सदाबहार फिल्मों के बेहतरीन कलाकार राजेंद्र कुमार आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके बेहतरीन अभिनय ने उन्हें दर्शकों के दिलों में जिंदा रखा है। राजेंद्र ने अपने चार दशक के करियल में कई सफल फिल्में दीं। साथ ही 60 के दशक में तो एक वक्त ऐसा भी आया, जब एक ही समय पर उनकी पांच से छह फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुईं। यही कारण रहा कि इंडस्ट्री में वह जुबली कुमार के नाम से मशहूर हो गए। तो आइए आज राजेंद्र के जन्मदिन पर उनके फिल्मी करियर, संघर्ष और जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर गौर फरमा लेते हैं।
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राजेंद्र कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
20 जुलाई 1929 को सियालकोट में जन्मे राजेंद्र कुमार का बचपन से ही फिल्मों के प्रति रुझान था। वहीं, राजेंद्र ने आगे बढ़ते हुए अपने रुझान को ही अपना पेशा बना लिया। राजेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1950 की फिल्म 'जोगन' से की थी, जिसमें दिलीप कुमार और नरगिस जैसे सितारे थे। डेब्यू मूवी में ही राजेंद्र के अभिनय को दर्शकों के जरिए खूब सराहा गया था। राजेंद्र से जुबली कुमार बने स्टार के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। एक्टर ने समय-समय पर इसके लिए कई ठोकरें खाई थीं।
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राजेंद्र कुमार
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रिपोर्ट की मानें तो, राजेंद्र कुमार ने जब अपने सपने को सच करने के लिए मुंबई का रुख किया था, तो उस वक्त उनकी जेब में महज 50 रुपये थे। यह पैसे राजेंद्र ने अपने पिता की घड़ी बेचकर जुटाए थे। राजेंद्र को गीतकार राजेंद्र कृष्ण का साथ मिला था, और उन्होंने 150 रुपये के वेतन पर निर्देशक एचएस रवैल के साथ बतौर सहायक काम किया था। यूं तो, राजेंद्र को पहली दफा 1950 की फिल्म 'जोगन' में देखा गया था, लेकिन उन्हें असली पहचान मिलने में सात वर्ष का लंबा समय लगा था।
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राजेंद्र कुमार
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1957 में आई फिल्म 'मदर इंडिया' ने राजेंद्र कुमार की किस्मत बदल दी। इसमें नरगिस मुख्य भूमिका में थीं। वैसे तो मूवी में राजेंद्र कुमार का किरदार बेहद छोटा था, लेकिन उन्होंने इसमें जान डाल दी, और दर्शकों की तारीफें बटोरने में कामयाब रहे। वर्ष 1963 में राजेंद्र, फिल्म 'महबूब' का हिस्सा बने। यह मूवी पर्दे पर आते ही छा गई, और राजेंद्र सुपरस्टार बन गए। इसके बाद एक्टर ने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजेंद्र कुमार का टैलेंट ही था, जिससे वह खुद को इंडस्ट्री में स्थापित कर पाए, और वर्ष 1964, 1965 और 1966 यानी तीन वर्ष तक लगातार फिल्मफेयर अवॉर्ड के बेस्ट एक्टर के लिए नॉमिनेट हुए। वर्ष 1969 में एक्टर को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
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राजेंद्र कुमार
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हालांकि, 70 के दशक तक आते-आते राजेंद्र कुमार का चार्म फीका पड़ने लगा, और उनकी जगह राजेश खन्ना ने ले ली। फिल्में न मिलने के कारण राजेंद्र आर्थिक तंगी से जूझने लगे और उन्हें अपना लकी बंगला एक्टर राजेश खन्ना को बेचना पड़ा था। वहीं, 12 जुलाई 1999 को राजेंद्र ने आखिरी सांस लेकर इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया, लेकिन अपने बेहतरीन काम से खुद को अमर कर गए।