अपना जीवनसाथी खो देने के बाद किसी महिला की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। ऐसी महिलाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र पिछले नौ साल से विधवा दिवस मनाता है और उन्हें अन्याय और गरीबी से होने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद करता है। हिंदी सिनेमा की कई अभिनेत्रियां ऐसी भी रही हैं जिन्होंने पर्दे पर विधवा का किरदार पूरे दमखम के साथ निभाया है। हॉटस्टार पर हाल ही में प्रसारित होने वाली सीरीज आर्या में भी सुष्मिता सेन ने ऐसा एक किरदार निभाया है। इन किरदारों के सहारे उन्होंने और दूसरी तमाम अभिनेत्रियों ने विधवाओं को उनके हक और उनपर समाज में होने वाले अन्याय पर सवाल उठाने में बहुत मदद की है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ विधवाओं के किरदारों के बारे में बताएंगे।
सफेद साड़ी पहनकर इन अभिनेत्रियों ने दिखाया अदाकारी का चटख रंग, ये हैं परदे पर विधवाओं के पांच दमदार किरदार
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आशा पारेख
फिल्म: कटी पतंग
हिंदी सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री आशा पारेख ने वर्ष 1971 में शक्ति सामंता के निर्देशन और निर्माण में बनी फिल्म 'कटी पतंग' में एक विधवा का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी में आशा का किरदार माधवी विधवा नहीं है लेकिन वह अपनी एक दोस्त की गैरमौजूदगी में एक विधवा होने का नाटक करती है। माधवी के जीवन में कई अप्रत्याशित इत्तेफाक होते हैं जिनका सामना वह पूरे संयम से करती है। इस किरदार में आशा पारेख के शानदार अभिनय को खूब सराहना मिली। इसके लिए उन्हें अपने करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
जया बच्चन
फिल्म: शोले
पिछली सदी के महानायक अमिताभ बच्चन उस वक्त तक जया भादुड़ी से शादी कर चुके थे और इस वजह से जया भादुड़ी, जया बच्चन बन चुकी थीं। वर्ष 1975 में आई हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक 'शोले' में जया बच्चन ने एक विधवा राधा का किरदार निभाया है। फिल्म का खलनायक गब्बर फिल्म के मुख्य किरदारों में से एक ठाकुर के पूरे परिवार को खत्म कर देता है। उसमें राधा का पति भी शामिल होता है। जया ने ठाकुर परिवार की शांत, सुशील और सहृदया विधवा बहू के किरदार को बहुत शानदार तरीके से निभाया है।
पद्मिनी कोल्हापुरी
फिल्म: प्रेम रोग
वर्ष 1982 में राज कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्रेम रोग' का तो आधार ही एक विधवा के दोबारा शादी करने का मुद्दा है। इस फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरी ने एक बड़े घर की विधवा मनोरमा का किरदार निभाया है। मनोरमा की शादी एक ठाकुर परिवार में होती है लेकिन जल्दी ही उसका पति मर जाता है। इसके बाद मनोरमा की जिंदगी में उसके बचपन का दोस्त देवधर आता है और वह उसी से प्यार करने लगती है। बाद में समाज की सभी रूढ़िवादिताओं को तोड़ कर यह जोड़ा शादी के बंधन में बंध जाता है। इस किरदार के लिए पद्मिनी कोल्हापुरी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया।
माधुरी दीक्षित
फिल्म: मृत्युदंड
हिंदी सिनेमा की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित ने भी प्रकाश झा के निर्देशन में वर्ष 1997 में आई फिल्म 'मृत्युदंड' में एक विधवा औरत केतकी का किरदार निभाया है। इस फिल्म में माधुरी दीक्षित का अभिनय उनके करियर की सबसे बेहतरीन प्रस्तुतियों में से एक है। वह एक विधवा के किरदार में अपने गांव के जमीदारों के खिलाफ अन्याय की लड़ाई लड़ती है। साथ ही, वह उन जमींदारों से अपने पति की मौत का भी बदला लेती है। इस पुरुषवादी समाज में एक दमदार महिला का किरदार निभाने के लिए माधुरी दीक्षित को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के स्क्रीन अवॉर्ड से नवाजा गया।