हिंदी सिनेमा में 'शोमैन' के नाम से मशहूर राज कपूर के सबसे छोटे बेटे अभिनेता राजीव कपूर उर्फ चिंपू ने फिल्मों में रहकर इतना नाम नहीं कमाया है जितना उन्होंने विवादों में रहकर अपनी पहचान बनाई है। अपने पूरे अभिनय करियर में उन्होंने कोई 10 से 12 फिल्मों में ही काम किया है लेकिन उनकी सिर्फ एक फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' ही सुपरहिट हो पाई। हालांकि, इसका भी श्रेय राजीव कपूर नहीं बल्कि इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री मंदाकिनी ले उड़ीं। इस वजह से राजीव का मनोबल भी टूटा और उनमें चिड़चिड़ापन भी बढ़ गया। आइए, आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से सुनाते हैं।
'शोमैन' के इस सबसे छोटे बेटे ने खूब बटोरीं सुर्खियां, ये हैं चिंपू कपूर की सात अनसुनी कहानियां
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सहायक बनकर पद्मिनी से लड़ाया इश्क
राजीव ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक सहायक निर्देशक बनकर की थी। सबसे पहले वह आरके बैनर के तले बनी फिल्म 'बीवी ओ बीवी' के निर्देशक राहुल रवैल के सहायक निर्देशक रहे। इसके बाद खुद राज कपूर ने ही उन्हें अपने साथ एक सहायक निर्देशक के तौर पर रखा। राज कपूर ने जब ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरी की फिल्म 'प्रेम रोग' को निर्देशित किया, उस समय राजीव उनके सहायक रहे। एक सहायक निर्देशक का काम करते हुए राजीव इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी से प्रेम करने लगे।
प्यार का यह सिलसिला शूटिंग के दौरान ही शुरू हुआ था। शूटिंग के दौरान ब्रेक मिलने पर राजीव और पद्मिनी में खूब बातचीत होती थीं। राज कपूर जब राजीव को बुलाते तो वह अक्सर पद्मिनी के मेकअप रूम से ही निकलते हुए पाए जाते थे। यह सब बातें मीडिया में फैल गईं और कई मैगजीनों ने इन घटनाओं के बारे में लिखा। यह सभी चीजें राज कपूर को अच्छी नहीं लगीं। उन्होंने पद्मिनी को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि अगर वह इस फिल्म में काम करना चाहती हैं तो उन्हें राजीव का साथ छोड़ना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करती हैं तो उन्हें यह फिल्म छोड़नी होगी। पद्मिनी ने फिल्म का ही चुनाव किया।
राज कपूर के बेटे होने का मिला फायदा
राजीव कपूर को अपनी पहली फिल्म 'एक जान हैं हम' एफसी मेहरा प्रोडक्शंस के बैनर तले मिली। इस फिल्म का निर्देशन राजीव मेहरा ने किया। जब फिल्म की शूटिंग पोर्ट ब्लेयर में चल रही थी तब वहां के लोगों ने राजीव कपूर को खूब अनदेखा किया। दरअसल, वह सोचते थे कि राजीव, कपूर खानदान से कहीं दूर से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, वह शम्मी कपूर जैसे दिखते थे इसलिए उन्हें शक था कि इनका रिश्ता शम्मी कपूर से कुछ हो सकता है। लेकिन जब राजीव ने खुद बताया कि वह राज कपूर के बेटे हैं तो एक ही क्षण में सभी लोगों का बर्ताव उनके प्रति बदल गया। फिर वे सभी लोग राजीव को मुफ्त में खाना, मुफ्त में फोन पर बात करना आदि देने लगे। राजीव भले ही राज कपूर के बेटे थे लेकिन उन्होंने राजीव को अपनी फिल्म में लॉन्च नहीं किया था। एक बार जब खुद राज कपूर से यह पूछा गया कि उन्होंने अपने बेटे राजीव को अपने निर्देशन में बनी फिल्म में लॉन्च क्यों नहीं किया तो उन्होंने बताया कि वह अपने बच्चों के लिए फिल्म नहीं बनाते हैं। हर कहानी अपना कलाकार खुद चुनती है।
अनिल कपूर ने लूट ली महफिल
जब राजीव की पहली फिल्म का प्रीमियर रखा गया तो उन्होंने थिएटर में घुसते ही देखा कि लोग चिल्ला रहे हैं। सीटियां बजा रहे हैं। यह दृश्य देखकर राजीव को बड़ी खुशी हुई और खुद पर गर्व भी महसूस हुआ। राजीव ने भीड़ को संबोधित करते हुए अपना हाथ हवा में हिलाया। हालांकि उन्हें जल्द ही समझ में आ गया था कि भीड़ उनकी वजह से पागल नहीं हुई पड़ी है, बल्कि वह तो अनिल कपूर के लिए सीटियां मार रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर भी इस फिल्म के प्रीमियर पर आए थे। जब वह सिनेमाघर में घुसे तो लोग उनके लिए हल्ला मचाने लगे। राजीव की फिल्म से पहले अनिल की फिल्म 'वो सात दिन' रिलीज हो चुकी थी जो कि एक बड़ी हिट फिल्म थी। लोग तभी से अनिल को पसंद करने लगे थे।
अपनी ही फिल्म के प्रचार से दूर रहे राजीव
यह किस्सा राजीव की 1985 में आई फिल्म 'जबरदस्त' का है जिसमें उन्होंने दोहरा किरदार निभाया है। भले ही राजीव इस फिल्म में दोहरे किरदार में नजर आए हैं लेकिन पूरा श्रेय तो जयाप्रदा और सनी देओल ही ले उड़े। एक इंटरव्यू में खुद राजीव ने बताया था कि उन्होंने यह फिल्म सिर्फ इस फिल्म के निर्देशक नासिर हुसैन की वजह से साइन की थी। फिल्म साइन करने से पहले कई लोगों ने राजीव से कहा था कि वह इस फिल्म में अच्छे नहीं लगेंगे लेकिन राजीव उनसे सहमत नहीं हुए। उन्होंने अपने आप को वीडियो में भी देखा तो वह बहुत खुश हुए। हालांकि फिल्म के दूसरे अभिनेता सनी देओल अपने किरदार से खुश नहीं थे। उनका कहना था कि उन्होंने तो फिल्म में कुछ किया ही नहीं।
जब इस फिल्म के प्रचार की बारी आई तो निर्माताओं ने सनी देओल के बड़े-बड़े पोस्टर छपवा दिए जबकि राजीव को थोड़ी सी जगह मिली। इस बात से खफा होकर जब राजीव ने फिल्म के निर्माताओं से बात की तो उन्होंने बहाना लगाया कि यह उनकी नहीं, बल्कि प्रिंटर की गलती है। जबकि, हकीकत में इसका कारण यह था कि इससे पहले राजीव की सभी फिल्में लगभग फ्लॉप ही रही थीं और सनी देओल की हाल ही में फिल्म 'अर्जुन' रिलीज हुई थी जो कि सुपरहिट रही। लोग सनी देओल को पसंद करने लगे थे और राजीव अपनी पहचान नहीं बना पा रहे थे। इस वजह से राजीव फिल्म के प्रचार में भी शामिल नहीं हुए।