बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी हाल ही में फिल्म 'जोरम' में नजर आए थे। हालांकि, यह फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई, जिसे लेकर अभिनेता निराश हुए। अब उन्होंने फिल्म को कम दर्शक मिलने पर निराशा व्यक्त की है। उन्होंने वास्तविक सिनेमा के बजाय मुख्यधारा के मनोरंजनकर्ताओं को प्राथमिकता देने के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रचनातमक फिल्मों को आगे बढ़ाने के लिए अधिक सराहना और समर्थन की आवश्यकता है। मौजूदा प्रवृत्ति कला के लिए एक संभावित खतरा पैदा करती है।
Manoj Bajpayee: 'जोरम' की कम कमाई देख निराश हो गए थे मनोज बाजपेयी, बोले- असली सिनेमा नहीं देखना चाहते लोग...
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उन्होंने आगे कहा, 'जो लोग फिल्म देखने गए उन्हें यह बेहद पसंद आई। वे खुद तो मुंह-जुबानी इसका प्रचार कर ही रहे हैं। दस लोगों को भी इसे देखने के लिए कह रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसी फिल्मों पर यकीन नहीं करते और अगर करते भी हैं तो उन्हें फ्री में देखना चाहते हैं। वे लोग अन्य प्रकार की फिल्में देखने के लिए कर्ज लेंगे। उन्हें ऐसा करने में कोई आपत्ति नहीं है। हमारी लड़ाई इसी को लेकर है। हम देखना चाहते हैं कि हम जिस तरह की फिल्में बनाना चाहते हैं, उन्हें देखने में उनकी कितनी दिलचस्पी है।'
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मनोज ने कहा कि वे किस तरह ऐसी फिल्में बनाते हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं, क्योंकि उनका सिनेमा ब्रांड पूरी तरह से मनोरंजन मूल्य पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा, 'सिनेमा दो तरह का होता है। एक वह है, जहां यह कला का माध्यम है और दूसरे प्रकार का सिनेमा केवल आपका मनोरंजन करता है। आप टिकट खरीदते हैं, नाचते हैं, गाते हैं, एक्शन देखते हैं और यह खत्म हो जाता है। आप घर जाओ और इसके बारे में भूल जाओ। अगले शुक्रवार की प्रतीक्षा करो, लेकिन मैं सिनेमा को एक कला माध्यम के रूप में देखता हूं, जहां हम इसका उपयोग अपनी कहानियों को सर्वोत्तम तरीके से बताने के लिए करना चाहते हैं, ताकि फिल्म देखने वाले लोगों को यह पसंद आए और हम जो कहानियां सुनाते हैं, वह कुछ दिनों तक उनके दिमाग में बनी रहे। मेरे लिए यही सिनेमा है। बहुसंख्यक दर्शकों के लिए सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम है। वे सिर्फ थिएटर हॉल में सीटी बजाना चाहते हैं या लड़ाई का दृश्य देखकर हूटिंग करना चाहते हैं। अब लोग सिनेमाघरों में भी पटाखे फोड़ रहे हैं।'
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मनोज ने कहा, 'हालांकि, मेरे जैसे लोग आज तक कभी इससे नहीं डरे हैं। कुछ लोग कुछ फिल्में देखते हैं और दूसरी फिल्में बिल्कुल नहीं देखते या कम देखने जाते हैं। हम डरे हुए नहीं हैं, क्योंकि मुझे विश्वास है कि मैं जो कर रहा हूं वह सही सिनेमा है और यह न्याय कर रहा है। अगर हम इस तरह का सिनेमा नहीं बनाएंगे तो यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। सिनेमा उन फिल्मों के साथ नहीं चल सकता, जो केवल मनोरंजन के लिए बनी हों।'
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