पाकिस्तान: 'हमारा कल्चर, हमारा मियां है', जानें मॉडल के बयान के बाद सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड हुआ #OurhusbandisourCulture
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उन्होंने आगे कहा था, 'लेकिन मुझे पता होता है कि मेरे मियां के कपड़े कहां रखे हैं। मुझे यह भी मालूम होता है कि मेरे मियां की कौन सी चीज कहां पड़ी है या उन्हें क्या खाना है। और मुझे ये बात पता होनी भी चाहिए। क्योंकि मैं उसकी बीवी हूं। मैं एक औरत हूं, इसलिए मेरे बारे में उसे कुछ पता हो ना हो उसकी चीजे मुझे पता होनी चाहिए। मैं यही देखकर बड़ी हुई हूं। भले आजकल बहुत लिबरल्स आ गए हैं। लेकिन मेरी सोच है कि महिलावाद में अपने मियां का ख्याल रखूं और उसे इज्जत दूं और जो हो सके करूं। '
Indian men and women hockey teams reached semi finals of #Tokyo2020
— Shiraz Hassan (@ShirazHassan) August 2, 2021
Meanwhile in Pakistan: ‘Our husband is our Culture’ is trending.
all the men agreeing with #SadafKanwal are mamas babies who think marriage is having a nokar/massi pic.twitter.com/mT84F3CGzj
— abdullah imran 🇵🇸 (@abdifyy) July 31, 2021
बता दें कि लाहौर की वकील रीमा उमर ने इस इंटरव्यू को ट्वीट करते हुए लिखा, 'आजकल बहुत लिबरल्स आ गए हैं। ' रीमा के इस वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट किया, 'ऐसी संस्कृति, जिसमें पति का ख्याल पत्नी नन्हे बच्चे की तरह रखती है। ' वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि पुरुष नौकरानी चाहते हैं या पत्नी? वहीं, कुछ लोगों ने मॉडल का समर्थन भी किया है। एक सोशल मीडिया यूजर ने सदफ का समर्थन करते हुए लिखा है, 'इसमें समस्या क्या है। वो इस उपमहाद्वीप की संस्कृति की बात कह रही हैं और इस पर गर्व होना चाहिए। लेकिन जिस तरह से उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। इससे पता चलता है कि लोगों को मर्दों के हक में एक भी बात पसंद नहीं है।
What's the issue ma'am. She is just reflecting the norms and the Very culture of the subcontinent and we are proud of it. This tweet shows that you can't even tolerate a single thing spoken in favour of the men. If you can taunt on this type of argument, then you may also have..
गौरतलब है कि इस इंटरव्यू में सदफ के साथ उनके पति शहरोज भी शामिल थे। इस मामले में शहरोज का कहना था कि 'महिलाएं जो कर सकती हैं, वो पुरुष भी नहीं कर सकते। दोनों को अपनी जगह समझने की जरूरत है। अल्लाह ने दोनों को अलग-अलग भूमिका दी है। अगर ऐसा नहीं होता तो अल्लाह दोनों के अलग-अलग नहीं बनाता। महिला और पुरुष अलग-अलग तरह से सोचते हैं। अगर दोनों एक दूसरे का आदर करेंगे तो यही समानता है। '