'क्या अदा क्या जलवे तेरे पारो', 'सोना सोना', 'शाबा शाबा', 'नीचे फूलों की दुकान', 'मोरा पिया', 'मैं यहां तू वहां' और 'चली चली फिर चली चली' जैसे गाने को कंपोज करने वाले संगीतकार और गायक आदेश श्रीवास्तव ने तमाम हिट गाने दिए। उनका जन्म 4 सितंबर को मध्य प्रदेश में हुआ था। इतने हिट गाने देने के बाद भी अपने अंतिम समय में आदेश के पास इतने पैसे नहीं बचे थे कि वो अपना इलाज करा सकें। आज उनके जन्मदिन पर आपको बताते हैं कुछ खास बातें।
अंतिम दिनों में इस संगीतकार के पास नहीं बचे थे इलाज के पैसे, पत्नी ने किराए पर कमरा देकर किया गुजारा
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आदेश श्रीवास्तव को पहला ब्रेक साल 1993 में रिलीज हुई फिल्म कन्यादान से मिला। 1994 में 'आओ प्यार करें' फिल्म में संगीत देकर बतौर संगीतकार उन्होंने कदम रखा। जल्द ही आदेश ने एक युवा और योग्य संगीतकार और गायक के तौर पर अपनी पहचान बना ली।
आदेश श्रीवास्तव ने बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड हस्तियों के साथ भी गाने की शुरुआत की। मशहूर हॉलीवुड और पॉप गायक-गायिकाओं के साथ कई दफा स्टेज शेयर भी किया है। शकीरा, एकॉन समेत कई हस्तियों के साथ गाने गए। वो मशहूर टीवी शो 'सा रे गा मा पा' में एक जज के तौर पर भी नजर आए।
आदेश को असली पहचान साल 2000 में आई फिल्म 'रिफ्यूजी' से मिली। इस फिल्म में संगीत देने के लिए उन्हें आइफा अवॉर्ड मिला। इसके बाद 'रहना है तेरे दिल में (2001)' 'कभी खुशी कभी गम (2001)', 'बागबान (2003)' और 'राजनीति (2010) ' में उनका तैयार किया गया संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ।
आदेश ने अभिनेत्री और गायिक विजेयता पंडित से शादी रचाई थी। आदेश कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में चल रहा था। पैसों की तंगी के चलते उन्होंने बहुत परेशानी उठाई। उन्हें अपनी कारें तक बेचनी पड़ीं। अपना 51वां जन्मदिन मनाने के ठीक अगले दिन 5 सितंबर 2015 को उन्होंने अंतिम सांस ली। पांच साल के भीतर उनका कैंसर तीसरी बार उबरा था। उनके निधन के बाद परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। आर्थिक तंगी के चलते विजयेता को आदेश का कमरा भी किराए पर उठाना पड़ा।
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