खनकती आवाज, डिंपल वाली मुस्कान, शानदार व्यक्तित्व और दमदार अभिनय वाली किरण खेर को आखिर कौन नहीं जानता? पर्दे पर वह जब भी कोई किरदार निभाती हैं तो ऐसे, जैसे वह दृश्य वास्तविक हो। राजनीति में भी उनका रुआब और तेवर देखने लायक है। यही वजह है कि चंडीगढ़ से वह दो बार लोकसभा चुनाव जीती हैं। कुल मिलाकर, सिनेमा और राजनीति के धरातल पर वह एक सफल शख्सियत हैं। मगर, उनकी सफलता की कहानी के पीछे संघर्ष का एक लंबा दौर रहा है, जिसका सामना किरण खेर ने डटकर किया। आज भी संघर्ष ने उनका दामन छोड़ा नहीं है। आइए जानते हैं उनके मुस्कुराते चेहरे के पीछे छिपे दर्द की कहानी को...
Kirron Kher: बैडमिंटन प्लेयर से राजनेता तक... रील लाइफ की तरह रियल लाइफ में भी इतने किरदार निभा चुकीं किरण खेर
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करियर की दिशा बदली
किरण खेर का जन्म 14 जून 1952 को पंजाब के चंडीगड़ में एक सिख परिवार में हुआ था। किरण ने अपनी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई चंडीगढ़ से ही पूरी की है। आज अगर वह अभिनेत्री नहीं होतीं तो एक सफल बैडमिंटन खिलाड़ी होतीं। बहुत कम ही लोग शायद यह बात जानते होंगे कि किरण बैडमिंटन की अच्छी खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने दीपिका पादुकोण के पिता प्रकाश पादुकोण के साथ नेशनल लेवल पर बैडमिंटन खेला है। मगर, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पढ़ाई पूरी करने के बाद किरण का रुझान एक्टिंग की तरफ बढ़ा और उन्होंने इस तरफ करियर बनाने के बारे में सोचा। किरण ने चंडीगढ़ में थिएटर ज्वाइन किया।
ठंडे बस्ते में चली गई पहली ही फिल्म
थिएटर के बाद किरण खेर ने अपने करियर कि शुरुआत साल 1973 में पंजाबी फिल्म 'असर प्यार दा' से की थी। इसके बाद वह बॉलीवुड में अपने लिए रोल तलाश रही थीं। उन्हीं दिनों सुनील दत्त को फ्रेश फेस की तलाश थी। किरण खेर पर उनकी तलाश पूरी हुई। मगर, कुछ आर्थिक संकट की वजह से फिल्म ठंडे बस्ते में चली गई। लेकिन, किरण खेर ने हार नहीं मानी। उन्होंने 1980 में मुंबई आकर काम ढूंढना शुरू किया। और सफल रहीं। किरण खेर ने कई फिल्मों में काम किया। उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने 'देवदास', 'खामोश पानी', 'मैं हूं ना', 'वीर-जारा' और 'रंग दे बसंती' समेत कई अच्छी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। किरण खेर टीवी रियलिटी शो में भी बतौर जज नजर आ चुकी हैं।
यूं टूट गई पहली शादी
आज अनुपम खेर और किरण खेर को आदर्श जोड़ी माना जाता है। दोनों शुरुआत में अच्छे दोस्त थे। हालांकि, प्यार वाली बात नहीं थी। दरअसल किरण खेर जिस थिएटर ग्रुप से जड़ी थीं, उसी ग्रुप में अनुपम खेर भी थे। दोनों ने कई प्ले में साथ काम किया। शायद उस वक्त तक इन दोनों को ही नहीं पता होगा कि आगे चलकर ये दोनों पति-पत्नी बनेंगे, क्योंकि दोनों पहले से शादीशुदा थे। अनुपम खेर 1979 में अरेंज मैरिज कर चुके थे, लेकिन वह इस रिश्ते में खुश नहीं थे। किरण की शादी 1980 में मुंबई के एक व्यवसायी गौतम बेरी से हुई थी, जो केवल पांच साल तक चली। चंडीगढ़ के बाद मुंबई में किरण खेर और अनुपम खेर दोनों स्ट्रगल कर रहे थे। इसी बीच ऐसा लम्हा आया, जब इन्हें प्यार का अहसास हुआ। ऐसे में दोनों ने रिस्की फैसला लिया। अनुपम खेर अपनी पत्नी से तलाक ले चुके थे। इसके बाद किरण खेर और उनके पति भी समझ गए कि अब उनकी शादी नहीं चल पाएगी और दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद 1985 में किरण ने अनुपम के साथ शादी की। किरण ने तलाक लेने पर कहा कि पहली शादी में प्यार नहीं बचा था, इसलिए अलग होने का फैसला लिया। बता दें कि किरण का अपनी पहली शादी से एक बेटा है, जिसका नाम सिकंदर है।
आर्थिक तंगी में संभाली कमान
अक्सर कहा जाता है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे कुछ दर्द छिपा होता है। यह बात किरण खेर पर सही साबित होती है। एक असफल शादी से निकलकर उन्हें अनुपम खेर का साथ मिला। जिंदगी थोड़ी पटरी पर आई। मगर एक आम परिवार की तरह उनके परिवार पर भी मुसीबतें आईं। लिहाजा उनके दूसरे पति यानी अनुपम खेर को आर्थिक घाटा हुआ। परिवार की स्थिति डांवाडोल हुई। इस दौरान किरण खेर ही परिवार के हालात संभालने आगे आईं और परिवार के लिए डटी रहीं। फिल्मों में वापसी की और उनकी मेहनत रंग लाई। परिवार में फिर खुशहाली लौटी।