70 और 80 के दशक की सफल अभिनेत्री जयप्रदा कल अपना 57वां जन्मदिन मनाएंगी। 3 अप्रैल 1962 को आंध्र प्रदेश में जन्मीं बॉलीवुड एक्ट्रेस जयाप्रदा ने अपने फिल्मी करियर में 200 से भी ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। दक्षिण फिल्मों से लेकर बॉलीवुड तक जया ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। जयाप्रदा के पिता कृष्णा राव तेलुगू फिल्मों के फाइनेंसर थे। जया के फिल्मी करियर की शुरुआत तेलुगू फिल्म 'भूमिकोसम' से हुई थी। इस फिल्म के लिए जयाप्रदा को केवल 10 रुपए मिले थे। लेकिन ये कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि शुरू से ही जयाप्रदा की जिंदगी चर्चाओं से भरी रही। जया का जीवन किसी ना किसी वजह से हमेशा सुर्खियों में रहा है।
रोमांच और राजनीति से भरी है जयाप्रदा की जिंदगी, ऐसे रहे जीवन के उतार-चढ़ाव
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जयाप्रदा आज अपने फिल्मी और राजनीतिक करियर से आज बड़े मुकाम पर हैं। फिल्म मवाली, तोहफा, औलाद जया के करियर की मील का पत्थर साबित हुईं। शायह ही आपको पता हो कि जया का असली नाम ललिता रानी थी। फिल्मों में आने के बाद ललिता रानी कब जयाप्रदा बनकर कामयाब हो गईं किसी को पता ही ना चला।
जया की असल जिंदगी के बारे में बात करें तो साल 1986 में जब जया का करियर पीक पर था उस दौरान उन्होंने निर्माता श्रीकांत नाहटा से शादी कर ली। जया और श्रीकांत ने 22 जून 1986 को शादी कर ली थी। जयाप्रदा श्रीकांत की दूसरी पत्नी थीं। श्रीकांत की पहली पत्नी का नाम चंद्रा था और उनसे उनके तीन बच्चे भी हैं। श्रीकांत और जयाप्रदा की शादी से काफी विवाद भी खड़ा हुआ, क्योंकि श्रीकांत ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना ही जयाप्रदा से शादी की थी, लेकिन सबसे हैरानी की बात ये रही कि जयाप्रदा से शादी के बाद भी श्रीकांत के अपनी पहली पत्नी से संबंध बरकरार रहे। जयाप्रदा से शादी के बाद श्रीकांत से उनकी पहली पत्नी को बच्चे हुए।
अपने फिल्मी करियर के सफर में जया को उस दौर से भी गुजरना पड़ा जब वह अपने को-स्टार दलीप तहिल संग खूब चर्चा में आई थीं। दरअसल, फिल्म का एक सीन शूट करते वक्त उनके दलीप ताहिल ने जया को कसकर पकड़ लिया था। खुद को दलीप के चंगुल से बचाने के लिए जयाप्रदा ने उन्हें जोरदार थप्पड़ भी जड़ दिया था। इस घटना से वहां मौजूद सभी लोग सन्न रह गए थे।
आखिर में बात करेंगे उनके राजनीतिक करियर की। बॉलीवुड और राजनीति दोनों में ही जया का सिक्का बराबर चला। साल 1994 में दक्षिण राज्य आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी का हाथ थाम जया ने राजनीति में आने का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने पार्टी के लिए जमकर प्रचार भी किया था। इसके बाद जया ने उत्तर भारत की ओर रुख कर उत्तर प्रदेश का बड़ा राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी को चुना। साल 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा ने उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत गईं।