सिनेमा में एक दौर ऐसा भी था,जब यहां पुरुष प्रधान फिल्में बना करती थीं और अभिनेत्रियों का रोल केवल नाम भर के लिए होता था। लेकिन, आज के दौर में काफी बदलाव देखा गया है, जिसमें अभिनेत्रियां चैलेंजिंग रोल प्ले कर खुद को साबित करने में यकीन रखती हैं। बीते कई वर्षों में बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में बनीं जो महिलाओं की जिंदगी पर आधारित हैं, इनमें कई फिल्में तवायफों के जीवन पर बनी हैं। मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली अब 'हीरा मंडी' से ओटीटी की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। यह पाकिस्तान के लाहौर में स्थित रेड लाइट एरिया पर आधारित एक सीरीज है, जो नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शूटिंग शुरू कर दी गई है। आज हम आपको इस रिपोर्ट में बॉलीवुड की ऐसी ही फिल्मों से रूबरू कराएंगे...
Heera Mandi: 'हीरा मंडी' से पहले इन फिल्मों में दिखी तवायफों की जिंदगी, आखिरी वाली तो साबित हुई थी ब्लॉकबस्टर
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पाकीजा (1972)
फिल्म 'पाकीजा' कोठे पर पाली गई एक लड़की नरगिस (मीना कुमारी) की कहानी है, जो बड़ी होकर बहुत ही सुंदर और लोकप्रिय नाचने वाली बनती है। नरगिस को तवायफ साहिबजान के नाम से जाना जाता है। एक दिन कोठे पर आया एक नवाब अहमद खान (राजकुमार), साहिबजान पर अपना दिल हार बैठता है और बस यहीं से फिल्म की कहानी में ट्विस्ट आ जाता है। 1972 में रिलीज हुई इस फिल्म की कहानी को मीना कुमारी, राजकुमार, अशोक कुमार और अन्य कलाकारों ने अपनी अदाकारी से जीवंत किया। फिल्म में मीना कुमारी ने एक तवायफ के किरदार को बड़ी ही सहजता और मासूमियत के साथ निभाया था। इसकी कहानी ने हमें यह बताया कि एक तवायफ का जीवन बहुत ही जिल्लत भरा होता है। उसको दुनिया एक वस्तु की तरह समझती है और यह भूल जाती है कि वो भी एक इंसान है।
उमराव जान (1981)
'उमराव जान' साल 1981 में रिलीज हुई एक बायोग्राफी थी, जिसका निर्देशन मुजफ्फर अली ने किया था। यह फिल्म, 'उमराव जान अदा' नाम के एक उपन्यास पर आधारित थी, जिसे मिर्जा हादी रुस्वा ने लिखा था। 'उमराव जान', लखनऊ की एक तवायफ उमराव की कहानी है, जो बचपन में आमरीन के नाम से जानी जाती थी। लेकिन, उसके जीवन की एक घटना उसे कोठे वाली बनने पर मजबूर कर देती है। इस फिल्म में रेखा ने उमराव जान का किरदार निभाया था। आपको बता दें यह फिल्म रेखा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक मानी जाती है।
शराफत (1970)
हेमा मालिनी ने भी अपने करियर की शुरुआत में एक तवायफ का किरदार निभाया था। साल 1970 में आई फिल्म 'शराफत' की कहानी एक ऐसी तवायफ के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक प्रोफैसर कोठे के चंगुल से छुड़वाता है। वह अपने पुराने जीवन को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन उसे समाज ने शांति से जीने नहीं दिया। फिल्म में हेमा मालिनी, धर्मेंद्र और अशोक कुमार जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे।
देवदास (2002)
साल 2002 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म 'देवदास' को बहुत पसंद किया गया था। फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में थे। वैसे तो यह फिल्म देवदास और पारो की प्रेम कहानी पर आधारित है, लेकिन फिल्म में देवदास के प्रति तवायफ चंद्रमुखी का प्यार भी बखूबी दिखाया गया है। माधुरी ने चंद्रमुखी नाम की तवायफ का रोल प्ले किया था। इसमें दिखाया गया कि एक तवायफ चाहे कितनी भी शुद्धता से प्रेम कर ले, लेकिन यह समाज उसे कभी भी प्यार करने की इजाजत नहीं देता।