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आईएमडीबी पर ऋचा और तापसी से कैसे पिछड़ीं आलिया और दीपिका, यहां समझिए पूरा खेल
रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
Published by: शिप्रा सक्सेना
Updated Tue, 31 Mar 2020 11:01 AM IST
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Deepika, Taapsee and Alia
- फोटो : file photo
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भारत में कोरोना वायरस की वजह से लगभग सभी काम रुके हुए हैं, लेकिन ऐसे माहौल में वाटरआर्मी का काम बहुत बढ़ गया है। इसका जीता जागता उदाहरण है कि तापसी पन्नू और ऋचा चड्ढा ने आईएमडीबी रेटिंग में आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण जैसी नंबर वन अभिनेत्रियों को पछाड़ दिया है। सुनने में शायद थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन यही सच है।
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deepika padukone
- फोटो : social media
हो सकता है कि वाटरआर्मी शब्द आपके लिए नया हो, और सुनने में पहली बार आया हो। तो बता दें कि वाटरआर्मी वह सेना होती है जो दुनिया भर में किसी भी प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता को बढ़ाने और घटाने का काम करती है। एक तरह से देखा जाए तो वाटरआर्मी और सोशल मीडिया पर पनपे ट्रोलर्स एक समान ही है। ये दोनों ही ऐसे लोग होते हैं, जिनका अस्तित्व सिर्फ तकनीक की दुनिया में ही है। लेकिन प्रभावित असल जिंदगी को करते हैं।
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ऋचा चड्ढा
- फोटो : amar ujala
कोरोना के चलते चीन में भी लॉकडाउन हुआ। सभी कारोबार ठप हुए और लोग भी घरों में कैद हो गए। इसके बाद खबर आई कि चीन में लाखों फोन नंबर बंद हो गए हैं। पहले कयास लगाए गए कि ये लोग शायद कोरोना वायरस की चपेट में आकर मारे गए। लेकिन बाद में पता चला कि ये तो वाटरआर्मी के सदस्य थे, जो कुछ काम धंधा न होने की वजह से निष्क्रिय हो गए।
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alia bhatt
- फोटो : social media
वाटरआर्मी की शुरुआत चीन से ही हुई है। चीन में सिर्फ तीन ही सेलुलर कंपनी हैं, जो पूरे चीन के लोगों को संचार नेटवर्क प्रदान करती हैं। उनका नियम है कि एक इंसान एक कंपनी के सिर्फ पांच फोन नंबर ही अपने नाम पर ले सकता है। इस हिसाब से हर आदमी 15 फोन नंबर रखने का अधिकारी है। जब एक आम आदमी के लिए सिर्फ एक या दो नंबर ही काफी हैं, तो बाकी नंबर का वह क्या करेगा? यहीं से शुरू होती है वाटरआर्मी की कहानी।
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deepika padukone
- फोटो : amar ujala
जब किसी सोशल मीडिया साइट पर कोई एकाउंट खोलना हो तो वह रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर मांगता है। और एक मोबाइल नंबर से सिर्फ एक ही सोशल मीडिया एकाउंट चल सकता है। यहां काम आते हैं बाकी के खरीदे हुए फालतू मोबाइल नंबर। इस तरह से एक आदमी सोशल मीडिया पर उतने ही एकाउंट चला सकता है, जितने कि उसके पास मोबाइल नंबर हों। और इन्हीं फालतू के सक्रिय नंबरों से बनती है वाटरआर्मी। फिर यही अस्तित्व न रखने वाले लोग सोशल मीडिया पर लोगों को ट्रोल करते हैं, और आईएमडीबी जैसी वेबसाइट पर प्रोडक्टों के रिव्यु करके उनकी विश्वसनीता को प्रभावित करते हैं।
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