नागरिकता कानून 2019 (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर देश के कई हिस्सों में अभी तक विरोध प्रदर्शन जारी है। इस कानून का विरोध करते हुए एक महीने से ऊपर हो गए हैं। वहीं कुछ विश्वविद्यालयों के छात्रों के अलावा कई बॉलीवुड सितारे भी इस काननू के खिलाफ है। इनमें नसीरुद्दीन शाह, अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर और नंदिता दास जैसे कई कलाकार शामिल हैं। ऐसे में अब सिनेमा, कला और इतिहासकार सहित देश की करीब 300 से ज्यादा बड़ी हस्तियों ने सीएए और एनआरसी का विरोध करने वाले छात्रों के लिए खुला पत्र लिखा है।
नसीरुद्दीन, मीरा नायर समेत 300 हस्तियों ने सीएए का विरोध करने वालों का किया सपोर्ट, लिखा खुला पत्र
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अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, फिल्म निर्माता मीरा नायर, गायक टीएम कृष्णा, लेखक अमिताव घोष, इतिहासकार रोमिला थापर समेत 300 से ज्यादा हस्तियों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का विरोध करने वाले छात्रों और अन्य के साथ एकजुटता प्रकट की है। ‘इंडियन कल्चरल फोरम’ में 13 जनवरी को प्रकाशित हुए बयान में इन हस्तियों ने कहा कि सीएए और एनआरसी भारत के लिए 'खतरा' हैं। बयान में कहा गया है, ‘हम सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले और बोलने वालों के साथ खड़े हैं। संविधान के बहुलवाद और विविध समाज के वादे के साथ भारतीय संविधान के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए उनके सामूहिक विरोध को सलाम करते हैं।’
इसमें कहा गया है, ‘हम इस बात से अवगत हैं कि हम हमेशा उस वादे पर खरे नहीं उतरे हैं, और हममें से कई लोग अक्सर अन्याय को लेकर चुप रहते हैं। वक्त का तकाजा है कि हम सब अपने सिद्धांत के लिए खड़े हों।’ बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में लेखिका अनीता देसाई, किरण देसाई, अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह, जावेद जाफरी, नंदिता दास, लिलेट दुबे, समाजशास्त्री आशीष नंदी, कार्यकर्ता सोहेल हाशमी और शबनम हाशमी शामिल हैं।
इसमें कहा गया है कि मौजूदा सरकार की नीतियां और कदम धर्मनिरपेक्ष और समावेशी राष्ट्र के सिद्धांत के खिलाफ हैं। इन नीतियों को लोगों को असहमति जताने का मौका दिए बिना और खुली चर्चा कराए बिना संसद के जरिए जल्दबाज़ी में पारित कराया गया है। बयान के मुताबिक, 'भारत की आत्मा खतरे में हैं। हमारे लाखों भारतीयों की जीविका और नागरिकता खतरे में है। एनआरसी के तहत, जो कोई भी अपनी वंशावली (जो कई के पास है भी नहीं) साबित करने में नाकाम रहेगा, उसकी नागरिकता जा सकती है।'
बयान में कहा गया है कि एनआरसी में जिसे भी अवैध माना जाएगा, उसमें मुस्लिमों को छोड़कर सभी को सीएए के तहत भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। शख्सियतों ने कहा कि सरकार के घोषित उद्देश्य के विपरीत, सीएए से प्रतीत नहीं होता है इस कानून का मतलब केवल उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को आश्रय देना है। उन्होंने श्रीलंका, चीन और म्यामां जैसे पड़ोसी देशों को सीएए से बहार रखने पर सवाल किया।
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