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जिंदगी के आखिरी दिन भी गाने में व्यस्त थे मोहम्मद रफी, पुण्यतिथि पर जानें अनसुनी बातें

Fri, 31 Jul 2020 08:14 AM IST
shrilata biswas एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: shrilata biswas Updated Fri, 31 Jul 2020 08:14 AM IST
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Mohammed Rafi death anniversary here know about some facts
मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया

मोहम्मदी रफी साहब जैसा फनकार कोई दूसरा नहीं है। जिंदगी के आखिरी दिन भी रफी गाने में व्यस्त थे। तबीयत खराब होने के बाद भी वो अपने वादे के मुताबिक एक रिकॉर्डिंग की तैयारी कर रहे थे। 31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनकी पुण्यतिथि पर कुछ ऐसी अनसुनी बातें आपके सामने लाए हैं, जो उनकी गायकी के साथ व्यक्तिव को भी बयां करती हैं।

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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया

मोहम्मद रफी का जन्म पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में  24 दिसंबर 1924 को हुआ था। हाजी अली मोहम्मद के परिवार में जन्मे मोहम्मद रफी छह भाई बहनों में दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 1935 में रफी के पिता लाहौर चले गए और वहां भट्टी गेट के नूर मोहल्ले में हजामत बनाने का काम शुरू किया।

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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया

मोहम्म्द रफी के निधन के आठ साल बाद उनकी पत्नी बिलकिस रफी ने एक इंटरव्यू में उनके बारे में कई रोचक बातें बताई थीं। बिलकिस की बड़ी बहन की शादी रफी के बड़े भाई से हुई थी। उस समय बिलकिस 13 साल की थीं और छठी क्लास का एग्जाम दे रही थीं। उनकी बहन ने उनसे कहा था कि कल रफी से तुम्हारी शादी है। तब उन्हें शादी का मतलब भी पता नहीं था। शादी के वक्त रफी की उम्र 19 साल थी। 

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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया

मोहम्मद रफी को पब्लिसिटी बिल्कुल पसंद नहीं थी। वो जब भी किसी शादी में जाते थे तो ड्राइवर से कहते थे कि यहीं खड़े रहो। रफी सीधे शादी करने वाले जोड़े के पास जाकर बधाई देते थे और फिर अपनी कार में आ जाते थे। वो जरा देर भी शादी में नहीं रुकते थे। गाने के अलावा मोहम्मद रफी को बैडमिंटन और पतंग उड़ाने का बहुत शौक था।  

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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया

रफी के निधन से कुछ दिन पहले ही कोलकाता से कुछ लोग उनसे मिलने पहुंचे थे। वो चाहते थे कि रफी काली पूजा के लिए गाना गाएं। जिस दिन रिकॉर्डिंग थी उस दिन रफी के सीने में बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। हालांकि रफी बंगाली गाना नहीं गाना चाहते थे लेकिन फिर भी वो रिकॉर्डिंग में व्यस्त रहे। वो दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन था। हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था। 

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