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Lata Mangeshkar Birthday: ऐसा रहा लता मंगेशकर का सफर, पिता के गुजर जाने के बाद खुद उठाई पूरे परिवार की जिम्मेदारी

Mon, 28 Sep 2020 07:45 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Mon, 28 Sep 2020 07:45 AM IST
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Lata Mangeshkar Birthday Know About Her Singing Journey and Struggle
लता मंगेशकर - फोटो : twitter@mangeshkarlata

स्वर साम्राज्ञी, बुलबुले हिंद और कोकिला जैसे सारे विशेषण जो लता मंगेशकर के लिए गढ़े गए, वे हमेशा ही नाकाफी लगते रहे हैं। महाराष्ट्र में एक थिएटर कंपनी चलाने वाले अपने जमाने के मशहूर कलाकार दीनानाथ मंगेशकर की बड़ी बेटी लता का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ। मधुबाला से लेकर माधुरी दीक्षित और काजोल तक हिंदी सिनेमा के स्क्रीन पर शायद ही ऐसी कोई बड़ी अभिनेत्री रही हो जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज उधार न दी हो।

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लता मंगेशकर - फोटो : फाइल फोटो

बीस से अधिक भारतीय भाषाओं में लता ने 30 हजार से अधिक गाने गए, 1991 में ही गिनीस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने माना था कि वे दुनिया भर में सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई गायिका हैं। भजन, गजल, कव्वाली शास्त्रीय संगीत हो या फिर आम फिल्मी गाने लता ने सबको एक जैसी महारत के साथ गाया। लता मंगेशकर की गायिका के दीवानों की संख्या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है और आधी सदी के अपने करियर में उनका कोई सानी कभी नहीं रहा।

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मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर - फोटो : फाइल फोटो

जब भारत छोड़ो आंदोलन अपने शीर्ष पर था तब 1942 में सिर्फ 13 वर्ष की लता को छोड़कर उनके पिता दुनिया से विदा हो गए, उनके कंधों पर पूरे परिवार का खर्च चलाने की जिम्मेदारी आ गई। उस्ताद अमान अली खान और अमानत खान से संगीत की शिक्षा लेने वाली लता को रोजी-रोटी चलाने के लिए संघर्ष शुरू करना पड़ा, उन्होंने 1942 में ही एक मराठी फिल्म 'किती हासिल' में गाना गाकर अपने करियर की शुरूआत की लेकिन बाद में यह गाना फिल्म से हटा दिया गया। इसके पांच साल बाद भारत आजाद हुआ और लता मंगेशकर ने हिंदी फिल्मों में गायन की शुरूआत की, 'आपकी सेवा में' पहली फिल्म थी जिसे उन्होंने अपने गायन से सजाया लेकिन उनके गाने ने कोई खास चर्चा हासिल नहीं की।

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लता मंगेशकर - फोटो : Twitter: @iSachinSrivstva

लता का सितारा पहली बार 1949 में चमका और ऐसा चमका कि उसकी कोई मिसाल नहीं मिलती, इसी वर्ष चार फिल्में रिलीज हुईं 'बरसात', 'दुलारी', 'महल' और 'अंदाज'। 'महल' में उनका गाया गाना 'आएगा आने वाला आएगा' के फौरन बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने मान लिया कि यह नई आवाज बहुत दूर तक जाएगी, यह वह जमाना था जब हिंदी फिल्मी संगीत पर शमशाद बेगम, नूरजहां और जोहराबाई अंबालेवाली जैसी वजनदार आवाज वाली गायिकाओं का राज चलता था।

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लता मंगेशकर - फोटो : फाइल फोटो

लता मंगेशकर को शुरू के वर्षों में काफी संघर्ष करना पड़ा कई फिल्म प्रोड्यूसरों और संगीत निर्देशकों ने यह कहकर उन्हें गाने का मौका देने से इनकार कर दिया कि उनकी आवाज बहुत महीन है। ओपी नैयर को छोड़कर लता मंगेशकर ने हर बड़े संगीतकार के साथ काम किया, मदनमोहन की गजलें और सी रामचंद्र के भजन लोगों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं। पचास के दशक में नूरजहां के पाकिस्तान चले जाने के बाद लता मंगेशकर ने हिंदी फिल्म पार्श्वगायन में एकछत्र साम्राज्य स्थापित कर लिया, कोई ऐसी गायिका कभी नहीं आई जिसने उनके के लिए कोई ठोस चुनौती पेश की हो।

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