फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' हिट न हो पाने की तमाम कमज़ोर कड़ियों में से एक सबसे बड़ी वाली कमजोर कड़ी थी इसका संगीत। ऐसा ही कुछ हाल ही में रिलीज हुए शाहरुख खान की फिल्म 'जीरो' के गाने में भी दिखा। इस गाने में मेरठिया खनक कहीं न कहीं मिसिंग है। आगे जानिए आखिर क्यों मेरठ की जमीन को नहीं छूती बउआ सिंह की 'इशकबाजी..' :-
बॉलीवुड के बउआ सिंह की 'इशकबाजी..' से मेरठ मिसिंग, जानें क्या है इसकी असली वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संगीतकार अजय-अतुल मराठी फिल्मों के नामी कंपोजर हैं। हिंदी फिल्में भी वे बड़ी-बड़ी कर चुके हैं। लेकिन ऋतिक रोशन वाली अग्निपथ में सोनू निगम का गाया गाना 'अभी मुझमें कहीं...' छोड़ दें तो उनके नाम कोई सुपर-डुपर गाना अभी तक दर्ज नहीं हो पाया है। वजह ये कि अजय-अतुल को ठेठ हिंदी पट्टी का लोकसंगीत सीखना अब भी बाकी है।
गाना: इशकबाजी..'
गायक कलाकार: सुखविंदर सिंह, दिव्य कुमार
गीतकार: इरशाद कामिल
संगीतकार: अजय-अतुल
फिल्म: 'जीरो'
शाहरुख खान के करियर का टर्निंग प्वाइंट मानी जा रही फिल्म जीरो में अजय-अतुल का संगीत फिल्म की जमीन मेरठ से अब तक मैच नहीं कर पाया है। इसकी एक खास वजह मानी जा रही है वह क्या है आगे जानिए।
मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शहर है। हरियाणा की रागिनियां यहां के लोक संगीत में बसी हैं। इसके अलावा ब्रज गीत भी यहां खूब गाए जाते हैं। ऐसे में बउआ सिंह जब जीवन में पहली बार उम्मीद से ज्यादा खुश होगा और ऐलानिया तौर पर गाना गाने के मूड में होगा तो क्या गाएगा।
गीतकार के तौर पर इरशाद कामिल ने सिचुएशन और मूड दोनों को सही पकड़ा है। लेकिन यही बात संगीत में मिसिंग है। चमड़े वाली ढोलक की थाप एक्ट्रसेलिक से मढ़ी ढोलक नहीं निकाल सकती। हारमोनियम मिसिंग है। खड़ताल मिसिंग है और इकतारा भी मिसिंग है।