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Jagdeep: साबुन-कंघी बेचते-बेचते फिल्मों में आए थे जगदीप, तीन रुपये में ताली बजाने वाले रोल ने बदली जिंदगी

Sat, 08 Jul 2023 08:37 AM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: दीक्षा पाठक Updated Sat, 08 Jul 2023 08:37 AM IST
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Jagdeep Death Anniversary Know Unknown Facts about Actors life and Career struggle
जगदीप - फोटो : अमर उजाला

बॉलीवुड इंडस्ट्री में आना हर अभिनय प्रेमी का बहुत बड़ा सपना होता है। कुछ अपने ख्वाबों को पूरी तरह से मुकम्मल करने के लिए यहां आते हैं तो वहीं कुछ लोग चार पैसे कमाने के लिए भी फिल्मों को बतौर करियर चुनते हैं। आज के इस लेख में हम आपको ऐसे ही शख्स से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने मुंबई जैसे शहर में जिंदा रहने के लिए अभिनय का दामन पकड़ा था, लेकिन किस्मत उन्हें कामयाबी की असीम ऊंचाइयों तक ले गई। हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर और कॉमेडियन जगदीप की, जो तीन रुपये के लालच में फिल्मों में आए थे। 

Jagdeep Death Anniversary Know Unknown Facts about Actors life and Career struggle
जगदीप - फोटो : सोशल मीडिया

एक्टर और कॉमेडियन जगदीप अब इस दुनिया में नहीं हैं। 2020 में कोरोना महामारी के दौरान 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। जगदीप ने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। तब तीन  रुपये के लालच में वह फिल्मों में आए थे। तो चलिए जानते हैं अभिनेता के जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।

Jagdeep Death Anniversary Know Unknown Facts about Actors life and Career struggle
जगदीप - फोटो : सोशल मीडिया

कहते हैं कि दुनिया का सबसे मुश्किल काम होता है किसी को हंसाना फिर चाहे वह स्क्रीन पर हो या असल जिंदगी में, लेकिन सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी वह शख्सियत थे, जिन्होंने दोनों ही मोर्चों पर सिद्धी हासिल की। फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर जगदीप कर लिया था। आज भी फैंस अभिनेता की जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग के लिए उन्हें याद करते हैं।

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Jagdeep Death Anniversary Know Unknown Facts about Actors life and Career struggle
जगदीप - फोटो : सोशल मीडिया

जगदीप का जन्म 29 मार्च 1939 को हुआ था। 1947 में देश के बंटवारे के वक्त उनके पिता गुजर गए थे। उनका परिवार दर-दर की ठोकरें खाने लगा। मां जगदीप और बाकी बच्चों को लेकर मुंबई चली आई और घर चलाने के लिए एक अनाथ आश्रम में खाना बनाने लगी। जगदीप भी मां की हालत को देखते हुए स्कूल छोड़कर सड़कों पर साबुन-कंघी बेचने लगे थे। आगे चलकर अभिनेता ने तीन रुपये  की लालच में अपनी पहली फिल्म में काम किया था।

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जगदीप - फोटो : सोशल मीडिया

उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि फिल्मों में ताली बजाने वाला यह लड़का आने वाले दौर में मील का पत्थर साबित होगा।  बिमल रॉय की फिल्म 'दो बीघा जमीन' ने अभिनेता को वह पहचान दिलाई, जिसकी परवान ले रहे करियर को जरूरत थी। जगदीप का जब भी जिक्र होता है, रमेश सिप्पी की फिल्म 'शोले' में उनके किरदार 'सूरमा भोपाली' की बात जरूर होती है। आज भले ही अभिनेता हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी फिल्मों ने आज भी उनके अस्तित्व को जिंदा कर रखा है।

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