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B'day Spl : हर किसी के बस में नहीं, यूं ‘गुलज़ार’ हो जाना
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला
Updated Fri, 18 Aug 2017 04:21 PM IST
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गुलजार
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आज 18 अगस्त है और आज साहित्यिक-सिनेमाई दुनिया की ऐसी शख्सियत का जन्मदिन है, जिसके बिना भारतीय सिनेमा कुछ अधूरा सा लगता है। लेखक, निर्देशक, प्रोड्यूशर, शायर, गजलकार, गीतकार जैसी तमाम पहचान उनके नाम जुड़ी हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी ‘गुलज़ार साहब उर्फ संपूरन सिंह कालरा’ की।
गुलज़ार
चेहरे पर मुस्कान, शरीर पर सफेद कुर्ता और पायजामा ही इस शख्सियत की फौरी पहचान है। रूमानियत वो शब्दों से गढ़ते हैं। कुछ ऐसा जादू करते हैं कि मुरझाए चेहरे पर भी हंसी खिल जाए। बहरहाल, हम बता रहे हैं गुलजार के बारे में, जिनका होना ही अपने आप में इस इंडस्ट्री की उपलब्धि है।
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गुुलज़ार
गुलज़ार का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब के झेलम जिले में 18 अगस्त 1936 को हुआ था। झेलम के दीना गांव में इनका परिवार रहता था। ये शहर अब पाकिस्तान में है।
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गुलजार
गुलजार ने बचपन में बुरे दिन देखे। मां को खोया, तो पिता का साया भी बचपन में ही सर से उठ गया। शुरुआती दिन दिल्ली की सब्जी मंडी में बीते। क्योंकि जब भारत बंटा तो बहुत कुछ बंट गया था। इस बंटवारे में उनका घर-परिवार छिन गया था और परिवार दिल्ली आ गया था।
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- फोटो : amar ujala
गुलज़ार ने दिल्ली से मुंबई का सफर जब तय किया, तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआत में जिंदगी चलाने के लिए उन्होंने बतौर मकेनिक काम किया और खाली समय का इस्तेमाल करते हुए कविताएं लिखनी शुरू कर दी। यहीं से वो इंडस्ट्री के संपर्क में आए और बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार जैसे नामों के सहायक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। आधिकारिक तौर पर बिमल राय की फिल्म 'बंदनी' के लिए गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा।