वरिष्ठ कला निर्देशक राजू सपते की आत्महत्या के कारणों की जांच को लेकर महाराष्ट्र का गृह विभाग सक्रिय हो गया है। राजू सपते ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड कर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्लूआईसीई) के कुछ नेताओं पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। अरसे तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के निर्माताओं, निर्देशकों व अन्य तकनीशियनों और कलाकारों को अपने प्रभाव में रखने वाली संस्था एफडब्लूआईसीई के कथित मनमानी का मुकाबला करने के लिए अब मुंबई में एक दूसरी संस्था ऑल इंडिया सिने वर्कर्स यूनियन (एआईसीडब्लूए) ने कमर कसी है।
राजू सपते आत्महत्या मामला: अब उठेगा पूरी साजिश से परदा, गृहमंत्री पाटिल तक पहुंचा ‘दबंगों’ का मामला
करोड़ों के घोटाले से जुड़े तार
एआईसीडब्लूए ने राजू सपते की आत्महत्या और इसके पीछे के कारणों की जांच के अलावा सिने कामगारों की मदद के नाम पर इकट्ठा किए गए करोड़ों रुपये के चंदे को कथित रूप से गायब कर दिए जाने की भी जांच कराने की मांग महाराष्ट्र सरकार से की है। एआईसीडब्लूए के एक प्रतिनिधिमंडल ने इसी बाबत राज्य के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल और गृहराज्यमंत्री सतेज पाटिल से मुलाकात भी की। प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री को ये जानकारी भी दी कि फेडरेशन के ‘आतंक’ के चलते ही तमाम हिंदी फिल्म, टीवी व सीरीज निर्माता दूसरे शहरों व राज्यों का रुख कर रहे हैं।
मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी संस्था होने का दावा करने वाली फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्लूआईसीई) के पदाधिकारी अपने सदस्यों की कुल संख्या लाखों में बताते रहे हैं। लेकिन, पिछले साल जब कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा और निर्माता व अभिनेता सलमान खान ने इन कर्मचारियों को नकद धन की व्यवस्था करने के लिए इन सदस्यों की जानकारी इनके खाता नंबर सहित मांगी तो फेडरेशन 50 हजार लोगों के नाम भी नहीं दे सकी। ये सिलसिला इस साल भी दोहराया गया। इससे पहले फेडरेशन के खिलाफ भारत सरकार के प्रतिस्पर्धा आयोग में भी मामला गया और वहां से भी फेडरेशन को साफ निर्देश मिले कि वह किसी भी शूटिंग में व्यवधान नहीं डालेंगे। पर हालात जमीन पर वैसे के वैसी ही रहे। राजनीतिक संरक्षण के चलते फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्लूआईसीई) ने दशकों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपना दबदबा बनाकर रखा है।
लेकिन, अब ये मामला हद से बाहर निकलता दिखा तो महाराष्ट्र सरकार ने इसके बारे में सूचना इकट्ठा करनी शुरू की है। मराठी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा नाम रहे कला निर्देशक राजू सपते की आत्महत्या के मामले ने पूरे राज्य में खासतौर से महाराष्ट्र की सियासत से जुड़े लोगों का ध्यान इस तरफ खींचा है। एफडब्लूआईसीई में अरसे से एक ही गुट ये संस्था चलाता रहा है। इसकी सदस्य संस्थाओं में से इंडियन फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने भी बीते साल अपने बाईलॉज में बदलाव करके लगातार किसी भी व्यक्ति के पदाधिकारी बने रहने पर लगी रोक को हटा दिया है। इंडियन फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित ही एफडब्लूआईसीई का भी चेहरा हैं और उन्हीं के संरक्षण में फेडरेशन की सारी बैठकों का एजेंडा बनता रहा है।
फिल्म इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ कला निर्देशक को काम न करने देने की साजिश रचकर उन्हें पैसे के लिए तबाह कर देने और फिर उन्हें आत्महत्या करने तक के लिए मजबूर कर देने का ये मामला महाराष्ट्र की सियासत में काफी हलचल मचाने वाला है। ये मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। इसी के बाद महाराष्ट्र के गृह विभाग ने इसमें दखल दिया। गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटिल से मुलाकात के बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स यूनियन (एआईसीडब्लूए) के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने बताया कि वह और उनकी संस्था राजू सपते की शहादत को बेकार नहीं जाने देगी।