हिंदी सिनेमा का लंबे समय से सिर्फ अभिनेताओं का ही बोलबाला रहता आया है। अभिनेत्री चाहे जितनी बड़ी हो उसके हिसाब से रोल कम ही लिखे गए। लेकिन, अब ऐसी अभिनेत्रियों की और फिल्मों की तादाद धीरे-धीरे बढ़ रही है जिनमें पूरा फोकस फिल्म की हीरोइन पर होता है। ये नए जमाने की महिलाओं की नई सूरत है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आज हम आपको बताते हैं कि उन चुनिंदा फिल्मों के बारे में जिन्होंने सिनेमा में महिलाओं की सूरत और सीरत बदलने में बड़ा योगदान किया।
International Women’s Day 2021: इन 10 फिल्मों में दिखी आज की मर्दानी, दमदार किरदारों से बदला माहौल
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दंगल (2016)
नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म के लिए ज्यादा चर्चाएं तो मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की रही लेकिन इसकी कहानी महिलाओं पर ही आधारित है। दरअसल, फिल्म में बताया गया है कि लड़कियां भी आजकल लड़कों से कम नहीं हैं। यह फिल्म हरियाणा के कुश्तीबाज महावीर सिंह फोगाट की बेटियों गीता और बबीता फोगाट के जीवन पर आधारित है। इन दोनों का किरदार फिल्म में क्रमशः फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा ने निभाया है। फिल्म में दिखाया गया है कि गीता और बबीता ने देश को गौरवान्वित करने के लिए पहले खुद कितनी परेशानियां झेलीं? इस पुरुष प्रधान समाज में खाना पकाने की बजाय उन्होंने अखाड़े में उतरने की हिम्मत कैसे दिखाई?
सीक्रेट सुपरस्टार (2017)
अद्वैत चंदन की लिखी और निर्देशित इस फिल्म ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी करोड़ों रुपये की कमाई की है। कारण इसका सिर्फ यही है कि इस फिल्म की कहानी आजकल की लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है। फिल्म की कहानी एक महत्वाकांक्षी लड़की की है जो एक गायिका बनकर अपना सपना पूरा करना चाहती है। हालांकि उसके पिता इसके पक्ष में नहीं है। उसके सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह एक मुस्लिम परिवार में जन्मी है। हालांकि, प्रतिभा तो छिपाने से नहीं छिप सकती। इसलिए वह रहस्यमय तरीके से अपना हुनर दुनिया के सामने लाती है।
राजी (2018)
लड़कियां सिर्फ घरों में काम नहीं कर सकतीं, बल्कि अगर उन्हें मौका दिया जाए तो वह अपनी जान पर खेलकर देश सेवा भी कर सकती हैं। इस फिल्म में सहमत खान का किरदार निभा रही अभिनेत्री आलिया भट्ट ने यही संदेश दिया है। फिल्म की कहानी एक लड़की सहमत की है जो एक अंडर कवर एजेंट है। वह अपने देश की मदद करने के लिए पाकिस्तान के एक अफसर से शादी कर लेती है। फिल्म में सहमत का संघर्ष हर मोड़ पर रहा है। वह अपने देश में भी संघर्ष करती है और जब दुश्मनों के बीच में रहती है तो उसे हमेशा अपनी जान का खतरा बना रहता है।
पद्मावत (2018)
बेशक, यह फिल्म देश की सबसे ज्यादा विवादों में रही फिल्मों में से एक है लेकिन इसका संदेश एकदम साफ है। संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी देश की महिलाओं का सिर ऊंचा करती है। कहानी बताती है कि अगर देश की महिलाओं पर कोई संकट आता है तो वह खुद अपनी रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे सकती हैं। यह एक ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म है जिसमें दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती के किरदार में हैं जो अपनी आबरू की रक्षा के लिए अपने राज्य की सभी औरतों के साथ जौहर कर लेती हैं।