70-80 के दशक में देव आनंद हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार थे, उन पर लड़कियां फिदा रहती थीं। लेकिन देवानंद का दिल आया कल्पना कार्तिक पर। देवानंद की पत्नी कल्पना का आज जन्मदिन है। कल्पना का जन्म 19 सितंबर साल 1931 को लाहौर में हुआ था। कल्पना का असली नाम मोना था लेकिन फिल्मों में आते ही निर्देशक चेतन आनंद ने उन्हें नया नाम दे दिया था। देव आनंद और कल्पना की शादी का किस्सा बहुत चर्चित हुआ था। कैसे लंच ब्रेक में दोनों ने शादी रचा थी, मोना के जन्मदिन पर यही हम आपको बताएंगे।
Kalpana Kartik: देव आनंद को सेट पर प्यार हुआ और लंच ब्रेक में कर ली शादी, गजब है दोनों के प्यार का किस्सा
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पहले देव एक्ट्रेस सुरैया के दीवाने थे लेकिन फिर जब दोनों की शादी नहीं हो पाई तो ये कपल अलग हो गया। देवानंद ने एक इंटरव्यू में इस प्यार पर बताया था, 'सुरैया की नानी इस प्रेम कहानी में सबसे बड़ी अड़चन थीं। सुरैया के घर में नानी की इजाजत के बगैर कुछ भी नहीं होता था। हमारी प्रेम कहानी की वो विलेन थीं। इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि सुरैया मुस्लिम थीं और मैं हिंदू।'
सुरैया और देव आनंद का रिश्ता इस वजह से टूट गया। और फिर उनकी जिंदगी में एंट्री हुई कल्पना कार्तिक की। फिल्मों में साथ काम करने के दौरान देव आनंद का दिल कल्पना कार्तिक के लिए धड़कने लगा। कल्पना फेमस एक्ट्रेस तो थी ही साथ उस वक्त उन्होंने मिस शिमला का खिताब भी जीता था। साल 1954 में फिल्म 'टैक्सी ड्राइवर' के सेट पर देव आनंद ने कल्पना कार्तिक को देखा था। फिल्म के सेट पर ही दोनों के बीच प्यार हुआ। फिर एक दिन दोनों ने लंच ब्रेक में शादी कर ली। अपने जीवन के आखिरी दिनों तक कल्पना कार्तिक, देव आनंद के साथ रही थीं।
कल्पना क्रिश्चियन थीं। उन्होंने केवल 5 फिल्मों में काम किया था। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इन पांच फिल्मों में उनके हीरो देव ही थे। कल्पना ने शिमला से पढ़ाई की थी और मिस शिमला ब्यूटी कॉन्टेस्ट का खिताब जीता था। कल्पना पर जब देव साहब के बड़े भाई चेतन आनंद की नजर पड़ी तो उन्होंने उनके परिवार से बात की और कल्पना को मुंबई भेजने के लिए राजी कर लिया। ये समय था 1951 का जब चेतन आनंद फिल्म 'बाजी' बना रहे थे। उन्होंने मोना सिंह यानी कल्पना को लीड एक्ट्रेस के तौर पर साइन कर लिया। इस फिल्म में कल्पना ने डॉक्टर का किरदार निभाया था।
फिल्म 'बाजी' के बाद कल्पना ने चार और फिल्में की थीं। इन फिल्मों के नाम थे- आंधियां (1952), हाउस नंबर 44 (1954), टैक्सी ड्राइवर (1954) और नौ दो ग्यारह (1957)। इन फिल्मों में कल्पना के हीरो देव आनंद ही थे।
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