुसेना का कहना है कि सेना में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता और सभी को बराबर का मौका दिया जाता है। तीनों सेनाओं में वायुसेना ने ही सबसे पहले महिला अधिकारियों को मेडिकल ब्रांच के अलावा अन्य विभाग में भी कमीशन दिया था।
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