अपनी आवाज से लोगों को दिवाना कर बनाने वाले कैलाश खेर को भला कौन नहीं जानता। उन्हें किसी खास पहचान की जरूरत नहीं है। कैलाश खेर ने कई हिट गाने दिए हैं। उनकी आवाज में वो जादू है जिससे हर कोई उसकी तरफ खीचा चला आता है। उन्होंने अपनी आवाज के जादू से ही लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। उनका गाया हुआ गाना 'अल्लाह के बंदे हंस दे अल्लाह के बंदे' ने तो तहलका ही मचा दिया था।
Kailash Kher: जब आवाज के जादूगर को एक 'टपली' ने सिखाई जिंदगी की अहमियत, फिर यूं चढ़े कामयाबी की सीढ़ी
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जब यह गाना आया था तो काफी हिट हुआ था। कैलाश को बचपन से ही गाने का शौक था। जिसके चलते उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया था। क्या आप जानते हैं कि कैलाश खेर के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था कि उन्होंने सुसाइड करने का फैसला कर लिया था, इसके लिए उन्होंने गंगा में छलांग भी लगा दी थी। जी हां, आपने सही सुना। आज कैलाश खेर के बर्थडे के मौके पर जानते हैं उसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें। तो चलिए शुरू करते हैं...
कैलाश खेर का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में 7 जुलाई साल 1973 में हुआ था। एक इंटरव्यू में कैलाश खेर ने अपने संघर्ष के दिनों पर खुलकर बात की। कैलाश ने बताया कि उन्होंने जिंदा रहने के लिए कई तरह की नौकरियां कीं। जब वह 20 या 21 साल की थे, तब उन्होंने दिल्ली में एक्सपोर्ट बिजनेस की शुरुआत की थी। वह हस्तशिल्प का सामान जर्मनी एक्सपोर्ट किया करते थे, लेकिन वह व्यापार अचानक ठप हो गया। बिजनेस में लगातार नुकसान और परेशानियों को झेलने के बाद वह पूरी तरह से टूट चुके थे। इसके बाद वह पंडित बनने के लिए ऋषिकेश चले गए।
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कैलाश खेर ने बताया कि उन्हें ऐसा लगता था कि वह यहां फिट नहीं बैठते थे, क्योंकि उनके साथी उनसे काफी छोटे थे। साथियों के साथ उनके विचार भी मेल नहीं खाते थे। वह जिंदगी से निराश हो चुके थे। हर चीज में लगातार असफल हो रहे थे, इसलिए उन्होंने एक दिन गंगा नदी में कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन गंगा घाट पर मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें बचा लिया।
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कैलाश खेर को बचाने वाले व्यक्ति ने उनसे पूछा कि जब तैरना नहीं आता तो नदी में क्यों कूदे? तब उन्होंने उस व्यक्ति के साथ अपना दुख साझा किया। उनकी आत्महत्या की बात जानने के बाद उस व्यक्ति ने उनके सिर पर जोर से टपली मारी। उस टपली ने कैलाश खेर को जिंदगी की कीमत सिखा दी। कैलाश खेर ने इस वाक्य को याद करते हुए बताया कि उस घटना के बाद उन्होंने जिंदगी में कुछ करने की ठान ली। वह खुद को साबित करना चाहते थे। इसके बाद वह में लगातार संघर्ष करते गए और सफलता हासिल की।
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