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जायरा से पहले धार्मिक वजह से मोहम्मद रफी ने भी छोड़ दिया था गाना, चौंक गया था बॉलीवुड

Wed, 03 Jul 2019 12:24 PM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: anand anand Updated Wed, 03 Jul 2019 12:24 PM IST
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not Zaira Wasim singer Mohammad Rafi was stopped to sung song
mohammad rafi - फोटो : file photo
करीब चार साल पहले बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में प्रवेश करने वाली एक मुस्लिम अभिनेत्री जायरा वसीम ने हाल ही में फिल्म लाइन छोड़ने का एलान करते हुए जो सब कहा है, उसका आशय यह है कि इस्लाम के अनुसार फिल्मों में काम करना गलत है। उनके अल्लाह को ये मंजूर नहीं। फिल्मों में काम करने से मेरे ईमान में दखलंदाजी हो रही थी। इससे मेरे मजहब के साथ मेरा रिश्ता खतरे में पड़ गया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि किसी कलाकार ने आध्यात्मिक या धार्मिक वजहों से फिल्मी दुनिया से किनारा करने का फैसला लिया हो। इस फेहरिस्त में विनोद खन्ना का नाम लिया जाता है। वो कामयाबी के शिखर पर थे जब उनकी जिंदगी में ओशो में आए। विनोद खन्ना ने ओशो से दीक्षा ली और उनके आश्रम के गार्डन में माली का काम करने के लिए तैयार हो गए। ऐसा ही कुछ मोहम्मद रफी के साथ भी हुआ था।
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जायरा वसीम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
एक बार हरदिल अजीज और महान गायक मोहम्मद रफी ने भी मौलवियों के कहने पर तब फिल्मों में गाना बंद कर दिया था, जब वह अपने करियर के शिखर पर थे। लेकिन यह तो अच्छा हुआ कि जल्द ही रफी साहब को यह एहसास हो गया कि फिल्मों में गाना कहीं से भी गलत नहीं है। वरना दुनिया ऐसे सैकड़ों नगमों से महरूम रह जाती जो उन्होने एक ब्रेक के बाद फिर से गाए। यह बात तब की है जब मोहम्मद रफी साहब हज पर गए तो उन्हें कहा गया कि अब आप हाजी हो गए हैं। इसलिए अब आपको गाना-बजाना सब बंद कर देना चाहिए।

रफी साहब एक सीधे-सच्चे और बेहद शरीफ इंसान थे। वह लोगों की बातों में आ गए और उन्होंने गाना छोड़ दिया। जिससे फिल्मी दुनिया में हड़कंप मच गया। जिस गायक की दीवानगी लोगों के सिर चढ़ कर बोल रही थी, वह अचानक गाना बंद कर दे, तो उनके प्रशंसकों के दिल पर क्या बीतेगी, यह कल्पना की जा सकती है। हालांकि आज भारतीय फिल्म संगीत की इस बड़ी घटना के बारे में ज़्यादातर लोगों को कुछ पता नहीं है। कुछ लोग इस घटना को अफवाह बताते हैं और कुछ कहते हैं ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था। यहां तक रफी जिन मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंदजी के साथ बरसों गाते रहे। जिनके साथ रफी ने 'सारे शहर में आपसा कोई नहीं' और 'वादा करले साजना' जैसे कितने ही सुपर हिट गीत दिए, उन्हें भी ऐसी कोई घटना याद नहीं कि रफी साहब ने कभी इस्लाम के आधार पर गाना छोड़ दिया था। 
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मोहम्मद रफी - फोटो : file photo
इस जोड़ी में अब मौजूद आनंद जी से जब मैंने इस संबंध में बात की तो वह बोले, "मुझे तो ऐसी घटना याद नहीं आ रही कि उन्होंने किसी मौलवी के कहने पर गाना छोड़ दिया हो। हमारे साथ तो वह अंत तक गाते रहे।" लेकिन जब इस घटना का सच जानने के लिए मैंने रफी साहब के बेटे शाहिद रफी से बात की तो उन्होंने इस घटना को सच बताते हुए बाकयदा पुष्टि की। शाहिद रफी साहब मेरे पूछने पर बताते हैं, "जी यह सच है, रफी साहब ने इस्लाम की बात पर एक बार फिल्मों में गाना बंद कर दिया था।

लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि उन्होंने कुछ समय बाद अपने फैसले को बदल दिया और सभी ने राहत की सांस ली।" क्या यह तभी की बात है जब वह हज से लौटे थे और उनको मौलवियों ने अब फिल्मों के गीत संगीत से दूर रहने की सलाह दी?

यह पूछने पर शाहिद रफ़ी बताते हैं, "जी बिल्कुल, उन्होंने ऐसा फ़ैसला किया था। मसले कुछ ऐसे बन गए थे। यह सन 1971 की बात है, रफ़ी साहब और हमारी अम्मा दोनों हज पर गए थे। जब वह वहाँ से लौटने लगे तो वहाँ के मौलवियों ने ही उन्हें कहा कि अब आप हाजी हो गए हैं। इसलिए अब आपको फिल्मों में नहीं गाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने देश लौटकर गाने गाना बंद कर दिया।"
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मोहम्मद रफी - फोटो : file photo
तब कितने समय तक रफी साहब ने गाने नहीं गाए और क्या नौशाद साहब के समझाने पर ही उन्होंने फिर से गाना शुरू किया? इस पर शाहिद रफ़ी बताते हैं, "कितने समय तक गाना नहीं गाया यह तो पूरा याद नहीं। लेकिन यह पता है कि उनको नौशाद साहब ने भी समझाया, कुछ और लोगों ने भी और मेरे बड़े भाइयों ने भी समझाया।

उनके गाना बंद करने से घर परिवार का ख़र्च चलना बंद हो जाना था।" "तब भाइयों ने कहा कि आपका गला ही परिवार के रोजगार का जरिया है। अब आप न कोई नौकरी कर सकते हैं और न कोई बिजनेस और न कुछ और। बस अल्लाह ने जो गला दिया है, जो इतनी खूबसूरत आवाज बख्शी है, वही सब कुछ है। इसलिए आप फिल्मों में फिर से गाइए। तब रफी साहब ने एक ब्रेक के बाद फिर से फिल्मों में गाना शुरू किया।"
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मोहम्मद रफी - फोटो : file photo
उधर, पुराने फिल्म प्रचारक रहे और रफी साहब पर 'एक फरिश्ता था वो' और 'वो जब याद आए' जैसी पुस्तक लिख चुके धीरेन्द्र जैन बताते हैं, "नौशाद साहब ने ही मुझे बताया था कि रफी साहब ने हज से लौटकर फिल्मों में गाना बंद कर दिया था। हज से लौटकर करीब कई महीने तक रफी साहब ने किसी गीत की रिकॉर्डिंग नहीं की थी। उनको मौलवियों ने कहा था कि हज के बाद नाचना गाने की इजाज़त हमारे दीन धर्म में नहीं है, इसलिए आप अब गाना बंद कर दीजिए।" जैन आगे बताते हैं, "तब नौशाद साहब ने उन्हें समझाया कि यह गाना छोड़ कर गलत कर रहे हो मियां।

ईमानदारी का पेशा कर रहे हो, किसी का दिल नहीं दुखा रहे। यह भी एक इबादत है। अब बहुत हो गया, अब गाना शुरू कर दो। तब रफी साहब ने फिर से गाना शुरू कर दिया।" आज भी रफी साहब किस तरह देश दुनिया में लोगों के दिल में बसे हैं, वह सब किसी से छिपा नहीं है। रफी साहब के इंतकाल को अगले साल जुलाई में 40 बरस हो जाएंगे। लेकिन रफी के गीत आज भी उतने लोकप्रिय हैं, जितने उनके रहते थे। कोई उनसे आगे या उनकी बराबरी तो क्या उनके ज्यादा करीब भी नहीं पहुंच सका। ये तो भला हो नौशाद साहब का और रफी साहब के बेटों का जिनकी सलाह मान उन्होंने फिर से गाना शुरू किया और अपनी वापसी के बाद करीब 8 साल तक वह लगातार गीत गाते रहे।
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